बीता आधा मेला, टॉयलेट का फंसा है झमेला

Updated Date: Fri, 24 Jan 2020 05:46 AM (IST)

-मनमानी पर उतरे हैं वेंडर, नहीं सुन रहे अधिकारियों की बात

-जरूरत के मुताबिक शौचालय नहीं मिलने से परेशान हैं श्रद्धालु

8000

पब्लिक टॉयलेट लगाए जाने का प्लान था मेला क्षेत्र में

6000

टॉयलेट लगाए जाने का किया जा रहा है अधिकारियों द्वारा दावा

70

फीसदी तक ही टॉयलेट सप्लाई किए जा सके हैं कल्पवासियों को

PRAYAGRAJ: तीन स्नान बीत चुके हैं। करीब आधा मेला बीत चुका है। लेकिन टॉयलेट की प्रॉब्लम सॉल्व नहीं हो सकी है। गौरतलब है कि कुंभ के दौरान भी सेम प्रॉब्लम आई थी। लेकिन किसी ने भी सबक लेने की जहमत नहीं उठाई। आलम यह है कि संस्थाओं को जरूरत के हिसाब से टॉयलेट उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। इसके चलते श्रद्धालुओं को सेक्टर ऑफिसेज के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। सबसे ज्यादा प्रॉब्लम्स कल्पवासियों को हो रही है। नतीजा यह है कि कई जगहों पर लोग मेलाक्षेत्र में खुले में शौच को मजबूर हैं।

पब्लिक और पर्सनल दोनों में पेंच

मेले में तकरीबन आठ हजार पब्लिक टॉयलेट लगाए जाने हैं। इनमें से छह हजार तक लगाए जाने की बात कही जा रही है। इसी तरह संस्थाओं में लगाए जाने वाले प्राइवेट टॉयलेट की संख्या भी कम है। अभी तक सिर्फ 60 से 70 फीसदी टॉयलेट की सप्लाई की गई है। खुद संस्था वाले इन टॉयलेट्स के लिए सेक्टर ऑफिसेज के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

पिछले साल से लागू हुई वेंडर व्यवस्था

-मेले में वेंडर व्यवस्था पिछले साल से लागू हुई है।

-इसके तहत स्वास्थ्य विभाग को टॉयलेट लगाए जाने की मॉनीटरिंग करनी होती है।

-असली काम वेंडर्स का होता है। वह पब्लिक की डिमांड पर पर्ची दिखाकर टॉयलेट प्राप्त करते हैं।

-लेकिन, इस व्यवस्था में सबसे बड़ी दिक्कत वेंडर्स की मनमानी है।

-टेंडर हासिल करने के बाद वेंडर सप्लाई में खरे नहीं उतर रहे हैं।

-इनके पास सामान की कमी बनी रहती है और जवाबदेही स्वास्थ्य विभाग की होती है।

सेक्टर चार और पांच में ज्यादा प्रॉब्लम

टॉयलेट का प्रॉपर इंतजाम न हो पाने से सबसे ज्यादा दिक्कत कल्पवासियों को हो रही है। सेक्टर चार और पांच में सबसे ज्यादा कल्पवासियों को बसाया गया है। प्रत्येक संस्था के अंडर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु रह रहे हैं। एक माह के कठिन व्रत के दौरान उनका शौच का सिस्टम अभी तक नहीं बन सका है। जबकि अभी तक तीन स्नान पूरे होने के कगार पर हैं। इनमें पौष पूर्णिमा, मकर संक्रांति का स्नान हो जाएगा। शुक्रवार को मौनी अमावस्या का स्नान है।

टॉयलेट आसानी से नहीं मिल रहा है। अधिकारियों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के भंडार में जाओ तो कहते हैं वेंडर लगाएगा और वेंडर है कि उसका पता ही नही चलता।

-सुरेंद्र नाथ शुक्ला, कल्पवासी

सरकार को टॉयलेट की व्यवस्था पर ध्यान देना होगा। ऐसा रहा तो आने वाले समय में समस्या उत्पन्न हो सकती है। मेला प्रशासन को वेंडर्स पर लगाम लगाकर रखनी चाहिए।

-सूर्यमणि शुक्ला, कल्पवासी

दूर-दराज से आने वाले कल्पवासियों को सुविधा देना सर्वाेपरि होना चाहिए। इस तरह से एक-एक चीज के लिए परेशान होंगे तो फिर वह व्रत और अनुष्ठान का कार्य किस प्रकार कर सकेंगे।

-राधे श्याम दुबे, श्रद्धालु

Posted By: Inextlive
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