बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रितों के साथ हो रही नाइंसाफी

हाई क्वालीफाइड होने के बावजूद दी जा रही चतुर्थ श्रेणी की नौकरी

ALLAHABAD: यहां बीटेक व एमटेक और एमबीए एवं पीएचडी डिग्री धारकों की दशा दयनीय है। अमूमन इन डिग्रियों को हासिल करने वाले युवा अच्छी सैलरी और हायर पोस्ट पर जॉब का सपना देखते हैं। मगर, यूपी के बेसिक शिक्षा विभाग में गंगा उल्टी बह रही हैं। अनट्रेंड लोगों को सहायक अध्यापक के पद पर समायोजित करने वाले इस विभाग में यह व्यवस्था मृतक आश्रित कोटे से नौकरी पाने वालों के साथ लागू है। हाईली क्वालीफाइड होने के बाद इन युवाओं को उच्च पदों पर पोस्टिंग करने का विभाग में कोई आप्शन नहीं है।

वर्ष 2009 में हुआ था बदलाव

बेसिक शिक्षा विभाग में मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी में बदलाव की ये व्यवस्था वर्ष 2009 में लागू हुई। इसके पूर्व मृतक कोटे से नौकरी पाने वाले लोगों को दो वर्षीय विभागीय ट्रेनिंग दी जाती थी। इसके बाद उन्हें अलग-अलग वर्ग में जॉब दी जाती थी। ट्रेनिंग के दौरान नियत वेतन दिया जाता था। ट्रेनिंग पूरी होते ही पद के अनुरूप निर्धारित वेतनमान दिया जाता था। वर्ष 2009 के बाद परिवर्तित नियम के तहत मृतक आश्रितों को सिर्फ चतुर्थश्रेणी के अन्तर्गत नौकरी दी जाने लगी। बदलाव के बाद मृतक आश्रित में जितने भी अभ्यर्थी आए। उन्हें चतुर्थ श्रेणी के तहत ही नौकरी दी गई।

नए नियम से इन्हें दी गई नौकरी

नया नियम लागू होने के बाद नौकरी पाने वालों में रत्‍‌नेश कुमार, बृजेन्द्र सिंह, अजय कुमार त्रिपाठी, मयंक मिश्र, विनय तिवारी, अनिल पांडेय, सुनील सिंह, रशीद हुसैन, लोकेन्द्र मणि मिश्र जैसे लोग शामिल हैं। जिन्हें पीएचडी, बीफार्मा, बीटेक और एमटेक जैसी डिग्री हासिल करने के बाद भी मृतक आश्रित में चतुर्थ श्रेणी की नौकरी दी गई। वहीं जुबेर अहमद ने एमबीए, अभिषेक श्रीवास्तव बीएड, अंकुर श्रीवास्तव बीएड, टेट प्राथमिक व जूनियर दोनों, आशीष द्विवेदी के पास एलएलबी डिग्री होने के बावजूद चपरासी की नौकरी दी गई।

मृतक आश्रित में नौकरी पाने वालों की यह दशा वर्ष 2009 के बाद हुई। इस नियम में संघ की तरफ से सरकार व विभाग लगातार बदलाव की मांग की जा रही है। संघ की मांग पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई।

दिवाकर पांडेय

मंडल अध्यक्ष, यूपी प्राथमिक मृतक आश्रित शिक्षणेत्तर कर्मचारी संघ

Posted By: Inextlive