मिथ छोडि़ए, हकीकत जानिए

Updated Date: Sun, 25 Sep 2016 07:40 AM (IST)

केवल एक फीसदी मामलों में ही डेंगू से होती है मौत

सोशल मीडिया पर अनाप-शनाप मैसेजेस से भी भ्रमित हो रही जनता

मार्केट में बढ़े दामों पर बिक रहा बकरी का दूध, कई गुना बढ़ गई जांच

vineet.tiwari@inext.co.in

ALLAHABAD: डेंगू जानलेवा नही है। सिर्फ एक फीसदी मामलों में इससे मौत होती है। इसके उलट डेंगू को लेकर मार्केट में कई तरह की भ्रांतियां हैं। इसका फायदा उठाने में सभी लगे हैं। यहां तक कि प्लेटलेट्स बढ़ाने के चक्कर में मार्केट में बकरी का दूध दो से तीन गुना दामों पर बिकने लगा है। सोशल मीडिया का कंटेंट इसमें सब पर हावी है। डॉक्टरों का कहना है कि महज उचित इलाज और तरल आहार लेने मात्र से डेंगू से निजात पाई जा सकती है।

दो श्रेणियों में डेंगू बुखार

डॉक्टर्स कहते हैं कि डेंगू के बुखार को दो श्रेणियों में बांटा जा सकता है। अगर मरीज की कैपलरी लीकेज है तो इसे गंभीर डेंगू माना जाएगा, अन्यथा मरीज को जल्दी भर्ती करने की भी जरूरत नहीं होती। मरीज को तेज पेट दर्द, उल्टी, असंतुलित मानसिक हालात, टैंडरनेस और अधिक कमजोरी है तभी उसे भर्ती किया जाता है।

हकीकत और डेंगू

सत्तर प्रतिशत मामलों में डेंगू का इलाज आसानी से हो जाता है। मरीज को हर घंटे 150 एमएल तक साफ पानी देते रहें, बशर्ते उसे हर चार से छह घंटे में यूरीन होती रहे।

डेंगू की कुल चार किस्म होती है। एक बार एक किस्म का डेंगू हुआ है तो दूसरी बार अलग किस्म का डेंगू हो सकता है।

प्लेटलेट्स दस हजार से नीचे आने और ब्लीडिंग होने पर ही प्लेटलेट्स चढ़ाया जाना चाहिए। अन्यथा मरीज को परेशानी हो सकती है।

मशीन से की जाने वाली रीडिंग में प्लेटलेट्स की असली संख्या से काफी फर्क आता है। इससे रिपोर्ट भी गलत पेश होती है।

बकरी का दूध या दूसरे उपाय करने से प्लेटलेट्स की संख्या में अधिक अंतर नही आता। यह तभी बढ़ती हैं जब डेंगू रिकवर हो जाए।

अनाप-शनाप मैसेजेस

आजकल डेंगू को लेकर सोशल मीडिया ने हौव्वा बना रखा है। मैसेजेस पढ़कर लोग भ्रमित हो रहे हैं। कई तरह की दवाओं से डेंगू के इलाज के दावे किए जा रहे हैं। डॉक्टर्स का कहना है कि इलाज केवल डॉक्टरी सलाह पर ही कराई जाए। खुद डॉक्टर बनने से मरीज को फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। तमाम तरह की दवाओं और टोटके यूज करने के साथ लोगों में प्लेटलेट्स के जांच की प्रवृत्ति भी बढ़ती जा रही है। लाउदर रोड स्थित एक प्राइवेट पैथोलॉजी के संचालक ने बताया कि डेंगू के सीजन में आठ से दस गुना तक खून की जांच के मामले आ रहे हैं। जरा सा बुखार और कमजोरी होने पर पब्लिक प्लेटलेट्स काउंट करा रही हैं। एक जांच में चार से पांच सौ रुपए खर्च आता है। बता दें कि डेंगू की अधिकृत जांच केवल मेडिकल कॉलेज लैब में होती है।

Posted By: Inextlive
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