विजय पर 'विजय' में आदेश का रोड़ा

Updated Date: Thu, 29 Oct 2020 10:08 AM (IST)

-कमिश्नर कोर्ट से मिली मोहलत की वजह से पीडीए नहीं ढहा सका बिल्डिंग

-सुबह से कार्रवाई की तैयारी में बैठे थे अफसर, आदेश आते ही दांव पड़ा उल्टा

PRAYAGRAJ: जेसीबी लेकर माफियाओं की बिल्डिंग ढहाने में जुटे पीडीए अफसरों का दांव बुधवार को उल्टा पड़ गया। सारी तैयारी के बावजूद भदोही विधायक व माफिया विजय मिश्रा की बिल्डिंग वे नहीं गिरा सके। कई माफियाओं की आलीशान इमारत जमींदोज करने में मिली सफलता के बाद अधिकारी फुल कांफिडेंस में थे। जार्जटाउन थाने पर फोर्स व जेसीबी के साथ पीडीए अफसर सुबह से डटे रहे। अपील पर सुनवाई बाद कमिश्नर कोर्ट से आदेश आया तो पीडीए अफसरों के चेहरे मुरझा गए। क्योंकि कमिश्नर कोर्ट ने कार्रवाई की पूरी गेंद फिर पीडीए के पाले में डाल दी। ऐसे में माफिया विजय मिश्र की बिल्डिंग पर कार्रवाई नहीं हो सकी। विजय मिश्र की बिल्डिंग पर तैयारी के बावजूद थमी कार्रवाई लोगों में चर्चा का विषय बन गई।

फिर पीडीए के पाले में पहुंची गेंद

माफियाओं के खिलाफ सूबे की सरकार सख्त तेवर अपनाए हुए है। पूर्व सांसद अतीक अहमद हों या फिर इनकी गैंग से जुड़े लोग व रिश्तेदार। सभी की आलीशान इमारत पीडीए अब तक ढहा चुका है। यहां तक कि अतीक के घरौंदे को जमींदोज कर दिया गया। माफिया बच्चा पासी, तोता सहित पूर्व ब्लॉक प्रमुख माफिया दिलीप मिश्र की भी कई बिल्डिंग पर जेसीबी चलाई गई। कुछ जगह हुए विरोध के बावजूद पीडीए अफसरों को पुलिस की मदद से कार्रवाई में सफलता मिली।

अचानक पीछे खींचना पड़ा कदम

इन माफियाओं की बिल्डिंग तोड़ने में मिली सफलता से पीडीए अफसर कांफिडेंस में आ गए। उन्होंने भदोही के विधायक और माफिया विजय मिश्र की अल्लापुर स्थित बिल्डिंग तोड़ने का प्लान बनाया। इस बात की खबर मिलने पर इंद्रकली की तरफ से अदालत में कार्रवाई के खिलाफ अपील की गई। कोर्ट से बगैर आदेश आए पीडीए अधिकारियों ने मंगलवार को कार्रवाई के उद्देश्य से कमर कस ली। अचानक उन्हें मालूम चला कि बचाव में तथ्य पेश करने के लिए कमिश्नर कोर्ट से अपीलकर्ता के वकील ने एक समय मांगा है, जो मिल गया है। दूसरे दिन बुधवार को कमिश्नर कोर्ट से आदेश आया नहीं और तैयारी पूरी कर ली गई। भारी संख्या में फोर्स और सीओ व पीडीए अफसर जेसीबी के साथ जार्जटाउन थाने पर डेरा डाले रहे। शाम करीब चार बजे ऑर्डर आया तो पीडीए अफसरों को कदम पीछे करना पड़ा। कमिश्नर कोर्ट द्वारा खुद के पाले में फेंकी गई कार्रवाई की गेंद देखकर पीडीए अधिकारी लावलश्कर लेकर चलते बने। लेकिन माफिया विजय मिश्रा की बिल्डिंग जमींदोज करने पहुंचे अफसरों को बैरंग वापस लौटना पड़ा।

कमिश्नर कोर्ट ने आदेश में कहा।

अपील से जुड़े लोग बताते हैं कि कमिश्नर कोर्ट द्वारा जारी आदेश में पीडीए की कार्रवाई को लेकर कई सवाल उठाए गए।

कहा गया कि अपील अपीलकर्ता को निर्गत नोटिस का तामिला अधिनियम की धारा 43 के प्राविधानों के तहत नहीं कराया गया।

न ही इस अधिनियम की धारा 44 में उल्लिखित प्राविधानों का अनुपालन किया गया है।

यह भी उल्लेखनीय है कि प्रश्नगत कार्यवाही दिनांक 12 दिसंबर 2007 के पश्चात 13 वर्ष बाद अमल में लाई जा रही है।

चूंकि अब अपीलकर्ता को प्राधिकरण की समस्त कार्यवाहियों का संज्ञान है, ऐसी स्थिति में उसे जोनल अधिकारी समक्ष सुनवाई का एक अवसर दिया जाना न्याय हित में आवश्यक है।

कमिश्नर कोर्ट ने आदेश में कहा है कि अत: अपीलकर्ता को जोनल अधिकारी प्रयागराज विकास प्राधिकरण के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के लिए अवसर प्रदान किया गया।

निर्देशित किया गया है कि वह दिनांक 2-11-2020 तक पुन: युक्तिसंगत/संशोधित निर्णय पारित करें।

यदि अपीलकर्ता दिनांक 2-11-2020 तक जोनल अधिकारी के समक्ष उपस्थित होकर अपना पक्ष प्रस्तुत नहीं किया जाता तो जोनल अधिकारी द्वारा पारित प्रश्नगत आदेश दिनांक 12 दिसंबर 2007 के अनुसार कार्यवाही हेतु स्वतंत्र होंगे।

कमिश्नर कोर्ट ने अपीलकर्ता को अपना पक्ष जोन अधिकारी के समक्ष रखने का मौका दिया है। इसलिए दिए गए आदेश के अनुरूप कार्रवाई स्थगित की गई।

-सत शुक्ला, जोनल अधिकारी पीडीए

Posted By: Inextlive
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