मरे हुए लोगों के नाम पर हाईकोर्ट में करवा डाला मुकदमा

Updated Date: Wed, 27 Dec 2017 07:00 AM (IST)

न्यायालयों में फर्जी नाम पते पर पार्टी बनवाकर करवाया आदेश

एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट पदाधिकारियों के भूमि घोटाले की जांच में सामने आया चौकाने वाला सच

vikash.gupta@inext.co.in

ALLAHABAD: सैम हिग्गिनबॉटम यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर, टेक्नोलॉजी एंड साइंसेस (पूर्व में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट) के पदाधिकारियों ने अवैध रूप से जमीनों को हड़पने के लिए कानून की ऐसी-तैसी तो की ही, न्यायालय को गुमराह करने से भी नहीं चूके। यह खुलासा एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में लाल ब्रदर्स और उनके परिवारीजनों द्वारा किए गए फर्जीवाड़े की जांच में हुआ है। एसडीएम करछना द्वारा की गई जांच रिपोर्ट से साफ है कि लाल ब्रदर्स ने कोर्ट में भी फर्जी दस्तावेज दाखिल करके एक के बाद मुकदमों को जीता है।

हाईकोर्ट ने करवाया मुकदमा

एसडीएम करछना राजा गणपति आर की भूमि घोटाले संबंधी जांच में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि बीते दिनों तक शुआट्स में कुलपति पद की मलाई खाने वाले प्रो। आरबी लाल ने एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट में सोसाइटी सचिव का पद पाने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में तमाम याचिकाएं दाखिल कीं। ये याचिकाएं फर्जी तरीके से मृत लोगों के नाम, गलत पार्टियों के नाम और गलत पतों के साथ योजित की गई। प्रो। आरबी लाल ने ऐसा अपने वर्चस्व को बनाए रखने और कानून की आड़ में बने रहने के लिए किया। इस पर माननीय उच्च न्यायालय ने जनहित याचिका संख्या 1330 सं। 2017 में आदेश पारित करके मुकदमा भी पंजीकृत करवाया है।

न्यायालय में ऐसे किया गया फर्जीवाड़ा

- सिविल न्यायालय में वाद संख्या 552/1991 में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के सचिव द्वारा गलत नाम, पते और पार्टी बनाकर कई आदेश अपने पक्ष में प्राप्त किए गए।

- सिविल के उक्त मुकदमे में एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट के कर्मचारी/अधिकारी (उप प्रधानाचार्य द्वारा) इसाई समाज का प्रतिनिधि बनकर केस संस्थित किया गया है।

- मुकदमे में खुद को एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट का कर्मचारी/अधिकारी नहीं बताया गया है।

- यही नहीं प्रतिवादी के तौर पर एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट सोसाइटी को और कमीशन ऑफ एकुमेनिक्ल मिशन एंड रिलेशन ऑफ प्रिंस बिटेरियन चर्च ऑफ अमेरिका को बनाया गया है।

- वहीं अमेरिकन कंपनी की ओर से कोई हाजिर ही नहीं हुआ।

- यहीं नहीं दोबारा केस नम्बर 306/1995 एग्रीकल्चर इंस्टीट्यूट द्वारा सिविल कोर्ट में संस्थित किया गया।

- खास यह कि इसमें प्रतिवादी के तौर पर कमीशन ऑफ एकुमेनिक्ल मिशन एंड रिलेशन ऑफ प्रिंस बिटेरियन चर्च ऑफ अमेरिका को बनाया गया।

- इसमें इन्हीं के सोसाइटी के पदाधिकारी विक्टर बक्श द्वारा प्रतिवादी के तौर पर न्यायालय में जवाब प्रस्तुत करके मुकदमें को स्वीकार लिया जाता है।

Posted By: Inextlive
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