कोरोना के डर से हादसों पर लगी लगाम

Updated Date: Sat, 28 Mar 2020 05:45 AM (IST)

-लॉकडाउन के दौरान बरेली में हादसे में नहीं गई किसी की जान

-बीते वर्ष सड़क हादसों में 556 लोगों ने गंवाई थी जान

बरेली। कोरोना वायरस से लोगों की जान न जाए इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन कराया जा रहा है। इससे एक ओर जहां लोग कोरोना के संक्रमण से बच रहे हैं वहीं दूसरी ओर सड़क हादसों में भी कमी आई है। यही वजह है कि पीएम नरेंद्र मोदी के देश में 21 लॉकडाउन घोषित किए जाने के चौथे दिन तक बरेली में सड़क हादसे में किसी की जान नहीं गई, जबकि बरेली में औसतन दो दिन में तीन लोग अपनी जान गवां देते हैं। बरेली पुलिस के आंकड़े यही हकीकत बयां कर रहे हैं।

कोई रोड पर न आने का असर

कोरोना के चलते पीएम नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता कफ्र्यू का ऐलान किया था। इस दिन सड़कों पर इक्का-दुक्का लोग और वाहन नजर आए थे। दूसरे दिन से सीएम योगी आदित्यनाथ ने 23 से 25 मार्च तक जनता कफ्र्यू का ऐलान कर दिया। इसके चलते लोग घरों से बाहर नहीं निकल सके। उसके बाद पीएम ने 21 दिन का लॉकडाउन घोषित कर दिया, जिससे 22 से 27 मार्च तक सिर्फ जरूरी काम से ही लोग पैदल या वाहन लेकर घर से बाहर निकल रहे हैं। ऐसे में सड़कों पर वाहनों की संख्या बहुत कम रही और हादसों पर भी ब्रेक लगा रहा।

20 मार्च तक गईं 64 जान

बरेली पुलिस के रिकॉर्ड के मुताबिक रोजाना सड़क हादसों में लोगों के घायल होने और जान गंवाने की सूचनाएं आती हैं, लेकिन लॉकडाउन के बाद से हादसों पर ब्रेक लग गया। लॉकडाउन से पहले की बात करें तो औसतन रोजाना 2 से 3 हादसे हो रहे थे। इन हादसों में औसतन दो दिन में 3 लोग अपनी जान गंवा देते हैं। वहीं हादसे में रोजाना दो लोग घायल भी होते हैं। लॉकडाउन से पहले इस वर्ष की बात करें तो 20 मार्च तक 80 दिनों में 162 हादसे हुए, जिनमें ही 64 लोगों ने अपनी जान गंवा दी और 109 लोग घायल हो गए।

प्रत्येक वर्ष बढ़ रहे हादसे

बरेली पुलिस के मुताबिक बीते वर्ष 2019 में 1093 एक्सीडेंट हुए, जिसमें 556 लोगों की जान गई और 696 लोग घायल हुए। वहीं पिछले रिकॉर्ड की बात करें तो सड़कों पर बढ़ती लोगों और वाहनों की भीड़ की वजह से हादसे भी लगातार बढ़ रहे हैं। जहां वर्ष 2018 में 484 लोगों की मौत हुई और 907 लोग घायल हुए तो वहीं 2017 में 467 लोगों की जान गई और 914 लोग घायल हुए। इसके अलावा 2016 में 475 लोगों की मौत हुई और 905 लोग घायल हुए। इससे पहले 2015 में सिर्फ 310 लोगों की जान गई और 609 लोग घायल हुए।

इन पर सख्ती बेअसर

घर से बाहर न निकलने से यह तो साफ है कि लोगों की जान कोरोना से भी बच रही है और सड़क हादसों से भी, लेकिन कुछ लोगों को कोई फर्क नहीं पड़ता है और वह बिना जरूरत के भी सड़कों पर वाहन लेकर निकल जा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान पुलिस की चेकिंग में वाहन चालकों पर कार्रवाई तो यही हकीकत बयां कर रही है। यह लोग खाली सड़क पर फर्राटा भी भर रहे हैं, लेकिन गनीमत है कि सड़क पर कम वाहन होने की वजह से हादसे नहीं हो रहे हैं।

वर्ष 2019 में हादसे

1093.एक्सीडेंट

556.डेथ

696.इंजर्ड

वर्ष 2020 में 20 मार्च तक हादसे

162.एक्सीडेंट

64.डेथ

109.इंजर्ड

Posted By: Inextlive
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