मजनूपुर में दौड़ी स्वास्थ्य विभाग की टीम, हुआ घर-घर सर्वेक्षण

Updated Date: Sat, 07 Nov 2020 10:08 AM (IST)

-12 आशाएं, 4 संगिनी, 12 डोमोस्टिक ब्रीडिंग चेकर्स ने घर-घर जाकर की जांच

-डेंगू के लक्षण मिलने पर लिए 16 ग्रामीणों के लिए सैंपल, सात का होगा एलाइजा टेस्ट

बरेली : सरकारी मुलाजिमों की कार्य शैली के भी क्या कहने जब समस्या सिर पर आ जाती है तो ही इनकी नींद टूटती है। मजनूपुर गांव में डेंगू के केस मिलने के बाद हेल्थ डिपार्टमेंट अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग ने 20 लोगों की टीम को गांव में डोर टू डोर सर्वे करने के लिए लगाया है।

जानलेवा साबित हो सकता है डेंगू

जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह ने बताया कि डेंगू की शुरुआत में सामान्य सा लगने वाला यह बुखार देरी या गलत इलाज से जानलेवा साबित हो सकता है। मच्छरों से बचाव और वक्त पर सही इलाज हो तो हालात कंट्रोल में रहते हैं। उन्होने बताया कि मजनूपुर गांव में लोगों के बीमार होने की सूचना मिल रही थी जिसके आधार पर फ्राईडे को पूरे गांव के करीब 530 घरों का भ्रमण स्वास्थ्य विभाग की टीम ने किया। टीम में 12 आशा कार्यकर्ता, 4 संगिनी और 12 डिस्ट्रिक्ट ब्रीडिंग चेकर्स घरों में जाकर जल निस्तारण की व्यवस्था देखी।

दो और मरीजों में डेंगू की पुष्टि

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ। डीआर सिंह ने बताया कि गांव में दो मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है। वहीं 16 ग्रामीणों में सात लोगों के एनएस-1 कार्ड पॉजीटिव, उनका एलाइजा टेस्ट कराने के लिए सैंपल जांच के लिए निजी मेडिकल कॉलेज भेजे गए हैं। वहीं 25 घरों में डेंगू का लार्वा मिला, जिसको नष्ट कर साफ-सफाई कराई गई है।

कैसे फैलता है डेंगू

डेंगू बुखार से पीडि़त मरीज के खून में डेंगू वायरस बहुत ज्यादा मात्रा में होता है। जब कोई एडीज मच्छर डेंगू के किसी मरीज को काटता है तो वह उस मरीज का खून चूसता है। खून के साथ डेंगू वायरस भी मच्छर के शरीर में चला जाता है। जब डेंगू वायरस वाला वह मच्छर किसी और इंसान को काटता है तो उससे वह वायरस उस इंसान के शरीर में पहुंच जाता है, जिससे वह डेंगू वायरस से पीडि़त हो जाता है। मच्छर के काटे जाने के करीब 3 से चार दिनों के बाद मरीज में डेंगू बुखार के लक्षण दिखने लगते हैं। शरीर में बीमारी पनपने की मियाद 3 से 10 दिनों की भी हो सकती है।

जिले में कैसे हो डेंगू की जांच, एलाइजा मशीन खराब

जिले में डेंगू ने पांव पसारना शुरू कर दिया है। लेकिन हैरत की बात यह है कि शासन की गाइड लाइन के अनुसार मरीज के एलाइजा टेस्ट के बाद ही उसमें डेंगू की पुष्टि होती है। लेकिन जिला अस्पताल में एक माह से एलाइजा टेस्ट करने वाली मशीन खराब पड़ी है। ऐसे में शहर में निजी मेडिकल कॉलेज में ही एलाइजा टेस्ट के लिए सैंपल भेजे जा रहे हैं।

Posted By: Inextlive
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