- स्वास्थ्य विभाग ने तैयार किया ब्लू ¨प्रट, लगातार बढ़ाई जा रही सैंप¨लग

- पिछले दो साल में लगातार कम हो रही मरीजों की संख्या

बरेली : वर्ष 2018, मलेरिया की वजह से जिले का नाम पूरे दुनिया में सुर्खियों में आ गया। रामगंगा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में तेजी से मलेरिया के मरीज निकलने लगे। कइयों की मौत हो गई। स्थानीय प्रशासन के हाथ खड़े करने पर राज्य और केंद्र सरकार ने कमान संभाली। विश्व स्वास्थ्य संगठन की कई टीमें गांवों में जुटी। उसके बाद से स्वास्थ्य विभाग जुट गया। आंकड़े तेजी से नीचे गिरने लगे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का दावा है कि आने वाले दो साल में मलेरिया जिले से खत्म कर दिया जाएगा।

वर्ष 2017 में मिले थे 37 हजार से अधिक मरीज

जिले के इतिहास में वर्ष 2018 में मलेरिया ने जिले को पहली बार सबसे अधिक प्रभावित किया। स्वास्थ्य विभाग ने शुरुआत में जांच कराने में लापरवाही बरती, जिसकी वजह से साल भर में 37 हजार से अधिक मरीज जिले में निकले। मलेरिया के खतरनाक रूप प्लाज्मोडियम फाल्सीपेरम ने जमकर पांव पसारे। इस बीमारी से कई लोगों की मौत हो गई। इस पर पूरी दुनिया के मेडिकल बुलेटिन में जिले का नाम चलने लगा।

पांच ब्लाकों में खराब रही स्थिति

जिले के पांच ब्लाकों में शुरू से ही मलेरिया की स्थिति खतरनाक बनी रही। यह गांव आज भी संवेदनशील की सूची में दर्ज हैं। रामगंगा के किनारे के गांवों में मलेरिया काफी तेजी से फैला था। आंवला, भमोरा, रामनगर, मझगवां, फरीदपुर, मीरगंज आदि में तेजी से मरीज सामने आए थे। महामारी फैलने के बाद केंद्र सरकार की टीम के साथ स्थानीय स्वास्थ्य विभाग ने काम किया। वर्ष 2018 में जांच की संख्या बढ़ाई और मलेरिया से एक भी मौत नहीं होने दी।

इस तरह कम हो रहा मलेरिया

वर्ष - जांच - मरीज - संवेदनशील गांव

2018 - 1.50 लाख - 37425 - 925

2019 - 3 लाख - 46717 - 850

2020 - 3.06 लाख - 11600 - 476

2020 (मई तक) - 34000 - 668 - 95

2021 (मई तक) - 37000 - 117 - 35

जिले में मलेरिया को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग लगातार काम कर रहा है। इसके लिए जांच की संख्या बढ़ाई जा रही है। मरीजों का आंकड़ा भी तेजी से कम हो रहा है। अगले दो साल में जिले से मलेरिया को पूरी तरह खत्म करने की तैयारी है।

डा। सुधीर कुमार गर्ग, सीएमओ

Posted By: Inextlive