शहर के बारात घरों में सुरक्षा के आधे अधूरे इंतजाम हैं। फायर सेफ्टी जैसे जरूरी मानकों की अनदेखी की गई है। फायर डिपार्टमेंट के अनुसार सिर्फ 10 बारातघरों के पास ही मानक के अनुरूप फायर सेफ्टी के इंतजाम हैं।

बरेली (ब्यूरो) । शादियों का सीजन चल रहा है। ज्यादातर लोगों के घरों में जगह कम होती है। शादी जैसे प्रोग्राम के लिए ज्यादा स्पेस की जरूरत होती है। जिसके लिए लोग बारातघरों की बुकिंग करते हैं। अगर आप भी शादी या किसी अन्य आयोजन के लिए बारातघर की बुकिंग कराने जा रहे हैं तो यह खबर आपके काम की है। दरअसल शहर के ज्यादातर बारातघरों में सुरक्षा के मानक ही पूरे नहीं हैं। यहां न तो आग बुझाने के इंतजाम हैं और न ही इमरजेंसी एग्जिट की कोई व्यवस्था है। ऐसे में यदि यहां आग लगने की घटना होती है तो स्थिति काफी विकराल हो सकती है। सुरक्षा के मानकों को लेकर दैनिक जागरण की टीम ने शहर के बारातघरों का रियलिटी चेक किया तो ज्यादातर बारातघरों में मानक दरकिनार मिले। आलम यह है कि जिले भर में सिर्फ पांच परसेंट बारातघर संचालकों के पास ही फायर विभाग की एनओसी है।


साई राम पैलेस
लाल फाटक स्थित साई राम पैलेस में तीन रूम्स और एक छोटा हॉल है। एंट्री गेट से लेकर पूरे कैंपस में आग बुझाने के लिए फायर एक्सटिंग्यूशर कहीं नजर नहीं आए। काफी छोटा होने के बावजूद यहां शादी जैसे आयोजन में 300 लोगों तक की गैदरिंग हो जाती है। बावजूद इसके यहां कोई इमरजेंसी गेट तक नहीं है।

रिद्धी-सिद्धी पैलेस
बदायू रोड स्थित रिद्धि सिद्धि पैलेस बेसमेंट में ही बना दिया गया है। इसके ऊपर कमर्शियल बिल्डिंग है। यहां भी न तो आग बुझाने के इंतजाम नजर आए और न ही इमरजेंसी एग्जिट की कोई व्यवस्था है। बावजूद इसके यहां 400 लोगों के आयोजन के हिसाब से बुकिंग कर ली जाती है।


राघव पैलेस
लाल फाटक स्थित यह पैलेस डबल स्टोरी है। डिनर हॉल के साथ ही किचिन भी अटैच है। शादी जैसे आयोजन के समय यहां खासी भीड़ होती है। बावजूद इसके यहां आग बुझाने के इंतजाम कहीं नजर नहीं आए।


शिव स्वरूप पैलेस
बदायूं रोड स्थित वैंकट हॉल का स्पेस कॉफी बड़ा होने के बाद भी सिंगल गेट है। पैलेस बड़ा होने के बाद भी फायर सेफ्टी को लेकर यहां भी कोई इंतजाम नहीं है। यहां कई हॉल इस तरह से बनाए गए हैं कि दिन में भी रोशनी के लिए बिजली की जरूरत होती है।

हो सकता है बड़ा हादसा
बारातघरों में फायर अलर्ट न होना बहुत बड़ी चूक है। जिसकी वजह से लोगों को बड़ी घटना का शिकार होना पड़ सकता है। इसकी वजह है कि यहां समारोह में शामिल होने वाले सैकड़ों लोगों के डिनर के लिए बड़ी संख्या में गैस सिलिंडर का इस्तेमाल किया जाता है। इसके बावजूद यहां आग बुझाने के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में यदि हादसा होता है तो स्थिति कितनी विकराल हो सकती है इसका अंदाजा लगा पाना मुश्किल है।

किराया बढ़ाया, सुविधा वही
कोरोना काल में आयोजनों पर प्रतिबंध के चलते बारातघर संचालकों को नुकसान उठाना पड़ा। अब पाबंदियां हटने के बाद आयोजन शुरू हुए तो ज्यादातर बारातघर संचालकों ने नुकसान की भरपाई के लिए किराया तो बढ़ा दिया लेकिन सुरक्षा के इंतजाम पूरे नहीं किए। शहर के ज्यादातर बारातघरों का एक दिन का किराया एक लाख रुपए से ज्यादा है।

लिमिट से ज्यादा लोगों की एंट्री
शहर के बारातघरों में किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने वाले लोगों की संख्या को भी अनदेखा किया जाता है। शादी जैसे बड़े आयोजन के समय यहां निर्धारित कैपेसिटी से ज्यादा गैदरिंग होती है। ऐसे में कोई इमरजेंसी होने पर दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।


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200 टोटल मैरिज लॉन हैं शहर में
10 मैरिज लॉन संचालकों के के पास एनओसी


क्या हैं मानक
-बरातघरोंं में फायर एक्सटिंग्यूशर जरूर होना चाहिए
-प्रत्येक फ्लोर पर होज रील होना चाहिए
-30 मीटर लंबी डिलीवरी होज
-ब्रांच पाइप
-मैनुअली ऑपरेटेड फायर अलार्म
-25 हजार लीटर के टेरेस टैंक
-टेेरेस टैंक के पास 900 लीटर प्रति मिनट क्षमता वाले इलेक्ट्रिक पंप
-स्मोक डिटेक्टर

वर्जन
जिन बारतघरों की एनओसी नहीं है, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए अभियान चलाया जाएगा। कई बारातघरों को नोटिस भी भेजा गया है।
चंद्र मोहन शर्मा, सीएफओ

शहर में 200 मैरिज लॉन हैैं। जिनमें मिनिमम मैरिज लॉन पर ही एनओसी है। लेकिन सभी बारातघरों में पूरे इंतजाम हैं। जिससे कोई भी हादसा न हो है। इसका सभी मैैरिज लॉन में ध्यान रखा जाता है।
गोपेश अग्रवाल, अध्यक्ष बैंक्वेट हॉल

Posted By: Inextlive