बरेली: फाइनेंशियल ईयर 2021-22 का आम बजट मंडे को संसद में पेश हुआ तो इसमें से बहुत राहतभरी डोज बाहर नहीं निकली। बजट पेश होने से पहले बरेलियंस इससे बड़ी राहत की खुराक मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे। इसके चलते ही सुबह से ही सभी की निगाहें टीवी पर टिकी हुई थीं। वित्त मंत्री निर्मणा सीतारमण जब हाथ में बजट की मोटी पोटली की जगह लाल कपड़े में लिपटे टेबलेट लेकर संसद में पहुंची तो सभी के लिए यह बिलकुल नया अनुभव रहा। बजट के इस डिजिटलाइज फॉरमेट से लोगों को लगा कि इसमें से जरूर कुछ अनोखा और नयापन बाहर निकलेगा, पर जब टेबलेट खुला तो उसमें से ऐसा कुछ विशेष नहीं निकला। सरकार ने जिस तरह कोरोना वैक्सीनेशन के पहले चरण में फ्रंट लाइन वर्कर्स और सीनियर सिटीजन की इम्युनिटी का खयाल रखा ठीक उसी तरह बजट में भी इन्हीं को बूस्टर डोज मिली। बजट में जहां हेल्थ सेक्टर को बूस्टअप करने के लिए रिकार्ड अमाउंट की व्यवस्था की गई, ठीक उसी तरह टैक्स रिटर्न फाइल करने वाले 75 पार के सीनियर सिटीजंस के लिए भी बड़ी राहत की व्यवस्था की गई है। इस बूस्टर डोज में उन्हें टैक्स रिटर्न फाइल करने के झंझट से निजात दिलाई गई है। इसके अलावा दूसरों की इम्युनिटी को बूस्टअप करने की कोई विशेष व्यवस्था नहींर ही। शहर के नौकरीपेशा, कारोबारी से लेकर गृहणियां तक इस बजट से बहुत खुश नजर नहीं आई।

मोबाइल में महंगाई से मिली कड़वी डोज

मोबाइल का यूज अब इतना कॉमन हो गया है कि यह जरूरत की चीज बन गई है। मंडे को जब बजट पेश हुआ तो इससे मोबाइल यूजर्स के लिए मानो कड़वी डोज बाहर निकली। इस बजट में मोबाइल के साथ ही उसकी एससिरीज पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने की घोषणा हुई। इससे आने वाले समय में मोबाइल और इनके चार्जर के रेट जरूर अप होंगे। इससे मोबाइल के शौकीनों के साथ ही आम मोबाइल यूजर्स की पाकेट की इम्युनिटी जरूर घटेगी। इससे उनका मुंह कड़वा होना लाजमी है। बरेलियंस ने भी इस पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया जाहिर की।

बैंक अकाउंट होल्डर्स को मीठी गोली की खुराक

बैंक बंद होने से अकाउंट होल्डर्स को अपनी ही जमा रकम को पाने के लिए किस तरह परेशान होना पड़ता है, यह बीते साल तब आम बरेलियंस को भी पता चल जब एक प्राइवेट बैंक आर्थिक गड़बडि़यों के चलते डूबने के कगार पर पहुंच गया था। बाद में आरबीआई ने अकाउंट होल्डर्स को राहत दिलाई। बैंक अकाउंट होल्डर्स की ऐसी ही परेशानी और चिंता का इस बजट में सरकार ने ध्यान रखा है। मंडे को पेश हुए आम बजट में सरकार ने बैंक जमा राशी गारंटी की लिमिट को एक लाख से बढ़ाकर पांच लाख कर दिया है। इस राहत को बरेलियंस ने भी अपने लिए मिठी खुराक वाली दवा की तरह बताया।

ये बोले बिजनैसमैन

आम बजट आम लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। बेहतर बजट है इससे विकास होगा और अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के बाद भी कर दरों को यथावत रख गया है। कोई नया भी नहीं लगाया गया। 75 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गो को इनकम टैक्स फाइल करने की जरूरत नहीं है यह बेहतर काम है।

डॉ। विनय खंडेलवाल, कार्यकारी निदेशक केसीएमटी

बजट आम आदमी के लिए अच्छा और विकास परक है। कुछ सेक्टरों को उम्मीद थी जिसकी तरफ सरकार का ध्यान नहीं गया कोरोना काल में स्कूलों की स्थिति अत्यंत दयनीय हो गई उनके लिए कोई पैकेज की व्यवस्था होनी चाहिए थी। अफोर्डबल हाउससिंग के लिए सबसे आवश्यक सामग्री सीमेंट पर 28 परसेंट से 18 परसेंट जीएसटी होनी चाहिए थी।

राजेश जसोरिया महानगर महामंत्री, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल बरेली

सरकार का आम बजट आज पेश हुआ है। इससे किसको क्या लाभ होगा, इसको जानने-समझने में अभी कुछ वक्त लगेगा। इसके बाद भी बजट में जो मुख्य बातें सामने आई हैं, वह जन हित में और देश हित में हैं।

हेमप्रीत सिंह, बिजनैसमैन

ये बोले टीचर्स

बजट में इनकमटैक्स छूट का स्लैब न बढ़ाये जाने पर निराशा हुई, रक्षा बजट में बढ़ोत्तरी उचित है। डिजिटल इंडिया हेतु मोबाइल, लैपटॉप व टेबलेट के दामों में होने वाली बढ़ोत्तरी समझ से परे है। मार्च 20 से बंद पड़े मान्यता प्राप्त स्कूलों के भुखमरी से जूझ रहे स्टाफ के वेतन आदि हेतु अलग से धनराशि आवंटित न करना निंदनीय है।

जगदीश चन्द्र सक्सेना, प्रदेशाध्यक्ष, बेसिक शिक्षा समिति उत्तर प्रदेश

ये बोले प्राइवेट जॉब वाले

बजट में सभी के हितों का ख्याल रखा गया है। हाउस टैक्स के ब्याज में छूट हो या बैंक अकाउंट में जमा रकम की गांरगी को बढ़ाना, यह सब आम लोगों के हितों को ध्यान मे रखकर ही किया गया है।

प्रेमा पानू, प्राइवेट वर्कर

गवर्नमेंट इंप्लॉय

बजट में कोरोना का हवाला देते हुए वित्त मंत्री ने कहा ऐसे कठिन समय में भी है श्रेष्ठ बजट साबित होगा। परंतु इस बजट से नौकरी पेशा लोगों को निराशा हुई। क्योंकि इनकम टैक्स स्लैब में कोई राहत नहीं मिली। इसके साथ ही पेट्रोल डीजल के दाम बढ़ने से जरूरत का सामान महंगा हो जाएगा और ग्रहणी की रसोई की पहुंच से कई वस्तुएं दूर हो जाएंगी। एक बात तो अच्छी हुई कि 75 वर्ष से उम्र में बड़े लोगों को अब आयकर से मुक्त कर दिया गया।

डॉ। चारु मेहरोत्रा, एचओडी इंग्लिश डिपार्टमेंट बरेली कॉलेज

बजट भाषण मे श्रमिक हितों का कोई ध्यान नहीं रखा गया है। आयकर दरों मे कोई बदलाव न होना सरकार के आम आदमी और कर्मचारी बिरोधी रवैया को दर्शाता है। न्यू पेंशन स्कीम को खत्म करने की मांग पर विचार न करने से युवा कर्मचारी आहत एवं आक्रोशित है। जनवरी 20 से बड़ी हुए दर पर महंगाई भत्ता देने की घोषणा न करने से घोर निराशा हुई है।

विवेक मिश्रा, संयुक्त महामंत्री, एनईआर मैंस कांग्रेस, पूर्वोत्तर रेलवे, संयुक्त महासचिव,

आल इंडिया ट्रेन कंट्रोलर्स एशोशिएसन

ये बोले एडवोकेट

पिछली पांच वर्षो में बढ़ी मंहगाई, नोटबंदी और कोरोना-काल के बाद आíथक विकास दर में आई गिरावट के बीच मिडिल क्लास और नौकरीपेशा के लिए निराशाजनक है ये बजट। कस्टम ड्यूटी बढ़ने से ऑटो पा‌र्ट्स, मोबाइल उपकरण और सोलर इंवर्टर मंहगे होंगे, पेट्रोल उत्पादों पर कृषि सेस का सीधा असर अंतत: उपभोक्ताओं की जेब पर ही पड़ेगा। कुल मिलाकर मध्यम वर्ग को मायूस करने वाला कहा जायेगा ये बजट।

मुहम्मद खालिद जीलानी, उपभोक्ता मामलों के वकील एंव आरटीआई एक्टिविस्ट)

ये बोले- डॉक्टर्स

बजट बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि सरकार कोविड महामारी से लड़ते हुए अपनी इतनी बड़ी जनसंख्या के ऊपर हिम्मत से ज्यादा खर्च कर चुकी है व आगे भी वैक्सिनेशन पर खर्च करना है। टैक्स में कोई खास बदलाव नहीं देखने को मिला है, डीजल पेट्रोल पर टैक्स बढ़ा है, जिससे कुछ प्रतिशत लोग थोड़ा निराश होंगे।

डॉ। राजीव गोयल, उपाध्यक्ष, आईएमए

विरोधी पार्टियां

बजट जनता की उम्मीदों के विपरीत एवं जनविरोधी है और जनता के साथ खूबसूरत धोखा है। हालांकि भाजपा से किसी को भी बजट में अच्छा होने की उम्मीद भी नहीं थी। इस बजट में किसान नौजवान, निचले और माध्यम वर्ग को पूरी तरह से नकार दिया है जिससे आम जनमानस हताश व निराश हुआ है। बजट में तो खाने की आवश्यक वस्तुओं को तक को गरीब की थाली से छीनने का प्रयास किया गया है।

चौधरी असलम मियां, सचिव, उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी

कोरोना काल में बेरोजगार हुए लाखों युवाओं के लिए ये बजट धोखा है। रोजगार के लिए सरकार की कोई ठोस नीति नहीं दिखती है। इस स्थिति में विश्वविद्यालयों में पढ़ रहे छात्रों को नौकरियां कहां मिलेंगी जब पहले वाले युबाओ को अभी तक रोज़गार नही मिला है

गजेन्द्र कुर्मी, जिला अध्यक्ष, समाजवादी युवजन सभा बरेली

ये बोले स्टूडेंट

आम बजट पब्लिक की सुविधाओं को देखते हुए अच्छा रहा है, इंफ्रास्ट्रेक्चर और हेल्थ के लिए काफी ध्यान रखा गया है। लग्जरी आइटम के साथ पेट्रोल ओर डीजल पर टैक्स जरूर बढ़ा है। अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के बाद भी कर दरों को यथावत रखना तथा कोई नया कर न लगाना एवं पूंजीगत व्यय में बड़ी बढ़ोत्तरी करना साहसिक कदम है।

एशांशी, स्टूडेंट्स

न किसान की बात, न नौजवान की बात। न रोजगार की बात, न मजदूर की बात। फिर यह बजट है किसके लिए पहली बार देश को कॉरपोरेट के हाथों बेचने वाला बजट पेश किया गया। यह बजट देश की दुर्दशा का बजट है।

अवनेश यादव, समाजवादी छात्र सभा

ये बोले एक्सपर्ट

आम बजट विकास की ओर ले जाने वाला बजट है। अर्थव्यवस्था में आई गिरावट के बाद भी कर दरों को यथावत रखना तथा कोई नया कर न लगाना एवं पूंजीगत व्यय में बड़ी बढ़ोत्तरी करना साहसिक कदम है। कुल व्यय में दस परसेंट की वृद्धि से आर्थिक विकास को गति मिलेगी। 75 वर्ष से ऊपर के बुजुर्गो को आयकर विवरणी दाखिल करने से छूट निश्चत ही स्वागत योग्य है।

राजेन विद्यार्थी, सीए

-आम बजट में आम जनता के लिए ही कुछ नहीं है। बजट में सिर्फ कार्पोरेट को लाभ देने के लिए ही बनाया है। जो कहते हैं वह करते नहीं हैं। तीन प्रदेशों में इलेक्शन है इसी को देखते हुए बजट को बनाया है। भारतीय अर्थव्यवस्था डेमेज करने का काम किया है। आम जनता और गरीबों के लिए बजट में कुछ भी नहीं।

डॉ। मेहंदी हसन, प्रवक्ता इकोनॉमिक्स, इस्लामिया इंटर कॉलेज

Posted By: Inextlive