Bareilly : कुछ ऐसी ही कहानी है पंकज की. वो रात का मुसाफिर है. एक ऐसी मंजिल की ओर चल पड़ा है जहां तक पहुंचने का रास्ता उसे ठीक से मालूम नहीं है. उसे अपनी मंजिल तक पहुंचना है बस यही उसे मालूम है. उसे यह पता है कि मंजिल तक पहुंचने में तमाम उतार-चढ़ाव हैं. संसाधनों की कमी है. पैसों का अभाव है. समाज की बंदिशें हैं. फिर भी मंजिल तक पहुंचने का हौसला डगमगाया नहीं है. स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर उसने पढ़ाई की. बारहवीं के रिजल्ट में उसने 74 परसेंट हासिल किए हैं. रात को चौकीदारी करते हुए उसने अपनी जिंदगी में पहला कदम अपनी मंजिल की ओर बढ़ा लिया है.


अचानक हो गई मुलाकातपंकज बहुत खुश था। अनायास ही मेरी मुलाकात उससे हो जाती है। मंगलवार की रात अनाथालय रोड में एक खबर के सिलसिले में गया था। एक दुकान के बाहर खड़ा था। रात के साढ़े ग्यारह बज चुके थे। सड़क पूरी तरह सुनसान थी। एक पता पूछने के लिए मैंने पंकज को आवाज दी। वह अपने हाथ में एक कागज लिए था। खुशी उसके चेहरे से बयां हो रही थी। पता पूछने के बाद मैंने उसकी खुशी का राज भी पूछ लिया। छुटते ही कहता है। बारहवीं की परीक्षा दी थी। फस्र्ट क्लास आई है।चौंक गया था मैं


एक हाथ में लाठी। दूसरे हाथ में टॉर्च लिए एक बंदा 12वीं क्लास में फस्र्ट डिविजन से पास हुआ है। यह सुनकर मैं चौंक गया। बातों का सिलसिला शुरू हुआ तो खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही थी। पंकज की जिंदगी को करीब से झांकने की मेरी लालसा हिलोरें मार रही थी। पहले तो वह शर्माता रहा, लेकिन धीरे-धीरे जिंदगी की सारी परतों को खोलता गया।रात में पढ़ाई और चौकीदारी

पंकज नवादा का रहने वाला है। वहीं के जीबी पंत उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का वह छात्र है। वहीं नवादा में उसका घर भी है। घर में भाई और बहन भी हैं। घर की माली हालत खराब है। बचपन से ही पढ़ाई में काफी अच्छा है। क्लास टेंथ में भी उसने अच्छे माक्र्स लाए थे। 12वीं में एडमिशन तो ले लिया, लेकिन पढ़ाई के लिए पैसे नहीं थे। मां-पिता का हाथ बंटाने के लिए उसने चौकीदार की नौकरी कर ली। अनाथालय रोड के पास चौकीदारी की उसे जिम्मदारी मिली। स्ट्रीट लाइट के नीचे जिंदगीरात में वह दस बजे तक नवादा से यहां पहुंच जाता है। पिछले डेढ़ साल से वह यहां आता है। पढ़ाई का समय वो यहीं निकाल पाता है। चूंकि यहां घर काफी कम हैं, इसलिए काम भी अधिक नहीं है। वह यहीं स्ट्रीट लाइट के नीचे अपनी पढ़ाई पूरी कर लेता था। जब एग्जाम नजदीक थे तो वह रात भर पढ़ाई करता था। सुबह अपने घर जाता था।लोगों के ताने भी सुने

ऐसा नहीं है कि पंकज को स्ट्रीट लाइट के नीचे पढऩे में परेशानी नहीं हुई। पंकज बताता है। जब वह पढ़ाई करता था कई लोग उसे ताने मारते थे। कई लोग यह कहते थे कि जब पढ़ता है तो चौकीदारी कैसे करता है। वह चुपचाप सबकी बात सुन लेता था। पंकज कहता है वो अपनी दोनों जिम्मेदारी पूरे मन से करता था। कई लोग उसकी इस लगन को सलाम भी करते थे। काफी खुश हैं मां-पितापंकज ने बताया कि उसने एग्रीकल्चर से 12वीं की परीक्षा दी थी। उसे 74 परसेंट माक्र्स आए हैं। जब घरवालों को अपने रिजल्ट की जानकारी दी तो काफी खुश हुए। मां ने काफी दुआएं दी, पापा ने गले लगा लिया। ये सब बताते हुए पंकज की आंखों से आंसू छलक आए। कुछ बनने की है ख्वाहिशपंकज तुम क्या बनना चाहते हो? प्रश्न सुनकर वो उदास हो गया। कहता है डॉक्टर बनने की चाहत थी। अच्छी तरह जानता हूं इसके लिए लाखों रुपए चाहिए। इसलिए हालात से समझौता कर लिया। एग्रीक्लचर से पढ़ाई पूरी की। इसी सब्जेक्ट से बीएससी करूंगा। एमबीबीएस डॉक्टर तो नहीं बन सकता, लेकिन पीएचडी जरूर करूंगा। नाम के आगे डॉक्टर लग जाएगा तो समझ लूंगा मेरा सपना पूरा हो गया। मुझे नहीं पता यहां तक का सफर कैसे पूरा करूंगा, लेकिन विश्वास है कि मंजिल तक जरूर पहुंच जाऊंगा। रात के साढ़े बारह बज चुके थे। खामोशी का लबादा ओढ़े रात और गहरी होती जा रही थी। बातें और भी करना चाहता था, लेकिन पंकज कहता है जाने दीजिए ड्यूटी शुरू हो चुकी है। जागते रहोजागते रहो.कहता हुआ वह अपनी राह पकड़ लेता है।
'तुम्हारे शहर के सारे दिए तो सो गए लेकिनहवा से पूछना दहलीज पर ये कौन जलता हैअगर फुर्सत मिले तो पानी के तहरीरों को पढ़ लेनाहर इक दरिया हजारों साल का अफसाना लिखता है'।Report & Pics Hardeep Singh Tony

Posted By: Inextlive