कानपुर के बर्रा में कोचिंग सेंटर में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया. चौथे फ्लोर पर चल रही कोचिंग से 25 बच्चों को सीढ़ी के सहारे सुरक्षित निकाला गया. बताया गया है कि धुआं भरने की वजह से काफी बच्चे भीतर ही फंस गए थे. यह तो हुई कानपुर के घटनाक्रम की बात. अब बात गोरखपुर के कोचिंग संस्थानों की. यहां भी दड़वों छोटे-छोटे कमरे में कोचिंग चल रहे हैं. संकरी सीढिय़ों से बच्चों का आवागमन होता है. यदि कभी आगजनी हुई तो यह स्टूडेंट्स के लिए भयावह साबित हो सकती है.


गोरखपुर (ब्यूरो).गोरखपुर में 400 से अधिक छोटे-बड़े कोचिंग सेंटर हैं, जिनमे बहुत कम कोचिंग सेंटर्स में आग से निपटने के सारे रूल्स फॉलो किए जाते हैं। एक बार कोचिंग का रजिस्ट्रेशन करा लिया। इसके बाद संचालक अपनी मनमानी करते हैं। किराये के कमरे में चलती है कोचिंगयहां पर कोचिंग खोलते समय कोई मानक नहीं देखा जाता है। जबकि जिस तरह दुकान और मकान का नक्शा पास कराया जाता है। ठीक वही मानक कोचिंग खोलते समय भी पालन करता होता है। यहां पर अधिकतर जगहों पर दुकान को ही लेकर उसमे कोचिंग स्टार्ट कर दी जाती है। इसका सीधा उदाहरण आप जीडीए टॉवर में स्थित कोचिंग को देख सकते हैं। लास्ट फ्लोर पर कोचिंग चल रही है, जिसका रास्ता भी एक ही है। पड़ताल में खुली पोल


दैनिक जागरण आईनेक्स्ट टीम ने गुरुवार को शहर के कई इलाकों में चल रही कोचिंग की पड़ताल की। हरिओम नगर में लाइन से कई कोचिंग चल रही हैं। कोचिंग के अंदर जाने पर कमरा बंद करने पर अगर पंखा और एसी ना चले तो वहां पर सांस भी लेने में दिक्कत हो रही थी। सभी कोचिंग में एक ही रास्ता था। कहीं भी आपात काल द्वार नहीं था। सिविल लाइन एरिया में ऐसे ढेरों कोचिंग हैं, जहां पर दड़वों में बच्चे पढ़ाई कर रहे हैं। इसी तरह शाही बिल्डिंग में भी एक फेमस इंस्टीटयूट है। फस्र्ट फ्लोर पर स्थित कोचिंग में जाने के लिए एक पतली सी सीढ़ी गई है। वहीं, क्लास रूम में भी जाने के लिए संकरा रास्ता है, जिसमें एक साथ एक समय दो लोग नहीं निकल सकते। इसी तरह सिटी मॉल के सामने भी कोचिंग चल रही है। जहां पर छोटे-छोटे कमरे को मॉडिफाई कर उसमे क्षमता से अधिक बच्चों को पढ़ाया जा रहा है। यहां सबसे बुरा हालबक्शीपुर, मोहद्दीपुर, बेतियाहाता, आजाद चौक, गोरखनाथ, सुर्यकुंड, तिवारीपुर, जाफरा बाजार, सूमेर सागर, दुर्गाबाड़ी, बिछिया, असुरन, राप्तीनगर, शाहपुर, बशारतपुर, गीता वाटिका, पादरी बाजार समेत तमाम ऐसे इलाके हैं, जहां पर कोचिंग तो चल रही है। लेकिन पार्किंग तक की व्यवस्था नहीं है। यहां पर गाडिय़ां भी सड़क पर पार्क होती हैं। वहीं आग से निपटने के इंतजाम का तो मिलना भी मुश्किल है। कोचिंग के लिए ये हैं रूल- बेसमेंट में कोचिंग नहीं होनी चाहिए।- तंग गलियों में कोचिंग सेंटर नहीं होना चाहिए।- 40 फीट या उससे अधिक की सड़कों और 300 वर्ग मीटर से अधिक भूमि पर कोचिंग सेंटर खोले जाने चाहिए।

- कोचिंग के प्रत्येक मंजिल पर प्रवेश और निकास के लिए दो-दो सीढिय़ां होनी चाहिए।- कोने के प्लॉट पर कोचिंग नहीं खोल सकते हैं।बहुत से लोग किराये का कमरा लेकर भी कोचिंग खोल लेते हैं। अभी कोचिंग सेंटर के खिलाफ अभियान चलाया गया था। एक बार अभियान चलाकर वार्निंग दी जाएगी।डीके सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी हम लोग अग्निशमन विभाग से एनओसी प्राप्त संचालक की कोचिंग का रजिस्ट्रेशन करते हैं। इसके बाद बीच-बीच में वहां जाकर जांच भी की जाती है। डॉ। अश्विनी मिश्रा, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी

Posted By: Inextlive