कैसे हो रिसर्च प्रोजेक्ट कंप्लीट जब लैब के लिए जगह ही नहीं फिट

Updated Date: Wed, 22 Jan 2020 05:46 AM (IST)

- डीडीयूजीयू के फिजिक्स डिपार्टमेंट में नहीं है प्रोजेक्ट वर्क के लिए लैब

- यूनिवर्सिटी प्रशासन के उदासीन रवैये के कारण फिजिक्स डिपार्टमेंट हो रहा उपेक्षा का शिकार

GORAKHPUR: डीडीयूजीयू का फिजिक्स डिपार्टमेंट उदासीनता का शिकार है। एक तरफ जहां बाकी के डिपार्टमेंट जर्जर हालात सुधारते नजर आ रहे हैं। वहीं इस डिपार्टमेंट की सूरत इतनी बिगड़ी हुई है कि यहां प्रोजेक्ट वर्क के लिए लैब तक नहीं है। आलम ये कि आठ स्टार्ट अप, दो मेजर प्रोजेक्ट समेत दो और प्रोजेक्ट के लिए मिले करोड़ों रुपए के बजट के बाद भी लैब की व्यवस्था नहीं हो सकी। यही नहीं फिजिक्स डिपार्टमेंट का मामला सीएम तक पहुंच चुका है लेकिन उसके बाद भी यूनिवर्सिटी प्रशासन की नींद नहीं खुल रही। इस बदहाली को लेकर मिली कंप्लेंस पर दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने फिजिक्स डिपार्टमेंट की पड़ताल करने की ठानी। जो हालात देखने को मिले वह यूनिवर्सिटी के जिम्मेदारों की पोल खोलने के लिए काफी थे।

पूरी नहीं हुई रिसर्च तो धूमिल होगी छवि

बता दें, डीडीयूजीयू के फिजिक्स डिपार्टमेंट के 13 टीचर्स को डीएसटी इंस्पायर प्रोग्राम और स्टार्टअप ग्रांट के तहत दो करोड़ रुपए आवंटित तो हो गए, लेकिन दिक्कत ये है कि प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए उनके पास लैब ही नहीं है। हर टीचर के लिए एक लैब के हिसाब से यहां कम से कम दस लैब की जरूरत है, लेकिन वर्तमान में एक भी लैब नहीं है। समस्या ये है कि अगर तीन साल में रिसर्च पूरी नहीं हुई तो ग्रांट तो वापस हो ही जाएगी और यूनिवर्सिटी की छवि भी धूमिल होगी। दैनिक जागरण आई नेक्स्ट रिपोर्टर एचओडी प्रो। शांतनु रस्तोगी से मिला तो उन्होंने बताया कि लैब के लिए कई बार पत्र लिखा गया है लेकिन अभी तक कुछ नहीं हो सका। जो लैब बीएससी थर्ड इयर स्टूडेंट्स के लिए डिमांड की गई थी उसका रेनोवेशन तो हो गया है लेकिन कार्यदायी संस्था ने अभी तक हैंड ओवर नहीं किया है। वहीं दूसरी नई बिल्डिंग बनाई गई है जिसमें हॉल, लैब व मीटिंग रूम बनाए जाने की प्लानिंग चल रही है।

खरीद कर रखे गए इंस्ट्रूमेंट्स

जब रिपोर्टर ने दूसरे असिस्टेंट प्रोफेसर से स्टार्टअप ग्रांट समेत मेजर प्रोजेक्ट पर बात की तो पता चला कि यूजीसी के डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी से मिले दो मेजर प्रोजेक्ट ग्रांट मिलने के बावजूद लैब के अभाव में शुरू नहीं हो सके हैं। उसके इंस्ट्रूमेंट भी आकर रखे हुए हैं, लेकिन एक साल से ऊपर हो गया प्रोजेक्ट नहीं शुरू हो सका। जबकि नैक मूल्यांकन में इसका विशेष महत्व है। यूनिवर्सिटी में फिजिक्स डिपार्टमेंट को छोड़ दिया जाए तो केमेस्ट्री, बॉटनी और जूलॉजी डिपार्टमेंट में अलग से रिसर्च के लिए बिल्िडग पहले से बनी हुई है। फिजिक्स डिपार्टमेंट में टीचर्स की रिसर्च के लिए कोई लैब नहीं है। वहीं, फिजिक्स डिपार्टमेंट में लैब बनाए जाने को लेकर जब यूनिवर्सिटी के वीसी से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की गई तो कॉल रिसीव नहीं हुई।

इन्हें मिला है प्रोजेक्ट

- फिजिक्स डिपार्टमेंट के एचओडी प्रो। शांतनु रस्तोगी को इसरो की तरफ से उनके प्रोजेक्ट मंगलयान के लिए 21 लाख, आरफी प्रोजेक्ट के लिए 50 लाख मिले हैं।

- इसके अलावा असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ। विनीत कुमार सिंह, डॉ। उदयभान सिंह, डॉ.अम्बरीश श्रीवास्तव, डॉ। प्रशांत शाही, डॉ। राजन वालिया, डॉ। मणींद्र कुमार, डॉ। कृपामणि मिश्रा, डॉ। दीपेंद्र शर्मा, डॉ। मनोज द्विवेदी और डॉ। दीप शेखर सैनी को 10-10 लाख के स्टार्टअप ग्रांट मिले हैं।

- डीएसटी (डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी) की तरफ से डॉ। निखिल कुमार को 35 व डॉ। प्रशांत शाही को उनके प्रोजेक्ट के लिए 32 लाख रुपए मिले हैं।

फैक्ट फिगर

स्टार्टअप - 8

मेजर प्रोजेक्ट - 2

पुराने प्रोजेक्ट - 2

टीचर - प्रोजेक्ट का नाम

डॉ। निखिल कुमार - नैनो स्कि्वड्स मैग्नोमेट्री के बायोमेडिकल अनुप्रयोग - 35 लाख ग्रांट

डॉ। प्रशांत शाही - नए थर्मोइलेक्ट्रिक मैटेरियल पर आधारित है - 33 लाख ग्रांट

डॉ। उदयभान सिंह - अति संवेदनशील सतह संवर्धित रम प्रक्रीर्णन के लिए आयन पुंजों द्वारा नैनो कण, नैनो फिल्म अंतर प्रणाली का निर्माण करेंगे - 10 लाख ग्रांट

डॉ। अंबरीश कुमार श्रीवास्तव - सुपर-एटम की खोज करना एवं उसकी मदद से विभिन्न अनुप्रोयोगों के लिए नए पदार्थो को डिजाइन करने की कोशिश होगी - 10 लाख ग्रांट

वर्जन

फिजिक्स डिपार्टमेंट में लैब बनाए जाने की कवायद की जाएगी। वीसी से इस संदर्भ में बात की जाएगी ताकि जो ग्रांट आया है, उससे प्रोजेक्ट वर्क शुरू हो सके।

डॉ। ओम प्रकाश, रजिस्ट्रार, डीडीयूजीयू

Posted By: Inextlive
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