'धरती के भगवान' ने नहीं सुनी कराह

Updated Date: Wed, 08 Jun 2016 07:41 AM (IST)

-जिला अस्पताल इमरजेंसी से बिना इलाज लौटाई गई महिला

-एक विभाग से दूसरे विभाग का लगवाते रहे चक्कर

GORAKHPUR: प्रदेश सरकार भले सभी मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने का दावा करती है, पर सच्चाई यह है कि उनके मातहत अपनी जिम्मेदारियों से मुंह फेर रहे हैं। इसकी एक बानगी मंगलवार सुबह से लेकर दोपहर तक देखने को मिली। एक बीमार महिला ओपीडी-इमरजेंसी-संक्रमण का चक्कर काटती रही। अंत में थक-हारकर संक्रमण अस्पताल के गेट पर बैठ गई। मजबूरन उसे प्राइवेट हॉस्पिटल में इलाज करवाना पड़ा।

पर्चे पर नहीं हुआ इलाज

सिद्धार्थनगर जिले के बांसी की रहने वाली सुनीता (30) पति शिवकुमार के पेट में दर्द था। सुनीता को लेकर पति और सास मंगलवार की सुबह 10 बजे के आसपास जिला अस्पताल पहुंचे। उसे बताया गया कि ओपीडी में जाकर दिखाएं। वह ओपीडी में पहु़ंची और एक रुपए की पर्ची संख्या 56516 लिया। पर्चे पर कक्ष संख्या 28 और 5 दर्ज था।

लगाती रही चक्कर

महिला ओपीडी में गई तो मौजूद डॉक्टरों ने उसे इमरजेंसी में जाने की सलाह दी उधर पेट दर्द से सुनीता बार बार मूर्छित हो रही थी। किसी तरह सुनीता को उसके परिजन इमरजेंसी ले गए। वहां उसे एक इंजेक्शन दिया गया। इमरजेंसी में मौजूद डॉक्टर और सहयोगियों ने महिला और उसके पति को सलाह दी कि उसकी बीमारी संक्रमण की है। वह संक्रमण रोग विभाग में जाए। इमरजेंसी से संक्रमण रोग विभाग तीन बार महिला गंभीर हालत में अपने परिजनों के साथ दौड़ती रही। अंत में थकहारकर वह संक्रमण रोग विभाग के गेट पर बैठ गई और हांफने लगी। इस संबंध में एसआईसी डॉ एचआर यादव को अवगत कराया गया तो उन्होंने कहा कि यह उनकी जिम्मेदारी नहीं है। आखिर में पीडि़त मरीज बिना इलाज के ही चली गई।

वर्जन

पीडि़त महिला को इमरजेंसी से भेजा गया था। उसे उल्टी और पेट दर्द की शिकायत थी। एडमिट कराने के बजाय उसे संक्रमण अस्पताल भेज दिया गया। मरीज को जिला अस्पताल जाने की सलाह दी गई है।

-डॉ। सतीश कुमार सिंह, मुख्य नगर स्वास्थ्य अधिकारी, नगर निगम

Posted By: Inextlive
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