पति बेकसूर थे, फिर भी भेज दिया जेल

Updated Date: Wed, 07 Oct 2020 06:48 AM (IST)

पति की बेगुनाही साबित करने खुद जुटाए सबूत, विवेचक ने किया इनकार

रेप के फर्जी मुकदमे दर्ज कराने वाले रैकेट पर भी कसेगा पुलिस का शिकंजा

जिले के भीतर किसी के खिलाफ फर्जी से तरीके रेप के मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के संकेत मिले हैं। रंजिश के कारण किसी को रेप जैसे गंभीर आरोपों में फंसाकर समझौते के लिए मजबूर करने वाले रैकेट पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू हो गई है। उन पुलिस कर्मचारियों पर भी एक्शन लिया जा सकता है जिनकी मिलीभगत से ऐसे मामले सामने आ रहे हैं। चिलुआताल एरिया में पुलिस को फर्जी साक्ष्य देकर रेप और अनुसूचित जाति के उत्पीड़न का मामला दर्ज करा दिया था। उसके बयान के आधार पर तत्कालीन सीओ कैंपियरगंज दिनेश सिंह ने एक आरोपित को अरेस्ट कर कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी। पति को बेगुनाह बताते हुए महिला सबूतों के साथ सीओ सहित अन्य अधिकारियों का चक्कर लगाती रही। लेकिन किसी ने उसकी बात नहीं सुनी।

एडीजी दावा शेरपा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी नार्थ से जांच कराई। जांच में महिला का फर्जीवाड़ा सामने आया। दूसरे धर्म की महिला को अनुसूचित जाति का बताकर केस दर्ज कराया गया। लेकिन साक्ष्यों की पड़ताल किए बिना सीओ ने चार्जशीट दाखिल कर दी। शहर का यह पहला मामला नहीं, जिसमें किसी को रेप जैसे गंभीर मामले में फंसाया गया। बल्कि इसके पूर्व भी कुछ लोग पेशबंदी में रेप के हथियार का इस्तेमाल कर चुके हैं। ऐसे मामलों की छानबीन भी चल रही है। एडीजी ने कहा कि पूर्व में इस तरह के मामले सामने आ चुके हैं। इसलिए ऐसे प्रकरणों में गहराई से जांच कराने के संबंध में निर्देश दिया गया है। उन विवेचकों के खिलाफ भी कार्रवाई होगी जो ऐसे मामलों में लापरवाही बरतते हैं।

पति को बताती रही बेकसूर

कैंपियरगंज एरिया का निवासी बताने वाली एक महिला ने एक साल पूर्व बरगदवां निवासी अनिल पांडेय और सुनील पांडेय के खिलाफ रेप, मारपीट अनुसूचित जाति के उत्पीड़न का मामला दर्ज कराया था। मामले की विवेचना कर रहे तत्कालीन सीओ दिनेश सिंह ने आरोपित सुनील पांडेय को अरेस्ट कर लिया। महिला के बयान के आधार पर कोर्ट में चार्जशीट फाइल कर दी। मुकदमा दर्ज होने पर सुनील की पत्नी ने अधिवक्ता वीरेंद्र धर दुबे के जरिए पुलिस अधिकारियों को पत्र देकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने पहले सीओ को पत्र दिया। इसके बाद अन्य पुलिस अधिकारियों से मुलाकात की। पति को फर्जी रेप के केस में फंसाए जाने की बात कही। यह भी बताया कि उनके पति सुनील पांडेय से हुए विवाद में आंख फोड़ दी गई। इसका मुकदमा कोर्ट में चल रहा है। उसी मुकदमे में समझौते का दबाव आरोपित बनाने लगे। जब बात नहीं बनी तो आरोपियों ने उनके पति के खिलाफ एक महिला को हॉयर कर फर्जी रेप का आरोप लगा दिया। लेकिन सुनील की पत्नी और उनके अधिवक्ता की बातों को सीओ ने नजरअंदाज कर दिया।

थकहार कर खुद खोज निकाले सबूत

जांच में जुटे सीओ ने महिला के पति को जेल भेज दिया। पुलिस अधिकारियों ने यह कहकर लौटा दिया कि अपना पक्ष कोर्ट में रखिएगा। पुलिस ने कोई मदद नहीं की तो महिला और उनके अधिवक्ता ने खुद आरोप लगाने वाली पीडि़ता की तलाश शुरू कर दी। इस दौरान पता लगा कि मुकदमा दर्ज कराने वाली महिला अनुसूचित जाति की नहीं है। दूसरे धर्म की महिला ने विवेचक को अपनी उम्र 35 साल बताई थी। लेकिन वास्तविक एज 55 साल है। वह संतकबीर नगर जिले में रहती है। यह तथ्य सामने आने पर सुनील की पत्नी ने एडीजी को पत्र दिया। सारा मामला सामने आने पर एडीजी ने मामले की जांच का निर्देश एसपी नार्थ अरविंद पांडेय कोच्दिया। तब सच्चाई सामने आई। इसलिए सीओ कैंपियरगंज के खिलाफ कार्रवाई की संस्तुति कर दी गई। एसपी नार्थ की जांच रिपोर्ट के आधार पर मामले की दोबारा विवेचना का निर्देश एडीजी ने दिया।

यह तर्क रख रही थी सुनील की पत्नी

-उनके पति के साथ विवाद पर समझौते के लिए रेप का फर्जी का मुकदमा दर्ज कराया था।

-आरोप लगाने वाली महिला ने बताया था कि वह बरगदवां में आकर बर्तन मांजकर अपने परिवार का भरण पोषण करती है।

-बरगदवां से तीस किमी दूर से रोजाना आना- जाना संभव नहीं है।

-खुद को पीड़ित बताने वाली महिला ने अपने को अनुसूचित जाति का बताया। लेकिन वह दूसरे धर्म की महिला है।

-उसने अपनी उम्र 35 साल बताई। लेकिन उसकी उम्र 55 साल के आसपास है।

-सुनील की पत्‍‌नी के सभी सबूतों को खारिज करते हुए विवेचक सीओ ने मुकदमे में चार्जशीट लगा दी।

समझौते के लिए रेप को बनाते हथियार

शहर के भीतर पूर्व में भी ऐसे मामले सामने आ चुके हैं, जिनमें किसी अन्य मुकदमे में समझौते के लिए दबंगों ने रेप का हथियार चलाया है। भूमि विवाद, घपला और घोटालों की जांच करने सहित अन्य शिकायतों में पेशबंदी करते हुए दबंग किसी न किसी परिचित महिला को सहारा बनाकर रेप का आरोप लगवा देते हैं। रेप की बात सामने आने पर शिकायकर्ता डर कर अपनी शिकायतें वापस ले लेते हैं। यदि उन्होंने समझौता नहीं किया तो उनके खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी रहती है। शाहपुर के आवास विकास कॉलोनी में एक मामले की शिकायत करने वाले सगे भाइयों के खिलाफ रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले की छानबीन में सामने आया जिस दिन की घटना बताई गई। उस दिन आरोपित शहर से बाहर थे। इसके पूर्व सहजनवां ट्रिपल मर्डर कांड में समझौते की कोशिश में एक युवती के जरिए कुछ लोगों के खिलाफ फर्जी केस कराया गया। लेकिन जांच में इस मामले की सच्चाई सामने आ गई। कूड़ाघाट आवास विकास कालोनी में रहने वाले एक रिटायर कर्मचारी के बेटे के खिलाफ भी रेप का मुकदमा दर्ज कराया गया। उन्होंने जब इस बात की शिकायत की तो विवेचक ने जांच नहीं की। हाईकोर्ट ने इस मामले को संज्ञान लिया था।

इस मामले की जांच एसपी नार्थ ने की है। इसलिए पुनर्विवेचना की जाएगी। एसपी नार्थ की जांच में सामने आए नए तथ्यों को विवेचना में शामिल किया जाएगा। पेशबंदी या समझौते का दबाव बनाने के लिए रेप के मुकदमे दर्ज कराने वालों के खिलाफ भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। पूर्व में इस तरह की शिकायतें मिली हैं, जिनमें फर्जी तरीके से लोगों को फंसाया गया। इसलिए ऐसे सभी प्रकरणों की जांच पुलिस बारीकी से करे। यदि किसी पुलिस कर्मचारी भी भूमिका मिले तो उसके खिलाफ एक्शन लिया जाएगा।

दावा शेरपा, एडीजी जोन

Posted By: Inextlive
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