कानून की लेते मदद तो नहीं जाना पड़ता जेल

Updated Date: Wed, 02 Dec 2020 09:02 AM (IST)

- बच्चा एडॉप्ट करने की प्रक्रिया अपनाकर रोक सकते हैं क्राइम

- कानून की मदद लेने पर नहीं होगी कोई प्रॉब्लम, भर जाएगी गोद

GORAKHPUR: नौसढ़ में 10 हजार रुपए में बच्चे को बेचने वाली मां, खरीदार महिला और बिचौलियां को पुलिस ने मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। अपराध की गंभीरता को देखते हुए तीनों को कोर्ट ने जेल भेजने का आदेश दिया। शहर में दिनभर बच्चा बेचने वाली मां की करतूत चर्चा में रही। मां ने बच्चे को आखिर किन परिस्थितियों में बेच दिया। इस सवाल का जवाब आरोपित मां भी ठीक ढंग से नहीं दे पा रही है। वह बार-बार यही कहती रही कि पति के शराब पीने की आदतों से बच्चों की परवरिश नहीं हो रही पा रही थी, इसलिए उसे देवरिया की महिला के हाथों 10 हजार रुपए में सौदा कर दिया। बच्चे के पिता की तहरीर पर पुलिस ने मां शिमला देवी के खिलाफ 12 साल से छोटे अपने बच्चे को किसी दूसरे के हाथों में असुरक्षित ढंग से देने के आरोप में केस दर्ज किया। जबकि बच्चा ले जाने वाली महिला रंभा और उसके सहयोगी शंभू के खिलाफ नाबालिग के अपहरण और अपहरण की साजिश रचने का केस दर्ज किया था। पुलिस का कहना है कि इस मामले में आगे भी शंभू से पूछताछ की जाएगी। पति को बिना जानकारी दिए बच्चा बेचने के लिए शंभू ने ही शिमला को तैयार किया था। लॉ स्पेशलिस्ट का कहना है कि इस तरह से बच्चे को महिला को सौंपने के बजाय कानूनी प्रक्रिया अपनानी चाहिए थी, इससे वे गुनहगार बनने से बच जाते। जेल जाने की नौबत भी नहीं आती। आरोपित महिला के जेल जाने से उसके दो अन्य बच्चों की देखभाल की भी समस्या खड़ी हो गई है। सीडब्ल्यूसी के आदेश पर दो माह के मासूम को शेल्टर होम में रखा जाएगा।

यह हुआ था मामला

नौसढ़ निवासी जयसिंह सब्जी मंडी में पल्लेदारी करता है। शुक्रवार की वह पत्नी शिमला देवी, बड़े बेटे महंत, बेटी आरती और दो माह के बेटे सुंदरम संग बरामदे में सोया था। शनिवार की सुबह बिस्तर से दो माह के बेटे को गायब देखकर उसने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ नाबालिग के अपहरण का मुकदमा दर्ज करके छानबीन शुरू की। इस दौरान पता लगा कि रात में उसकी पत्नी शिमला गोद में बच्चे को लेकर कहीं गई। फिर कुछ देर बाद वह अकेली घर लौटी। पुलिस ने जब उससे पूछताछ की तो सामने आया कि बरगदवां में एटीएम पर गार्ड की नौकरी करने वाले शंभू की मदद से उसने अपने बच्चे को 10 हजार में बेच दिया है। देवरिया की रहने वाली रंभा देवी बच्चे को पालन-पोषण के बहाने खरीदकर ले गई है। नौसढ़ चौकी इंचार्ज दीपक सिंह की टीम ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सोमवार की शाम बच्चे को बरामद कर लिया। रंभा ने पुलिस को बताया कि उसकी 10 साल की एक बेटी है। बेटा न होने की वजह से वह अनाथालय में जाकर बच्चा गोद लेना चाहती थी, लेकिन उसे कहीं से मदद नहीं मिल पा रही थी। तब उसके पुराने परिचित शंभू ने बच्चा दिलाने की बात कही। तीनों के बीच बातचीत होने पर सौदा तय हो गया।

शंभू से आगे भी पूछताछ करेगी पुलिस

मंगलवार को जेल भेजे जाने पर शिमला देवी ने पुलिस से कहा कि बड़ी गलती हो गई। उसका पति शराब पीकर घर आता है, इसलिए बच्चों की देखभाल में समस्या आ रही थी। इसलिए उसने शंभू की मदद लेकर बच्चे को रंभा के हाथ में सौंप दिया। इस मामले में पुलिस ने मां के खिलाफ अपने बच्चे को किसी असुरक्षित हाथ में देने का केस दर्ज किया है। पुलिस मान रही है कि कोई मां आसानी से अपने बच्चे को बेचने के लिए तैयार नहीं होगी। इसके लिए शंभू ने जरूर ब्रेनवॉश किया होगा। शंभू ने किन परिस्थितयों में ऐसा किया। इसकी जानकारी के लिए पुलिस उसे आगे भी पूछताछ करेगी।

गोद लेने की प्रक्रिया, करना पड़ता है आवेदन

बाल कल्याण समिति के पूर्व सदस्य डॉ। मुमताज खां ने बताया कि किसी भी दंपति को बच्चा गोद लेने के लिए सबसे पहले बाल कल्याण समिति में आवेदन करना होता है। आवेदन के समय राशन कार्ड, प्रधान या पार्षद द्वारा प्रमाणित निवास प्रमाण पत्र, चरित्र प्रमाण पत्र, हैसियत प्रमाण पत्र, उम्र सहित अन्य जानकारी देनी होती है। इसके अलावा एप्लीकेंट को साथ ही बेबसाइट पर भी रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद बाल कल्याण कमेटी द्वारा पूरी जांच की जाती है कि बच्चे को पालने के लिए आवेदन करने वाली दंपति की उम्र कितनी है और उनकी हैसियत क्या है? इसके बाद ही बच्चा गोद दिया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया निशुल्क होती है। बच्चे को गोद लेने के लिए कहीं कोई खर्च नहीं देना होता है। लेकिन इसमें एक प्रॉब्लम आती है कि गोद लिया जाने वाला बच्चा आवेदक की पसंद का मिल सके।

इन धाराओं में एफआईआर

धारा - 317 आईपीसी

शिशु की पिता या माता या संरक्षक व्यक्ति द्वारा 12 साल से कम उम्र के शिशु का आरक्षित डाल दिया जाना और परित्याग कर देना। दोष सिद्ध होने पर सात साल की सजा और जुर्माना का प्राविधान है। यह संज्ञेय अपराध है।

धारा - 363 आईपीसी

कोई व्यक्ति किसी कानूनी अभिभावक की संरक्षता से किसी का अपहरण करता है तो उसे किसी एक अवधि के लिए कारावास की सजा जिसे सात साल के लिए बढ़ाया जा सकता है। साथ वह अर्थदंड के लिए भी उत्तरदायी होगा।

धारा- 120 बी

अपराध की साजिश रचना, विभिन्न अपराधों के साथ सहभागिता, कारावास और अर्थदंड का प्राविधान है।

दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को किया फोन

मंगलवार केा अंक में 10 हजार में बेच दिया अपना दो माह का बेटा न्यूज पढ़ने के बाद कई लोगों ने दैनिक जागरण आई नेक्स्ट को फोन किया। कालर जफर अहमद ने व्हाट्सएप करके अपनी राय दी। कहा कि आर्थिक तंगी के कारण मासूम बच्चे को बेचने की नौबत क्यों आई। इस संबंध में भी छानबीन होनी चाहिए। इसके पीछे कोई रैकेट भी हो सकता है। सरकार की योजनाएं भी लोगों तक पहुंचनी चाहिए जिससे इस तरह की घटनाएं न हों। वैसे यह कत्य ठीक नहीं है।

वर्जन

बच्चा बेचना और खरीदना दोनों गलत है। गरीबी या लालच में आकर मां अपने बच्चे को बेचने के लिए तैयार हो गई होगी। बच्चे के पिता को पूरा हक है कि वह अपने बच्चे का पालन पोषण कर सकें। एक प्रक्रिया के तहत उनको सीडब्ल्यूसी के सामने पेश होकर आवेदन करना होगा। इस दौरान कुछ समय लग सकता है। इसके बाद बच्चा उनको मिल सकता है। मां और पिता बच्चे के बायोलिजकल पैरेंट्स हैं। दत्तक ग्रहण कानून की प्रक्रिया को पूरा करने पर यह समस्या नहीं आती।

- डॉ। मुमताज खान, पूर्व सदस्य सीडब्ल्यूसी- सोशल वर्कर

बच्चे को बेचने की आरोपित मां, खरीदार महिला और बिचौलियां को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट के आदेश पर तीनों को जेल भेज दिया गया है। इस मामले में आगे भी जांच पड़ताल की जा रही है।

- सुनील कुमार राय, एसएचओ, गीडा

Posted By: Inextlive
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