17 साल से पुलिस को चकमा देने वाला बिहार का पूर्व विधायक माफिया राजन तिवारी नेपाल भागते सामने गोरखपुर पुलिस के हत्थे चढ़ गया. नेपाल रक्सौल बॉर्डर पर पुलिस ने गुरुवार को राजन को अरेस्ट किया. राजन तिवारी के अरेस्ट होने के बाद ये सवाल हर किसी को परेशान कर रहा है कि आखिर बदमाश या माफिया नेपाल में ही क्यों शरण लेते हैं. एडीजी जोन अखिल कुमार ने दैनिक जागरण आईनेक्स्ट रिपोर्टर अनुराग पाण्डेय इस बिंदु पर बात की.


गोरखपुर (अनुराग पांडेय).नेपाल में अरेस्ट नहीं कर सकते सवाल : माफिया या अपराधी नेपाल क्यों भागते हैं?जवाब: इंटरनेशनल बॉर्डर को पार करने के बाद इंडिया की पुलिस का पॉवर खत्म हो जाता है। यूपी-बिहार से नजदीक में ऐसा सुरक्षित स्थान है, जहां पर जाने के लिए कोई कागज की भी जरूरत नहीं पड़ती। इसलिए माफिया या अपराधी नेपाल में शरण लेते हैं।सवाल: हमारी पुलिस नेपाल में जाकर फरार बदमाशों को पकड़ सकती है?जवाब: इंडिया की पुलिस वहां जाकर फरार बदमाशों को अरेस्ट नहीं कर सकती है। सवाल: कभी कोई अपराधी को नेपाल से हमारी पुलिस अरेस्ट करके लाई है?जवाब: नहीं सवाल: नेपाल भागने के बाद अपराधियों को पकडऩे में क्या परेशानी आती है?जवाब: हम वहां जाकर उसे अरेस्ट नहीं कर सकते हैं ये सबसे बड़ी परेशानी है। साथ ही इस कारण पीडि़त पक्ष को न्याय मिलने में भी देरी होती है।


सवाल: नेपाल में शरण लिए बदमाशों को कैसे अरेस्ट करते हैं?

जवाब: हम अपने मुखबिरों की मदद से उसकी लोकेशन नेपाल में लेते रहते हैं। जैसे ही वो इंडिया में एंट्री करता है, उसे अरेस्ट कर लिया जाता है। अधिकतर मामलों में बदमाश के पास जब तक पैसे रहते हैं। तब तक तो वो नेपाल रहते हैं। जैसे ही पैसे की कमी होती है तब वो वापस जरूर आते हैं।सवाल: नेपाल से कोई मदद मिलती है?जवाब: बॉर्डर पर दोनों देशों के डीएम और सेना के जवान आए दिन मीटिंग करते हैं, जिसमे दोनों देश अपने यहां के इनामी और फरार बदमाशों की लिस्ट एक दूसरे को सौंपते हैं। इसके बाद दोनों देशों का प्रशासन बदमाशों को पकड़वाने में एक-दूसरे की मदद करता है।सवाल: राजन तिवारी को लेकर पुलिस आगे कोई और भी कारवाई करेगी क्या?जवाब: राजन तिवारी के जो भी केस होंगे, उसमे पैरवी तेज की जाएगी। कहीं और से भी कोई शिकायत इनके खिलाफ मिलती है तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी।सवाल: कैंट थाने में काफी दिनों से एनबीडब्ल्यू दबाने वाले दोषियों की खोज होगी क्या?जवाब: 17 साल से एनबीडब्ल्यू को दबाना सिस्टमेटिक फेलियर भी हो सकता है। इसकी जांच चल रही है। सवाल: ऐसा मामला कैंट थाने के अलावा भी कहीं और आया है क्या?

जवाब: अभी तक ऐसा मामला कहीं नहीं आया है। फिलहाल जोन के 11 जिले की कोर्ट से पता किया जा रहा है कि कितने एनबीडब्ल्यू जारी हुए जो तामिल नहीं हुए। सभी जिले की पुलिस इसका पता कर एक लिस्ट तैयार कर रही है। इसके लिए सभी जिलों में निर्देश जारी कर दिया गया है।राकेश यादव ने काटी नेपाल में फरारीओम प्रकाश पासवान हत्याकांड में शामिल अधिकतर अपराधी मर चुके हैं या कई बदमाश पुलिस मुठभेड़ में ढेर हो गए। इस हत्याकांड में आरोपी बने राकेश यादव जो कि गोरखपुर के टॉप 10 बदमाशों में शामिल है। इन्होंने कई साल तक नेपाल में फरारी काटी थी। हत्या के कई साल बाद राकेश यादव को पुलिस अरेस्ट कर पाई थी।नेपाल भाग गया था पिपराइच का हिस्ट्रीशीटरपिपराइच में एक छात्रा को छेडख़ानी कर उसे मरने के लिए उकसाने वाला हिस्ट्रीशीटर अच्छेलाल नेपाल में फरारी काट रहा था। बताया जा रहा है कि छात्रा की मौत के बाद वो नेपाल भाग गया था, जिसने देवरिया में एक चोरी के मामले में गुरुवार को सरेंडर किया।प्रदेश के 61 माफिया की सूची में राजनकुख्यात राजन की सक्रियता को देख शिकंजा कसते हुए डीजीपी मुख्यालय ने प्रदेश के 61 माफिया की सूची में उसका नाम शामिल किया है।गोरखपुर के टॉप-10 अपराधी
टॉप-10 अपराधियों की सूची में झंगहा निवासी राघवेंद्र यादव, गुलरिहा के राकेश यादव, बेलघाट के शैलेंद्र प्रताप सिंह, बांसगांव निवासी राधे उर्फ राधेश्याम यादव, कैंट निवासी सत्यव्रत राय, खजनी निवासी सुभाष शर्मा, कैंट के अजीत शाही, गीडा के मल्हीपुर निवासी प्रदीप सिंह, शाहपुर के सुधीर सिंह, गोरखनाथ के विनोद उपाध्याय का नाम शामिल किया गया है।

Posted By: Inextlive