- यहां के लोगों के हेल्पफुल नेचर की कायल थी जेनिफर

GORAKHPUR: यूके से आई जेनिफर बॉल गोरखपुर के लोगों की मिलनसारिता और हेल्पिंग नेचर से काफी प्रभावित हुई। उनका कहना था कि ऐसा प्यार सिर्फ इंडिया में ही मिल सकता है। जेनिफर का बचपन यहीं कैंपियरगंज तहसील के नतवर गांव में बीता है। आजादी से उनके दादा विलीयम कैंपियर वहां के स्टेट थे। जेनिफर 13 वर्ष की थी जब उनको अपनी मां सिथिंया और पिता विलीयम मायर्स के साथ ब्रिटेन जाना पड़ा था। 1956 में वो ब्रिटेन गई थीं। तब से कई बार वो अपने पूर्वजों की यादों को ताजा करने गोरखपुर आ चुकी हैं, गोरखपुर यूनिवर्सिटी के पीछे स्थित सिमिट्री में उनके सभी पूर्वजों की कब्रें हैं।

आगरा के लिए हुई रवाना

शनिवार की सुबह वो आगरा के लिए रवाना हो गई। वहां वो रविवार को दिल्ली जाएंगी। उसके बाद वो लंदन के लिए रवाना हो जाएंगी। वो ग्रीस में रहती हैं। उनके तीन बेटे हैं। बड़ा बेटा होटल कारोबार और दोनों छोटे बेटे सर्विस करते हैं। जेनिफर बिल्कुल अलग माहौल और कल्चर से आकर भी यहां काफी सहज भाव से रहती थीं। यहां के ट्रैफिक सिस्टम और पूर्वजों के घर की उपेक्षा से वह काफी दुखी थीं। उनका कहना था कि प्रशासन को इसको हेरिटेज के रूप में डेवलप करना चाहिए।

Posted By: Inextlive