दीन-ए-इस्लाम में औरतों का बुलंद मर्तबा : महजबीन सुल्तानी

Updated Date: Thu, 25 Feb 2021 09:38 AM (IST)

- बज्म-ए-ख्वातीनच् में बच्चियों ने नात, तकरीर व किरात के मुकाबले में जीता इनाम, मिली दुआ

GORAKHPUR: मदरसा कादरिया तजवीदुल कुरआन निस्वां अलहदादपुर में बुधवार को बज्म-ए-ख्वातीन जलसा हुआ। जिसमें जिक्रा फातिमा, इल्मा नूर, आलिया, समीरा बानो, सना बानो, जोया खान, काशिफा अंसारी, नौशीन फातिमा, शीबा परवीन, सीमा बानो, असनिया फातिमा, साहिबा आदि बच्चियों ने नात, तकरीर, किरात, दीनी मालूमात व सवालात जवाबात के मुकाबले के जरिए लोगों का दिल जीत लिया। इनाम के साथ दुआ भी मिली। कई बच्चियों ने बारगाह-ए-रिसालत में नात-ए-नबी का नजराना शानदार अंदाज में पेश किया। संचालन महराजगंज की आलिमा रूकैया फिरदौस ने किया।

जिंदगी जीने की तालीम देता है कुरआन

सदारत करते हुए आलिमा महजबीन सुल्तानी ने कहा कि कुरआन-ए-पाक की तालीम हासिल करना जरूरी है। मुसलमानों को चाहिए कि वह अपने बच्चों को कुरआन-ए-पाक व हदीस-ए-पाक जरूर पढ़ाएं। कुरआन व हदीस पढ़ने और पढ़ाने में बहुत सवाब है। हमें दीन-ए-इस्लाम के रूहानी पैगाम को समझने की पुरजोर कोशिश करनी चाहिए। दीन-ए-इस्लाम हमें पाक साफ,भाईचारा और अमन से जिंदगी जीने की तालीम देता हैं ताकि हम दुनिया में एक इज्जततदार इंसान की हैसियत से जिंदा रहें और हमारी पाक साफ जिंदगी दूसरों के लिए एक मिसाल बने। हम दीन-ए-इस्लाम के उसूलों की पाबन्दी करें। दीन-ए-इस्लाम ने औरतों को काफी बुलंद मर्तबा अता किया है। बच्चियों को जिंदा दफ्न करने की पाश्विक प्रथा का खात्मा कर और बेवा से निकाह कर नबी-ए-पाक हजरत मोहम्मद सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने औरतों को सम्मान के साथ जीने का हक दिलाया साथ ही पिता की जायदाद में हिस्सा भी दिलाने का काम किया।

दुनियावी तालीम भी दिलानी जरूरी

मुख्य वक्ता महराजगंज की आलिमा फरजाना खान ने कहा कि मुसलमानों को दीन-ए-इस्लाम के बताए रास्ते पर चलना चाहिए। बुराई को छोड़ना चाहिए। अच्छाई को अपनाना चाहिए। अपने बच्चों को दीनी तालीम के साथ दुनियावी तालीम जरूर दिलानी चाहिए। दीन-ए-इस्लाम में इल्म की बहुत अहमियत है। विशिष्ट वक्ता मुफ्तिया ताबिंदा खानम अमजदी ने पर्दे की अहमियत बताते हुए कहा कि पर्दा वास्तव में एक सुरक्षा कवच है, जो गैर मर्दो की बुरी नजर से औरतों की हिफाजत करता है। दल में खौफे खुदा पैदा कीजिए। पाबंदी के साथ नमाज पढ़एि। शरीयत पर चलिए। बच्चों को दीनी तालीम जरूर दिलवाईए। आलिमा रुबी परवीन व दरख्शां सिद्दीकी ने तिलावत-ए-कुरआन के बाद नात-ए-पाक पेश की। आखिर में दरूदो सलाम पढ़कर देश की तरक्की एवं खुशहाली के साथ ही पूरी दुनिया में अमन कायम रहने की सामूहिक दुआ मांगी गई। शीरीनी तकसीम की गई। बज्म-ए-ख्वातीन में बड़ी तादाद में औरतों ने शिरकत की।

Posted By: Inextlive
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