आंदोलन से ही भारतीय संस्कृति मध्य युग में हुई सुरक्षित

Updated Date: Tue, 02 Sep 2014 07:01 AM (IST)

आंदोलन से ही भारतीय संस्कृति मध्य युग में हुई सुरक्षित

- एमपीपीजी कालेज, जंगल धूसड़ में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ व्याख्यान माला में लेक्चर हुआ ऑर्गेनाइज

- आज ऑर्गेनाइज होगी क्लोजिंग सेरेमनी

GORAKHPUR : भारत में आधुनिक सामाजिक धार्मिक परिवर्तन की आधारशिला भक्ति के लोकजागरण अभियान ने रखी। आदि शंकराचार्य, गोरक्षनाथ से लेकर सूर, तुलसी, कबीर और जायसी के भक्ति आन्दोलन से ही भारतीय संस्कृति मध्य युग में सुरक्षित हुई और आगे प्रवाहमान हुई। यह कहना गलत न होगा कि भक्तिकाल भारत के सामाजिक इतिहास का मील का पत्थर है। यह बातें वीर बहादुर सिंह पूवरंचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के पूर्व संकायाध्यक्ष एवं फेमस साहित्यकार डॉ। आद्या प्रसाद द्विवेदी ने कही। वह एमपीपीजी कालेज, जंगल धूसड़ गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ व्याख्यान माला के छठवें दिन 'भक्ति काल का लोक जागरण' टॉपिक पर अपना विचार व्यक्त करते हुए कहीं।

सेकेंड सेशन में नेशनल सिक्योरिटी पर हुआ डिस्कशन

लेक्चर सीरीज के सेकेंड सेशन में नेशनल सिक्योरिटी पर डिस्कशन हुआ। इसमें सकलडीहा पी.जी। कालेज, चन्दौली के रक्षा एवं स्त्रातजिक अध्ययन के विभागाध्यक्ष डॉ। विजेन्द्र सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा : वर्तमान चुनौतियां' टॉपिक पर अपनी बातें रखीं। उन्होंने कहा कि भारत की बाह्य एवं आन्तरिक सुरक्षा के समक्ष सेनाओं से अधिक आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा की चुनौती है। भारत की चीन और पाकिस्तान के साथ सैन्य एवं सीमावर्ती सम्बन्ध कटुतापूर्ण हैं। भारत के साथ युद्ध का साहस तो कोई नहीं कर सकता लेकिन भारत की चीन द्वारा की जा रही घेराबन्दी, पाकिस्तान द्वारा सीमा पर छिट-पुट उपद्रव का समाधान भारत का सैन्य दृष्टि से शक्तिशाली होना ही है। इस दक्षिण पूर्व एशिया में शान्ति तभी तक कायम है जब तक शक्ति संतुलन का सिद्धान्त लागू रहेगा। भारत को अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने के साथ-साथ आन्तरिक स्तर पर सुरक्षा के सभी पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने होंगे। प्रोग्राम का संचालन श्री अमित गुप्ता ने और आभार ज्ञापन डॉ। शुभ्रांशु शेखर सिंह ने किया। इस दौरान कॉलेज के टीचर्स और स्टूडेंट्स मौजूद रहे।

Posted By: Inextlive
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