पैगंबर-ए-आजम ने खत्म किया जात-पात व रंग-नस्ल का फर्क

Updated Date: Sun, 25 Oct 2020 06:08 AM (IST)

- महफिल-ए-मिलादुन्नबी में उलेमाओं ने रखी अपनी बातें

- पैगंबर मोहम्मद साहब की बयान की सीरत

महफिल-ए-मिलादुन्नबी में उलेमाओं ने रखी अपनी बातें

- पैगंबर मोहम्मद साहब की बयान की सीरत

GORAKHPUR: GORAKHPUR: जामा मस्जिद दरगाह हजरत मुबारक खां शहीद नार्मल में महफिल-ए-मिलादुन्नबी की महफिल सजी। इस मौके पर कारी अफजल बरकाती ने कहा कि पैगंबर मोहम्मद साहब ने अपने आखिरी हज खुत्बे में फरमाया है कि तुम्हारा अल्लाह एक है। अल्लाह की किताब कुरआन और उसके पैगंबर की सुन्नत को मजबूती से पकड़े रहना। लोगों की जान-माल और इज्जत का ख्याल रखना। न तुम लोगों पर जुल्म करो, न कयामत में तुम्हारे साथ जुल्म किया जाएगा। कोई अमानत रखे तो उसमें खयानत न करना। ब्याज के करीब भी न फटकना। किसी अरबी को किसी अजमी (गैर अरबी) पर कोई बड़ाई नहीं, न किसी अजमी को किसी अरबी पर, न गोरे को काले पर, न काले को गोरे पर। प्रमुखता अगर किसी को है तो सिर्फ ईमान, तकवा व परहेजगारी से है यानी रंग, जाति, नस्ल आदि किसी की श्रेष्ठता का आधार नहीं है। बड़ाई का आधार अगर कोई है तो ईमान और चरित्र। औरतों के मामले में अल्लाह से डरो। तुम्हारा औरतों पर और औरतों का तुम पर अधिकार है। औरतों के मामले में मैं तुम्हें वसीयत करता हूं कि उनके साथ भलाई का रवैया अपनाओ।

यू-ट्यूब पर भी चला दौर

तंजीम कारवाने अहले सुन्नत की ओर से यूट्यूब लाइव के नेटवर्क पर ऑनलाइन महफिल में मौलाना। मो। कैसर रजा अमजदी, मौलाना अबुल कलाम रजवी व मौलाना निजामुद्दीन ने कहा कि अल्लाह ने पैगंबर मोहम्मद साहब को तमाम कायनात से पहले अपने नूर की तजल्ली से पैदा फरमाया। अल्लाह ने तमाम पैगंबर, फरिश्ते, जमीन व आसमान, अर्श व कुर्सी तमाम जहान को पैगंबर-ए-आजम अलैहिस्सलाम के नूर की झलक से पैदा किया। अल्लाह ने अपनी जात के बाद हर खूबी और कमाल का जामे पैगंबर-ए-आजम को बनाया। अल्लाह ने अपने तमाम खजानों की कुंजियां पैगंबर-ए-आजम को अता फरमा दीं। दीन व दुनिया की तमाम नेमतों का देने वाला अल्लाह है और बांटने वाले पैगंबर-ए-आजम हैं।

कानून से इनसानियत की हिफाजत

कुरआन-ए-पाक अल्लाह का कलाम है। यह एक मात्र किताब है जो सारी किताबों की सरताज है। यहां तक कि कयामत तक पैदा होने सारे सवालों का जवाब कुरआन-ए-पाक में है। दीन-ए-इस्लाम ने इस किताब के जरिए जो कानून अता किए हैं उनसे इंसानियत की हिफाजत होती है और आदमियत का वकार बढ़ता है। दीन-ए-इस्लाम पूरी इंसानी बिरादरी की हिफाजत की बात करता है। बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में मौलाना अली अहमद ने कहा कि पैगंबर-ए-आजम अलैहिस्सलाम ने फरमाया कि ऐ लोगों याद रखो, मेरे बाद कोई पैगंबर नहीं और तुम्हारे बाद कोई उम्मत नहीं। इसलिए अपने रब की इबादत करना। प्रतिदिन पांचों वक्त की नमाज पढ़ना। रमजान के रोजे रखना, खुशी-खुशी अपने माल की जकात देना। हज करना और अपने हाकिमों का आज्ञा पालन करना। ऐसा करोगे तो अपने रब की जन्नत में दाखलि होगे। आखिर में सलातो सलाम पढ़कर मुल्क में अमनो अमान व भाईचारे की दुआ मांगी गई।

Posted By: Inextlive
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