जिला अस्पताल में एमआरआई मशीन के लिए अस्पताल प्रशासन शासन को 8 पत्र लिख चुका है लेकिन अभी तक मशीन नहीं मिली है. जबकि एमआरआई भवन बनकर है.


गोरखपुर (ब्यूरो)।एमआरआई जांच के लिए मशीन के नहीं आने से जिला अस्पताल में जांच नहीं हो पा रही, जिससे पेशेंट्स को प्राइवेट एमआरआई सेंटर की ओर रुख करना पड़ रहा है या जिला अस्पताल से बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। जांच के लिए सरकारी रेट 2500 रुपए है। वहीं, प्राइवेट सेंटर पर एमआरआई जांच के लिए 5000-6000 रुपए तक चुकाने पड़ रहे हैं। अस्पताल में मशीन कब आएगी। इसके बारे में जिम्मेदारों को भी नहीं पता है।ढाई साल पहले बना भवन


एमआरआई सेंटर के लिए ढाई साल पहले जिला अस्पताल में भवन तैयार किया गया। यहां आने वाले मरीजों को लगा कि अब उन्हें बीआरडी मेडिकल कॉलेज या फिर बाहर के सेंटर्स पर एमआरआई के लिए दौड़-भाग नहीं करनी होगी, लेकिन समय बीतने के साथ मशीन नहीं आने की वजह से उनका सपना पूरा नहीं हो सका। आलम यह है कि प्राइवेट सेंटर में जांच के लिए आने वाले मरीजों से लूट मची है। उनसे जांच के नाम पर पांच हजार से छह हजार रुपए लिए जाते हैं। केस 1

झंगहा निवासी सुमित्रा देवी के कमर में दर्द था। उन्होंने ओपीडी में डॉक्टर से परामर्श लिया। डॉक्टर ने एमआरआई जांच कराने के लिए लिखा। अस्तपाल में जांच की सुविधा नहीं होने से प्राइवेट सेंटर में जांच करानी पड़ी। केस 2गुलरिहा निवासी जुगुन निषाद के सिर में गंभीर चोट आई। वह पास के स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, यहां से उन्हें जिला अस्पताल के लिए भेज दिया गया। यहां पर एमआरआई जांच की सुविधा नहीं होने की वजह से बीआरडी मेडिकल कॉलेज का रुख करना पड़ा। एमआरआई भवन तैयार है। मशीन के लिए शासन को 8 बार पत्र लिखा जा चुका है। मगर अभी तक मशीन नहीं मिली है। शासन से मंजूरी मिलने के बाद ही रास्ता साफ हो सकेगा। डॉ। अम्बुज श्रीवास्तव, सीएमएस जिला अस्पताल

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