गोरखपुर में पासपोर्ट गैंग!

Updated Date: Sat, 22 Feb 2020 05:45 AM (IST)

-फैमिली संग नेपाल भागा परशुराम छेत्री, शुरू हुई तलाश

-दोबारा हुई जांच तो एक खेल में बड़े नेक्सेस का होगा पर्दाफाश

फैमिली संग नेपाल भागा परशुराम छेत्री, शुरू हुई तलाश

-दोबारा हुई जांच तो एक खेल में बड़े नेक्सेस का होगा पर्दाफाश

GORAKHPUR: GORAKHPUR: शहर के भीतर फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाने का रैकेट काम कर रहा है। मैन्युअल दस्तावेज तैयार कर गैंग के सदस्य किसी का भी पासपोर्ट बनवा देते हैं। नेपाली मूल के नागरिकों का पासपोर्ट बनवाने के मामले में एक-दो नहीं, बल्कि एक बड़े गैंग का हाथ है। गुरुवार को पकड़ा गया नंदानगर निवासी राजेश इस रैकेट की एक कड़ी है। ऐसा हम नहीं कर रहे बल्कि पुलिस की जांच में सामने आया है। करीब क्0 साल से पेडिंग पड़े मामले की फाइलें दोबारा खुलने पर कई पुलिस कर्मचारी भी नपेंगे। सीओ कैंट ने बताया कि पासपोर्ट के खेल में एक-दो व्यक्ति नहीं बल्कि एक बड़ा नेक्सेस काम कर रहा है। कोर्ट में दाखिल एफआर को वापस मंगाकर पुलिस अधिकारी केस रीओपेन करेंगे।

राजेश और परशुराम काम नाम आया सामने

ख्00भ् से लेकर ख्009 के बीच नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट इंडिया में बन गए थे। उसी समय पासपोर्ट बनवाने वाली आशा गुरुंग सिंगापुर से लौटी थी। कुछ दिन पूर्व वह गोरखपुर आई। मुकदमा दर्ज होने से उनका पासपोर्ट सीज कर दिया गया। महिला ने इंस्पेक्टर कैंट रवि राय को बताया कि नंदानगर के राजेश कुमार और परशुराम छेत्री ने नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट बनवाए थे। पुलिस ने राजेश को अरेस्ट कर लिया। करीब क्क् साल बाद आरोपी की गिरफ्तारी से पासपोर्ट का मामला फिर से ओपेन हो गया। इस मामले में ख्009 में भारत नेपाल मैत्री समाज के अध्यक्ष मोहन लाल गुप्ता ने तत्कालीन एसएसपी से शिकायत की थी। तब उन्होंने आशंका जताई कि ह्यूमन ट्रैफिकिंग के लिए फर्जी तरीके से पासपोर्ट बनवाया गया। इस मामले की जांच पांच साल तक चली। ख्0क्भ् में कैंट और शाहपुर थानों में एफआईआर हुई। कैंट की विवेचना में सामने आया कि ख्म् नेपाली नागरिकों के पासपोर्ट बने थे। शाहपुर एरिया के एड्रेस को यूज करके पांच पासपोर्ट बनवाए गए थे।

फ्क् का फर्जी पता, छह लापता

पुलिस ने ख्00भ् से लेकर ख्009 तक के बीच के पासपोर्ट की फाइलें खंगाली। इस दौरान नेपाली मूल के 9क् नागरिकों के पासपोर्ट बने थे। इनमें म्0 का वेरीफिकेशन हो गया। लेकिन फ्क् के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल सकी। इनके नाम, पते के आगे जीआरडी गेट, दुर्गा भवन, चंडी भवन, कूड़ाघाट, यादव निवास लिखा था। इस तरह के कुल भ्फ् आवेदन हुआ जिनमें फ्क् का पासपोर्ट बन सका। बाद में सामने आया कि छह अन्य के पासपोर्ट भी बने थे। लेकिन वह पूरी तरह से लापता हो गए हैं, एफआईआर में उनका नाम दिया गया। लेकिन पुलिस ने माया, संगीता, सूरज, अनिल, सीमा, कल्पना, मेनका, प्रियां, सोनिया सहित अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया।

फर्जी पते पर पोस्टमैन ने रिसीव कराए थ्ो पासपोर्ट

पासपोर्ट प्रकरण की जांच में पुलिस भी सवालों के घेरे में खड़ी है। फेंक आईडी पर बने सभी पासपोर्ट की डिलीवरी पोस्ट आफिस के जरिए की गई थी। शिकायत के दौरान कहा गया था कि पासपोर्ट बनवाने में एलआईयू की रिपोर्ट शामिल की गई। साथ ही थाना पुलिस ने अपनी रिपोर्ट दी। जांच में एलआईयृ और पुलिस को किनारे कर दिया गया। जो पता पासपोर्ट पर दिया गया था। वहीं का वेरीफिकेशन करने पुलिस पहु्रंची तो मकान मालिक ने कह दिया कि यहां पर कोई नहीं रहता है। जो किराए के आवास से भाग गए। उन्हीं को पुलिस ने मुल्जिम बना दिया। तब जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि हर पासपोर्ट में आठ से क्0 हजार रुपए खर्च हुए हैं।

परशुराम की पत्‍‌नी नेपाल से ले आती थी एप्लीकेंट

पासपोर्ट प्रकरण का दूसरा आरोपित परशुराम छेत्री भैरहवा का मूल निवासी है। वह गोरखपुर में कैजुअल कर्मचारी था। कार्रवाई शुरू होने पर वह फरार हो गया। उसकी पत्नी नेपाल की युवतियों को इंडिया लेकर आती थी। लेकिन जांच के दौरान इन बिंदुओं को शामिल नहीं किया गया। जबकि आरोपित राजेश गोरखपुर में मौजूद रहा। लेकिन पुलिस ने उस पर कार्रवाई नहीं की।

फर्जी पासपोर्ट प्रकरण में किसी एक व्यक्ति का हाथ नहीं है। इसमें एक बड़ा गैंग शामिल रहा है। रैकेट के सदस्यों ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे पासपोर्ट बनवाया होगा। यह किसी एक व्यक्ति के बस की बात नहीं है। इस मामले की जांच दोबारा की जाएगी। कोर्ट से एफआर को वापस मंगाकर फिर से जांच पड़ताल की जाएगी।

सुमित शुक्ला, सीओ कैंट

Posted By: Inextlive
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