शिक्षा साध्य नहीं साधन है

Updated Date: Sun, 15 Mar 2015 07:00 AM (IST)

-एमपीपीजी कॉलेज जंगल धूसड़ में समावर्तन समारोह

- चीफ गेस्ट के रूप में मौजूद रहे मिनिस्टर ऑफ स्टेट, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट

- गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने स्टूडेंट्स को दिलाया संकल्प

GORAKHPUR: हम देश की युवा को एक ऐसी शिक्षा दे जो रोजगार के साथ संस्कार भी दे। अब समय आ गया है कि भारत के युवा धर्म और ज्ञान विज्ञान के बल पर भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का यज्ञ प्रारम्भ करें। सेवा, समर्पण, राष्ट्रभक्ति हमारा मंत्र हो। युवाओं को अपने इतिहास, परंपरा एवं निष्ठा, भारतीय संस्कृति पर हो रहे आक्रमण की जानकारी के साथ उन्हें निर्भिक आदर्शवान और संघर्षशील बनाए। देश का दर्शन ही देश की दिशा तय कर सकता है। देश का दर्शन संस्थाओं में पलता बढ़ता है। शिक्षा साध्य नहीं साधन है। साध्य तो जीवन मूल्य है। यह बातें मिनिस्टर ऑफ स्टेट, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट प्रो। राम शंकर कठेरिया ने कहीं। वे एमपीपीजी कॉलेज, जंगल धूसड़ में आयोजित 'समावर्तन संस्कार' समारोह को बतौर चीफ गेस्ट संबोधित कर रहे थे।

खामोशी बड़े क्रांति की आहट

अध्यक्षता करते हुए सदर सांसद गोरक्षपीठाधीश्वर महंत योगी आदित्यनाथ ने कहा कि शिक्षण संस्थानों ने आज सत्य बोलने और सत्य सुनने की क्षमताओं का ह्रास किया है। शिक्षण संस्थाओं से योग्य और संस्थापित युवा पीढ़ी निकलनी चाहिए। देश में वर्तमान समय से जनता की खामोशी किसी बड़े क्रांति की आहट है। इस मौके पर उन्होंने स्टूडेंट्स को दीक्षांत उपदेश के साथ ही शुचिता एवं ईमानदारी से जीवन निर्वाह, पारिवारिक उत्तरदायित्वों की पूर्ति, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद, भारतीय संस्कृति के प्रति निष्ठावान बने रहने व भारतीय जीवन मूल्यों के सम्मान एवं संवर्धन करने का संकल्प दिलाया। यलो ड्रेस पहने स्टूडेंट्स ने बड़े ही शालीनता से संकल्प लिया।

आत्मबोध पैदा करने की है आवश्यकता

इसी क्रम में स्पेशल गेस्ट एक्स हॉयर एजुकेशन मिनिस्टर डॉ। नरेंद्र सिंह गौर ने कहा कि आज भारत के युवाओं में भारतीय संस्कृति और आत्मबोध पैदा करने की आवश्यकता है। जीवन में संस्कार और संस्कृति के बिना ज्ञान अधूरा है। स्पेशल गेस्ट डॉ। विवेक निगम ने कहा कि वैश्वीकरण के वर्तमान युग में भारतीय संस्कृति और संस्कार में दीक्षित युवा ही भारत के समक्ष खड़ी चुनौती का सामना कर सकता है। समारोह में कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ। प्रदीप राव ने कहा कि गोरक्षपीठ ने स्वंतत्रता आंदोलन के दौरान ही महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद की नींव रखकर शैक्षिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उसके निरंतर प्रज्ज्वलित रहने का ही प्रमाण है, आज का समावर्तन समारोह। वहीं इस मौके पर अभिभावक संघ अध्यक्ष डॉ। टीएन मिश्र एवं पुरातन छात्र परिषद के अध्यक्ष राहुल शर्मा उपस्थित रहे।

गोल्ड मेडल पाकर खिल उठे चेहरे

चीफ गेस्ट मिनिस्टर ऑफ स्टेट, ह्यूमन रिसोर्स डेवलपमेंट प्रो। राम शंकर कठेरिया के हाथों गोल्ड मेडल पहनकर स्टूडेंट्स के चेहरे खिल उठे। इनमें तनु कुमारी, नंदिनी गुप्ता, प्रियंका मणि, शबनम बानो, जसवंत कुमार मौर्या, सन्नी कुमार साहनी, मीनाक्षी शर्मा, कमलेश, श्रीभावती, सुस्मिता सिंह, गौतम यादव, शुभम पाण्डेय, श्वेता मौर्या, आदित्य कुमार पाण्डेय, प्रगति मिश्रा, आदर्श सिंह, भीम मौर्या, आंचल कर्ण, अर्चना गुप्ता, शिवा खातुन, प्रियंका चौहान, गीता सिंह, निखिता सिंह, राज किशोर, अनिल कुमार सिंह, चक्रधर चौरसिया शामिल रहे। इसके अलावा सिलाई और कढ़ाई प्रमाण पत्र भी स्टूडेंट्स को दिए गए।

Posted By: Inextlive
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