एक तरफ शहर को स्वच्छता में टॉप-5 में लाने की कवायद चल रही है वहीं दूसरी तरफ नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल एनजीटी की अवहेलना करते हुए गंगा को प्रदूषित भी किया जा रहा है. यह हम नहीं बल्कि सीसामऊ नाले के हालात बता रहे हैं. गंगा दूषित होने के हालत जानने के लिए ट्यूजडे को जब दैनिक जागरण आईनेक्स्ट की टीम पहुुंची तो हालत बद् से बद्तर थे बैराज से लेकर सीसामऊ तक नाले के पानी को रोकने के बावजूद गंदगी गंगा में प्रवाहित हो रही है ऐसे में इसे एनजीटी के आदेश की अवहेलना नहीं तो फिर क्या कहेंगे. अगर ऐसे ही हालत रही तो गंगा कैसे साफ होगीयह एक बड़ा सवाल खड़ा कर देता है.

कानपुर (ब्यूरो) बैराज से जाजमऊ तक गंगा में लगभग 20 से ज्यादा छोटे, बड़े नालों और बस्तियों का गन्दा पानी गिरता है, इनमें कुछ नालों का गंदा पानी गंगा तक तो नहीं पहुुंच पा रहा लेकिन सीसामऊ नाले का पानी गंगा में गिर रहा है। ऐसे में कहा जा सकता है कि कुछ अफसरों की लापरवाही के चलते गंगा मैया दूषित होती जा रही है, गंगा में नाले का पानी रोकने को लेकर कई करोड़ों रुपए भी खर्च किया जा चुका है, लेकिन हालत में पूरी तरह अब भी सुधार नहीं है।


कई जगहों पर बिखरी गंदगी
- पड़ताल में पाया गया कि कानपुर में गंगा किनारे कई घाट बने हंै, जहां गंदगी फैली हुई है। बैराज के बाद बाबाघाट, रानीघाट, भैरोघाट, परमटघाट, हॉस्पिटल रोड, सरसैयाघाट के अलावा सिद्धनाथघाट के किनारे अवैध निर्माण हुए हैं।
- स्थानीय लोगों का कहना है कि गंगा किनारे बने इन घरों का गंदा पानी नालियों से सीधे गंगा में गिर रहा है।
- आसपास प्रदूषित पानी सीधे गंगा नदी में प्रवाहित हो रहा है। जिसकी वजह से कानपुर में गंगा का पानी सबसे ज्यादा प्रदूषित माना जाता है।


36 साल फिर भी गंगा मैली
मंडे को एनजीटी ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि पिछले 36 सालों से कड़ी निगरानी के बावजूद गंगा जी की सफाई चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। अब नदी के सफाई के लिए आवंटित फंड के समुचित व समयबद्ध इस्तेमाल की जवाबदेही तय करने की जरूरत है। साथ ही प्रदूषण कम करने का लक्ष्य हासिल करने के लिए आवंटित फंड और इसके इस्तेमाल की उचित जांच की जरूरत है।

Posted By: Inextlive