kanpur : जिले के भ्रष्ट पुलिस कर्मियों पर शासन की निगाह टेढ़ी हो गई है. विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर अब नौकरी तक जा सकती है. इसके लिए शासन ने हर जिले के सीनियर पुलिस ऑफिसर

- जिले से जिनकी हो रही जांच सभी नई उम्र के सिपाही है

- आरोप सिद्ध होने पर जा सकती है नौकरी, 30 दिन में जांच रिपोर्ट

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KANPUR : जिले के भ्रष्ट पुलिस कर्मियों पर शासन की निगाह टेढ़ी हो गई है। विभागीय जांच में दोषी पाए जाने पर अब नौकरी तक जा सकती है। इसके लिए शासन ने हर जिले के सीनियर पुलिस ऑफिसर्स को निर्देश भेज दिए हैं। जांच ट्रांसपैरेंट हो इसका इंतजाम भी किया गया है। इसके लिए दूसरे जिले के विजलेंस ऑफिसर्स जांच करेंगे।

जिले में 387 केसेस की जांच

जिले के 387 पुलिस कर्मियों के खिलाफ तमाम तरह की जांचे चल रही हैं। जिसमें 133 गैरहाजिर होने की हैं। जबकि 39 जांचे इनडिसिपलिन की हैं। ये सारी जांचे नई उम्र के सिपाहियों की है। 119 जांचें शहर के सीनियर ऑफिसर्स कर रहे हैं। इन जांचों में बैड इंट्री और अर्थदंड की जांचे हैं।

बिकरू कांड में कार्रवाई

देश में चर्चित बिकरू कांड में आधा दर्जन से ज्यादा पुलिस कर्मियों के खिलाफ 14 (1) और 14 (2) की कार्रवाई की गई है। इन पुलिस कर्मियों पर भ्रष्टाचार की शिकायत है। इसके अलावा भी 17 पुलिस कर्मियों पर भ्रष्टाचार की ि1शकायत है।

एक साल तक थानेदारी नहीं

अब तक खाकी की जांच जिले के अधिकारियों के हाथ होती थी। जिसमें कहीं भाई भतीजावाद तो कहीं जातिवाद चल जाता था। कहीं दूर की रिश्तेदारी को कहीं किसी दूसरे जिले में तैनात पुलिस अधिकारी की पैरवी। कुल मिलाकर जांच अक्सर निपटा दी जाती थी। इसके बाद पुलिस कर्मी फिर से उसी जिले के दूसरे थाने में तैनात होकर काम करने लगता था। लेकिन अब ऐसा नहीं हो पाएगा। पॉलिटिकल लीडर की शिकायत हो या अनुशासनहीनता। एक बार ट्रैक से उतरने के बाद एक साल तक थानेदारी नहीं मिल पाएगी।

इनवेस्टिगेशन में बदलाव

जिस जिले में पुलिसकर्मी को सजा दी गई है। उस जिले के पुलिस अधिकारी उसके भ्रष्टाचार की जांच नहीं करेंगे। दूसरे रेंज या जोन के अधिकारी इस जांच को पूरा करेंगे। जांच पूरी होने के बाद विजिलेंस के अधिकारी पूरी जांच से सैटिसफाइड होने के बाद ही जांच रिपोर्ट ओके होगी। साथ ही इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि दागी अधिकारी से जांच न कराई जाए। इस जांच की तीन ब्रार फ्रिस्किंग की जाएगी। पूरी जांच के ऑनलाइन बयान होंगे और पर्चे भी ऑनलाइन ही कटेंगे। आदेश के मुताबिक जो भी जांच अधिकारी और पीडि़त के बीच बातचीत होगी, उसकी पूरी रिकार्डिग शासन में जमा होगी। यानी अब जांच के दौरान किसी भी तरह का भ्रष्टाचार नहीं चल पाएगा। विभागीय सूत्रों की मानें तो जांच पूरी करने और फेवर में करने के लिए जांच अधिकारी पीडि़त पुलिस कर्मी से मनचाहा काम कराते थे।

30 दिन में पूरी करनी होगी जांच

काम नहीं तो दाम नही की तर्ज पर पुलिस कर्मियों को भी जांच के दौरान वेतन न्यूनतम दिया जाएगा। इसके अलावा तीस दिन में अधिकारी को जांच पूरी करनी होगी। अगर जांच का समय बढ़ाया जाता है तो उसकी वजह अधिकारी को बतानी होगी। आरोप सिद्ध होने पर कर्मी की नौकरी भी जा सकती है। जांच के दौरान आरोपी पुलिसकर्मी जिला छोड़कर बाहर नहीं जा सकेगा।

ये हैं विभागीय पनिशमेंट

- पीई (सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के लिए)

- परेड दलेल (सिपाही दीवान के लिए)

- चेतावनी (सब इंस्पेक्टर और इंस्पेक्टर के लिए)

- 1 साल में तीन चेतावनी के बाद बैड इंट्री

- फाइनेंशियल पनिशमेंट (न्यूनतम वेतन)

- भ्रष्टाचार में (14,1 और 14,2 की कार्रवाई )

- सेक्शन 7 में न्यूनतम वेतन से बर्खास्तगी तक

- गैरहाजिर होने पर काम नहीं तो दाम नहीं के मुताबिक काम

- बैड इंट्री

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हाईलाइट्स

- 387 पुलिसकर्मी हैं जिले के, जिनके खिलाफ जांचे चल रही हैं

- 133 गैरहाजिर होने, जबकि 39 जांचे इनडिसिपलिन की हैं

- 119 जांचें शहर के सीनियर ऑफिसर्स कर रहे हैं

भ्रष्टाचार किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शासन से जो भी आदेश जारी किए गए हैं। उसका जांच में पूरा ध्यान रखा जाएगा।

डॉ। प्रीतिंदर सिंह। डीआईजी कानपुर

Posted By: Inextlive