- एल्युमिनाई ने बनाई गाथा एप, हिंदी के साथ बंगाली में मौजूद है साहित्य का कंटेंट

-अमेरिका, इंग्लैंड समेत यूरोपीय देशों के साहित्य प्रेमियों तक पहुंच रही रचनाएं

10 हजार कंटेंट हिंदी साहित्य के अवलेबल हैं आईआईटी के पूर्व छात्र अमित की वेबसाइट और एप में

KANPUR: साहित्य के कंटेंट की आप खोज कर रहे हैं तो आप आईआईटी के एल्युमिनाई के द्वारा बनाई गई एप और वेबसाइट 'गाथा' का यूज कर सकते हैं। आपको बस करना इतना है कि आप वेबसाइट पर जाए या इस एप को डाउनलोड कर लें। इसको बनाने वाले अमित का कहना है कि इसमें साहित्य से जुड़े 10 हजार कंटेंट अवलेबल है। देश के साहित्य को विदेशों में रहने वाले प्रेमियों तक पहुंचाने के लिए इस एप ने एक कदम आगे बढ़कर इसमें बंगाली लेखकों की रचनाएं भी जोड़ दी हैं।

आईआईटी फिजिक्स के पोस्ट ग्रेजुएशन के पूर्व छात्र अमित तिवारी के इस एप पर बंगाली साहित्य के कंटेंट इस वेबसाइट में अपलोड करके इसकी शुरूआत कर दी गई। 'गाथा' के वार्षिक समारोह के अवसर पर वेडनेसडे को हुए ऑनलाइन कार्यक्रम में आईआईटी डायरेक्टर प्रो। अभय करंदीकर ने ¨हदी व क्षेत्रीय भाषा के साहित्य को विदेशी चाहनेवालों तक पहुंचाने के लिए इस तकनीक को बेहतर बताया। इस दौरान प्रख्यात साहित्यकार गीत चतुर्वेदी ने गीत की बातें सत्र में व सुविख्यात अभिनेत्री नयनी दीक्षित ने गीत व कविता सत्र में चर्चा की।

अमीर खुसरो, प्रेमचंद की रचनाएं

दो साल में अमीर खुसरो, प्रेमचंद, मीराबाई, चंद बरदाई व रामधारी सिंह दिनकर जैसे साहित्यकारों व कथाकारों की 10 हजार रचनाओं को उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोगों तक पहुंचाया है। डॉ। अमित तिवारी के साथ इस सफर में अमेरिका में रहने वाली पीपीएन डिग्री कालेज की पूर्व छात्रा पूजा श्रीवास्तव व भावना तिवारी सहयोगी रही हैं। आईआईटी के पूर्व छात्र अमित तिवारी की उनकी ((https//gaathaonair.com) वेबसाइट व ((https//play.google.com/store/apps/details?id=com.gaathaonair.gaathaXhl=en_IN) एप अब बंगाली साहित्य को भी दुनियाभर के चाहने वालों तक पहुंचाएगी।

कवि रबींद्रनाथ टैगोर की रचनाएं

नोबुल पुरस्कार विजेता व विश्वविख्यात कवि रबींद्रनाथ टैगोर व उपन्यासकार शरत चंद्र चटर्जी की रचनाओं के साथ बंगाली साहित्य अपलोड किए जाने की शुरुआत कर दी गई है। आईआईटी में इंक्यूबेट 'गाथा' स्टार्टअप के संस्थापक अमित तिवारी ने बताया कि कई देशों में ¨हदी साहित्यकारों, कथाकारों व कवियों की पुस्तकें मिलना आसान नहीं हैं लेकिन वहां पर इन्हें पढ़ने वालों की संख्या काफी है। इसी बात को ध्यान में रखकर उन्हें वेबसाइट और एप का आईडिया आया। इसकी खासियत यह है कि इनके जरिए साहित्यकारों की रचनाएं सुनी जा सकती हैं वह भी संगीतमय तरीके से।

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दादा दादी की कहानी गाथा की जुबानी

गाथा जहां बड़ों के लिए साहित्य व उपन्यास की सौगात लेकर आया है वहीं इसके च्रिए बच्चे दादा-दादी व नाना-नानी की कहानियां भी सुन रहे हैं। समय के साथ धुंधली हो चुकीं यह कहानियां उन्हें उन्हें नैतिक शिक्षा व संस्कार प्रदान कर रही च्ैं। बच्चों के लिए इसमें सैकड़ों कहानियां अपलोड हैं।

Posted By: Inextlive