फूलबाग से नौ दिन पहले किडनैप हुए दो साल के बच्चे को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद सुकशुल छुड़ा लिया है. एनकाउंटर के दौरान दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी है दोनों को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया. पुलिस के मुताबिक आरोपी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बहन को बेचने लिए बच्चा चुराया था.


कानपुर (ब्यूरो)। फूलबाग से नौ दिन पहले किडनैप हुए दो साल के बच्चे को पुलिस ने एनकाउंटर के बाद सुकशुल छुड़ा लिया है। एनकाउंटर के दौरान दोनों आरोपियों के पैर में गोली लगी है, दोनों को घायल हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने अपने दोस्त के साथ मिलकर बहन को बेचने लिए बच्चा चुराया था। पकड़े न जाए इसलिए बच्चे को गोद लेने का एक फर्जी स्टांप पेपर भी तैयार कर लिया था, लेकिन इससे पहले ही पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। फुटपाथ पर खेल रहा था उन्नाव के सफीपुर निवासी छोटू राजपूत पिछले करीब 20 साल से फूलबाग फलमंडी के पास रहते हैं। परिवार में पत्नी गुड्डा, 12 साल की बेटी वैष्णवी, आठ साल की बेटी पल्लवी, छह साल का बेटा शिब्बू और दो साल का बेटा कार्तिक है। 24 फरवरी की शाम को कार्तिक बड़ी बहन वैष्णवी और भाई शिब्बू के साथ फुटपाथ पर खेल रहा था। शाम करीब 4:40 बजे बाइक सवार दो बदमाश आए, उसने कार्तिक को अपने पास बुलाया। फिर बच्चे को बाइक में बैठाकर भाग निकले. बाइक नंबर को ट्रेस करते हुए डीसीपी क्राइम आशीष श्रीवास्तव और एसीपी कोतवाली अर्चना सिंह ने बताया कि खुलासे के लिए क्राइम ब्रांच और डीसीपी ईस्ट दोनों की टीम से करीब 60 पुलिसकर्मी को इस जांच में लगाया गया था। पुलिस ने घटना स्थल से लेकर बच्चे को बरामदगी तक के लिए करीब 600 सीसीटीवी फुटेज को खंगाला तब जाकर जूही चौराहे पर एक सीसीटीवी फुटेज मिला। जिसमें बच्चे को ले जाते हुए देखा गया था। उसे सीसीटीवी फुटेज से आरोपियों का बाइक नंबर मिला। पुलिस ने बाइक ट्रेस की तो बाइक रामभजन की निकली। रामभजन को ट्रेस करने पर रज्जन का पता चल गया और पुलिस ने अपहरण की गुत्थी सुलझा ली. बच्चे को देखकर फफकर रोई मां पुलिस कर्मियों ने जब कार्तिक को बरामद किया था, उस दौरान वह गुमसुम था। कई बार रोने भी लगा, लेकिन जैसे ही उसने अपनी मां, दादी और बड़ी बहन को देखा तो हंसने लगा। बच्चे को देखकर उसकी दादी और मां भी फफक कर रोने लगीं। उन्होंने पुलिस कर्मियों को धन्यवाद दिया. बहन को बेचने के लिए अपहरण पूछताछ में दोनों किडनैपर्स में से एक ने अपना नाम किदवई नगर निवासी रज्जन और बाबूपुरवा निवासी पंकज बताया। पता चला कि बाबूपुरवा निवासी रज्जन ने अपने दोस्त किदवई नगर निवासी पंकज गुप्ता के साथ किडनैपिंग की घटना को अंजाम दिया। रज्जन की बहन पूनम की शादी 2006 में आजमगढ़ में हुई थी। अब तक पूनम के कोई संतान नहीं है। जिसकी वजह से ससुराल वाले उसे टॉर्चर करते थे। पूनम ने अपने भाई रज्जन से कहा, उसे कोई बच्चा गोद मिल जाए तो वह मुंह मांगा पैसा देगी। रुपयों के लालच में आकर रज्जन ने बच्चे को किडनैप कर लिया। फिर उसे बहन नीतू को दे दिया। घाट के पास मुठभेड़ दो दिन पहले आजमगढ़ से रज्जन की बहन पूनम कानपुर आ गई थी। उसकी तबीयत खराब थी इसलिए वह अस्पताल में भर्ती थी। सैटरडे देर रात आरोपी बच्चे को पूनम के पास छोडक़र भगवत दास घाट की ओर जा रहे थे। चेकिंग अभियान में रात करीब 3 बजे बाइक पर दो बदमाश आते दिखे। बाइक की पहचान होने पर पुलिस ने रोकने की कोशिश की, जिस पर बाइक सवारों ने फायरिंग कर दी। क्रॉस फायरिंग में दोनों बदमाशों के पैर में गोली लग गई। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस दोनों की क्रिमिनल हिस्ट्री खंगाल रही है। बच्चे को किदवई नगर स्थित एक अस्पताल से बरामद किया गया है. फतेहपुर से बच्चा लेने की प्रक्रिया हो रही थी पूरी पुलिस को आरोपियों के पास से एक हलफनामा भी मिला है। जिसका स्टांप फतेहपुर निवासी सीमादेवी के नाम से खरीदा गया था। जिसमें लिखा है कि सीमा देवी अपना बच्चा साढ़े चार लाख में डॉ। आरके सिंह को दे दिया है. Posted By: Inextlive