पब्लिक तो दूर की बात इस शहर में सरकारी आदेश को सरकारी विभाग ही नहीं मानते हैं. इसका खामियाजा पब्लिक को भुगतना पड़ता है. बिना परमीशन रोड नहीं खोदने और उल्लंघन पर मुकदमा दर्ज करने के डीएम के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभागों पर इसका कोई असर नहीं है.

कानपुर(ब्यूरो)। पब्लिक तो दूर की बात इस शहर में सरकारी आदेश को सरकारी विभाग ही नहीं मानते हैं। इसका खामियाजा पब्लिक को भुगतना पड़ता है। बिना परमीशन रोड नहीं खोदने और उल्लंघन पर मुकदमा दर्ज करने के डीएम के स्पष्ट आदेश के बावजूद विभागों पर इसका कोई असर नहीं है। एक तरफ लाखों रुपए खर्च कर रोड्स बनाई जा रही हैं तो वहीं दूसरी तरफ उन्हें मनमाने तरीके से खोदने का सिलसिला जारी है। पब्लिक का पैसा बर्बाद किया जा रहा है। ताजा मामला केडीए के सामने का है जहां केस्को के ठेकेदार ने केबल बिछाने के लिए सडक़ खोद डाली।

मुकदमा दर्ज कराने की शिकायत
केस्को के ठेकेदार ने बिजली की केबल बिछाने के लिए केडीए के गेट से जलकल विभाग के गेट तक तकरीबन सौ मीटर तक सडक़ खोद डाली। नगर निगम के ऑफिसर्स मौके पर पहुुंचे तो पता चला कि जलनिगम को पंपिंग स्टेशन को कनेक्शन देने के लिए सडक़ की खुदाई की जा रही है। ठेकेदार से जब एनओसी और परमीशन मांगी गई तो ठेकेदार दिखाने पर असमर्थ हो गया। वही, नगर निगम चीफ इंजीनियर एसके सिंह ने बताया कि ठेकेदार पर स्वरूप नगर में मुकदमा दर्ज कराने के लिए शिकायत दी गई है।

इस तरह चलता है खेल
सूत्रों के मुताबिक, शहर की सडक़ों की 40 प्रतिशत खुदाई मिलीभगत के जरिए हुआ करती है। इसमें ठेकेदार और संबंधित विभाग के कुछ लोग आपस में तय कर लेते और रातों-रात सडक़ खोद ली जाती है। अगर आला अफसरों के संज्ञान में मामला आया तो फंस गए, वरना पाइपलाइन या केबिल बिछाकर सडक़ यूं ही मिट्टी से भर दी जाती है। इस चक्कर में कई बार पाइपलाइन फट चुकी हैं जिससे पानी की समस्या के साथ रोड धंसने की समस्या भी उठानी पड़ी। हालांकि अब नगर निगम इसकी लगातार निगरानी कर रहा है।

खुदाई से करोड़ों का चूना
पिछले करीब चार सालों में बिना परमीशन सडक़ों की खुदाई की वजह से करोड़ों रुपए की सडक़ें बर्बाद हो चुकी हैं। यह अलग बात है कि इसकी आधी रकम भी क्षतिपूर्ति के रूप में विभागों को नहीं मिली, जो रकम आई उससे कहीं और की रोड बन गई या कहीं और विकास कार्य हो गया, लेकिन अब खस्ताहाल हुई वहीं रोड बनेगी जो खोदी गई है।


परमीशन लेना क्यों जरूरी
किसी भी रोड को काटने से पहले नगर निगम को बताना पड़ेगा कि खुदाई कब से कब तक की अवधि के लिए होगी। कितने क्षेत्रफल की रोड काटी जाएगी और इसकी जरूरत क्यों है। यह सभी डिटेल देने के बाद जरूरी नहीं है कि फौरन अनुमति मिल जाए। क्योंकि इस संबंध में जलकल, जल निगम और केस्को समेत अन्य विभागों से पूछा जाता है कि वहां उनकी कोई भी लाइन पहले से तो नहीं पड़ी है। इसके बाद खुदाई की मैपिंग होती है।

बिना परमीशन कहां कहां काटी गई सडक़
- परेड से मूलगंज जाने वाली &नई सडक़&य को बनते ही खोद डाली गई
- तिलक नगर रोड को बिना परमीशन काट दी गई
- पनकी इंडस्ट्रियल एरिया में बिना परमीशन के रोड को काटा गया
- केडीए गेट से जलनिगम गेट तक बिना परमिशन के रोड काटी गई

Posted By: Inextlive