'विक्की डोनर' की असल ज़िंदगी

Updated Date: Thu, 31 May 2012 12:55 PM (IST)

हम सभी ने कभी न कभी रक्त दान और अंग दान जैसे विषयों पर खुले में चर्चा की होगी लेकिन शुक्राणु दान के बारे में भारतीय समाज में अब तक केवल दबे शब्दों में ही चर्चा होती थी.

इस विषय को लोगों की ज़ुबान तक लाने में मदद की हाल ही में रिलीज़ हुई एक फिल्म विक्की डोनर ने। फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट रही। बस फिर क्या था। इनफर्टिलिटी क्लीनिक यानि कृत्रिम गर्भाधान क्लिनिक पर शुक्राणु दान के लिए फोन कॉल्स का अंबार लगना शुरू हो गया।

फिल्म ने ये विषय तो छेड़ दिया, लेकिन शुक्राणु दान के बारे में जो धारणाएं इस फिल्म ने फैलाई है वो कितनी सच है? दिल्ली आईवीएफ क्लीनिक के अध्यक्ष डॉक्टर अनूप गुप्ता कहते हैं, “विक्की डोनर फिल्म के बाद लोगों ने शुक्राणु दान के बारे में सोचना शुरू किया। लेकिन लोगों के पास सही जानकारी नहीं है। हमारे पास दिन में कम से कम 20 फोन आते हैं शुक्राणु दान के लिए। हम परेशान हो चुके हैं.”

डॉक्टर गुप्ता परेशान इसलिए हैं क्योंकि इस फिल्म ने भले ही शुक्राणु दान के बारे में जागरुकता बढ़ाई हो, लेकिन सच्चाई ये है कि जागरुकता से ज़्यादा इस फिल्म से गलत धारणाएं भी फैली हैं।

फायदेमंद पेशा?

फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे शुक्राणु दान के ज़रिए विक्की नाम का ये नौजवान रातों-रात अमीर बन जाता है और इसे अपना पेशा बना लेता है। लेकिन वास्तविक परिस्थिति जानने के लिए मैंने बात की एक 35 वर्षीय शुक्राणु दाता से जिन्होंने अपना नाम बताने से तो मना कर दिया, लेकिन इतना बताया कि वे एक मकैनिकल इंजीनियर हैं।

बीबीसी से फोन पर बातचीत में उन्होंने बताया, "विक्की डोनर मात्र एक फिल्म है। जो फिल्म में दर्शाया गया है, वास्तविकता में वैसा बिलकुल नहीं है। मैं शुक्राणु दान इसलिए करता हूं क्योंकि मेरा मानना है कि शुक्राणु ज़ाया करने के बजाय अगर उससे किसी का भला हो जाए, तो उसमें कोई बुराई नहीं है। और फिर इसी प्रक्रिया में अगर थोड़ा जेब-खर्च भी निकल जाए तो क्या बुरा है?"

जहां भारत में एक शुक्राणु दान के लिए केवल 200 रुपए दिए जाते हैं, वहीं ब्रिटेन जैसे देशों में शुक्राणु दाता को करीब 60 पाउंड यानि करीब 2,500 रुपए दिए जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि अगर शुक्राणु दान को पैसे से जोड़ कर देखा जाने लगा तो फिर इसे दान नहीं बल्कि एक पेशे की संज्ञा दी जाने लगेगी।

दिल्ली के एक शुक्राणु बैंक क्रायोबैंक के निदेशक डॉक्टर इकबाल मेहदी कहते हैं, “शुक्राणु दान एक अच्छा काम है और इसे पैसे से जोड़ कर नहीं देखा जाना चाहिए। हम यहां शुक्राणु दाताओं को थोड़े बहुत पैसे भी इसलिए देते हैं ताकि उससे उनके आने-जाने का खर्चा निकल सके। शुक्राणु बैंक कोई एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज तो है नहीं। हमारे यहां नौकरियों के अवसर नहीं पैदा किए जाते.”

शुक्राणु एक, बच्चे अनेक?शुक्राणु दान के बारे में दूसरी अवधारणा जो विक्की डोनर फिल्म में बताई गई है, वो ये कि एक दाता के शुक्राणु से सैंकड़ों बच्चे पैदा किए जा सकते हैं। असल में भारतीय चिकित्सकीय अनुसंधान परिषद यानि आईसीएमआर के दिशा-निर्देशों के मुताबिक एक शुक्राणु दाता के शुक्राणु से दस से ज़्यादा बच्चे पैदा नहीं किए जाने चाहिए।

इसके पीछे का आधार ये है कि एक ही शुक्राणु से पैदा होने वाले बच्चे देखने में कुछ हद तक एक समान होते हैं। आईसीएमआर के दिशानिर्देशों में एक पुरुष को केवल अपने जीवन में 76 बार ही शुक्राणु दान करने की इजाज़त दी जाती है।

यही कारण है कि शुक्राणु बैंक में दाता के साथ एक साल का ही कांट्रैक्ट साइन किया जाता है। दिशा-निर्देशों में ये भी लिखा है कि जब कोई क्लिनिक शुक्राणु बैंक से शुक्राणु लेता है और वो शुक्राणु बच्चे पैदा करने में सफल रहता है, तो उसका रिकॉर्ड शुक्राणु बैंक को दिया जाना चाहिए।

कानूनलेकिन भारत में किसी कानून के न होने की वजह से दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन नहीं किया जाता। क्रायोबैंक के डॉक्टर इकबाल मेहदी कहते हैं, “इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि शुक्राणु दाता का एक बैंक के साथ कांट्रेक्ट खत्म होने के बाद वो दूसरे बैंक जाकर दान न करे.”

दिल्ली की नर्चर आईवीएफ क्लीनिक की डॉक्टर अर्चना धवन बजाज कहती हैं,“यही कारण है कि हमें एक कानून की ज़रूरत है। शुक्राणु दाताओं की सूचि रखने के लिए एक केंद्रीय संस्था का गठन होना चाहिए जो एक कानून के तहत काम करे। आखिरकार ये मामला एक नई ज़िंदगी बनाने से जुड़ा होता है.”

दरअसल 2008 में असिस्टिड रिप्रोडक्टिव टेकनॉलाजी यानी कृत्रिम रूप से बच्चे पैदा करने की तकनीक से जुड़ा एक विधेयक संसद में लाया गया था जिसमें इस क्षेत्र को नियंत्रित करने के लिए कुछ कानून सुझाए गए थे। लेकिन अब तक वो कानून संसद में लंबित है।

विक्की डोनर फिल्म ने भले ही इस विषय को एक मज़ाकिया रंग देकर इसके बारे में जागरुकता फैलाने की कोशिश की हो। लेकिन शुक्राणु दान से जुड़ी बारीकियों को देख कर ये ज़रूर कहा जा सकता है कि इसे गंभीरता से लिए जाने के लिए कानून का होना ज़रूरी है।

Posted By: Inextlive
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.