kanpur: दीपावली का त्यौहार नजदीक आ गया है. हर कोई अपने घर दुकान ऑफिस फैक्ट्री सभी जगहों पर भगवान गणेश-लक्ष्मी की स्थापना कर पूजन करने की तैयारी में अभी से जुट गए हैं. दीपावली को कुछ खास बनाने के लिए हर बार की तरह इस बार भी कोई सोने के कोई चांदी के तो कोई तांबे के गणेश-लक्ष्मी को स्थापित करने का मन बना रहा है लेकिन ज्योतिषियों और आचार्यों के मुताबिक दीपावली त्यौहार पर सोना चांदी और तांबे से कई हजार गुना बेहतर मिट्टी के गणेश-लक्ष्मी का पूजन करना होता है. लेकिन मॉर्डनाइजेशन और स्टेटस सिम्बल के चक्कर में लोग चांदी और तांबे के गणेश-लक्ष्मी की प्रतिमा लाकर पूजन करने लगे हैं.


धर्म के मुताबिक नहीं हैं ये!ज्योतिषाचार्य डॉ। आदित्य पांडे बताते हैं कि लक्ष्मी जी हमेशा स्वर्ण धातु पर ही स्थान ग्रहण करती हैं। ऐसे में लक्ष्मी जी की प्रतिमा या आकृति चांदी और तांबे पर बनाया जाना धर्मोचित नहीं है। उनके मुताबिक श्री यंत्र में मां पार्वती जी के दस महाविधाओं में से एक मां त्रिपुर सुंदरी का पूजन किया जाता है। साथ ही भगवान शिव जी का पूजन भी होता है। ऐसे में श्री यंत्र लक्ष्मी जी से संबंधित नहीं होता है। इसके बावजूद पूरी जानकारी न होने के कारण बहुत से लोग गणेश-लक्ष्मी पूजन में श्री यंत्र का पूजन करते हैं। हालांकि श्री यंत्र सुख, वैभव और समृद्धि में वृद्धि करने की शक्ति अवश्य रखता है और इसके पूजन से लाभ भी जरूर मिलता है।पुरातन काल से है महत्च


पूजा-पाठ में मिट्टी का महत्व बहुत ज्यादा माना गया है। इसके पीछे कई आस्थाएं जुड़ी हुई हैं। आस्था के साथ-साथ तथ्यों के आधार पर भी मिट्टी की महत्ता को पुख्ता किया गया है। यही वजह है कि मिट्टी की अहमियत को किसी भी हाल में नजरअंदाज नहीं  किया जा सकता है। आचार्य उमेश दत्त शुक्ला के मुताबिक जल, अग्नि और वायु तीनों ही तत्व मिट्टी में पाए जाते हैं। और पंचतत्व का ये शरीर पंचतत्व में ही विलीन हो जाता है। आध्यात्म दृष्टि से देखा जाए तो मिट्टी में पांचों तत्व और तीन गुण सत, रज और तम प्राप्त होते हैं। इसका दूसरा भाव बृह्मा, विष्णु और महेश से भी लगाया जाता है। पांच तत्व में पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश पाए जाते हैं। समय के साथ बदली मान्यताएंजानकारों के मुताबिक दीपावली पर्व पांच दिनों तक मनाया जाने वाला त्यौहार है। धनतेरस से लेकर दूज तक दीपोत्सव मनाया जाता है। पुरातन काल से धनतेरस के दिन सोने, चांदी और तांबे को खरीदना शुभ माना गया है। इसमें भगवान का सिंहासन, आसन और अन्य बर्तन खरीदे जाते थे। लेकिन धीरे-धीरे व्यवसायिकता हावी होती गई और इन धातुओं से भगवान की प्रतिमाओं का निर्माण होने लगा, जिसको पूजन में रखा जाने लगा। हालांकि आचार्य उमेश दत्त शुक्ला के मुताबिक इन तीनों ही धातुओं की प्रतिमाएं शुभ मानी जाती हैं। लेकिन दीपावली त्यौहार पर गणेश-लक्ष्मी जी के पूजन के लिए मिट्टी की प्रतिमाओं की महत्ता है।----

लक्ष्मी जी स्वर्ण कमल पर विराजमान होती हैं। ऐसे में लक्ष्मी जी की प्रतिमा या आकृति चांदी और तांबे पर बनाया जाना धर्मोचित नहीं है। इसी प्रकार दीपावली पर गणेश-लक्ष्मी पूजन के दौरान श्री यंत्र का पूजन भी उचित नहीं है.

डॉ। आदित्य पांडे, ज्योतिषाचार्यसोने, चांदी और तांबे के आभूषण, सिंहासन, आसन व अन्य वस्तुएं बनवाना शुभ होता है। भगवान की प्रतिमा मिट्टी की बनवाना ही उचित होता है। क्योंकि देश की मिट्टी का अपना महत्व है.आचार्य उमेश दत्त शुक्ला

Posted By: Inextlive