ट्रांसफर के नाम पर महिला पुलिसकर्मियों के शारीरिक शोषण का आरोप

Updated Date: Tue, 08 Sep 2020 12:20 PM (IST)

- सोशल मीडिया पर डीजीपी को भेजे पत्र के वायरल होने से मचा हड़कंप

- रेडियो मुख्यालय में तैनात महिला पुलिसकर्मियों ने की गोपनीय जांच की मांग

- शोषण से तंग तीन महिला कर्मियों द्वारा सुसाइड का किया दावा

LUCKNOW:

पुलिस रेडियो मुख्यालय में तैनात महिला कर्मियों ने ट्रांसफर के नाम पर शारीरिक शोषण करने का आरोप लगाया है। पीडि़त महिला कर्मियों का डीजीपी को भेजा गया पत्र सोशल मीडिया पर वायरल होने से सनसनी फैल गयी। इस पत्र में पीडि़ताओं ने शारीरिक शोषण से तंग आकर तीन महिला कर्मियों के सुसाइड का भी दावा किया है। वायरल हुए इस पत्र के बारे में कोई भी अधिकारी कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। इस पत्र को डीजीपी के अलावा सीएम, एडीजी टेलॉकॉम, एडीजी यूपी 112, अध्यक्ष भारतीय महिला आयोग, अध्यक्ष प्रदेश महिला आयोग और एक्टिविस्ट नूतन ठाकुर को भी भेजा गया है।

रेडियो मुख्यालय में वापसी पर सौदेबाजी

डीजीपी को लिखे पत्र में पीडि़ताओं ने बताया कि उनकी भर्ती वायरलेस मुख्यालय में सहायक परिचालक के पद पर हुई थी और फिलहाल वे प्रधान परिचालक के पद कार्यरत हैं। ट्रांसफर पॉलिसी न बनने की वजह से महिला कर्मियों का खुलेआम शारीरिक व मानसिक शोषण किया जा रहा है। पत्र में बताया गया कि नई लड़कियों को छांटकर उनका ट्रांसफर यूपी 112 में कर दिया जाता है। फिर उनसे रेडियो मुख्यालय में वापस आने के नाम पर सौदेबाजी की जाती है। इस सौदेबाजी में शारीरिक शोषण का दबाव बनाया जाता है। जो महिला कर्मी इस शोषण के लिये तैयार हो जाती हैं, उन्हें विभिन्न कार्यालयों में पेशकार का काम लिया जाता है।

करनी पड़ती है अधिकारियों व नेताओं की 'सेवा'

पत्र में आरोप लगाया गया है कि पेशकार के रूप में कार्यरत इन महिला कर्मियों को बदले में बड़े अधिकारियों, वीआईपी श्रेणी के नेताओं की 'सेवा' करने के लिये तैयार रहना होता है। पत्र लिखने वाली पीडि़ताओं ने इस मामले की विशेष गोपनीय जांच कराने की मांग करते हुए कहा गया है कि इस जांच में यह आसानी से पता चल जाएगा कि रेडियो मुख्यालय की महिला कर्मियों की दशा कितनी बदतर है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इसी शारीरिक शोषण से तंग आकर तीन महिला कर्मी सुसाइड कर चुकी हैं। पत्र में यह भी मांग की गयी है कि रेडियो मुख्यालय में तैनात पुरानी महिला कर्मचारियों को पहले यूपी 112 में तैनात किया जाए। पत्र में एक डीआईजी स्तर के अधिकारी को पूरे गोरखधंधे का जिम्मेदार बताया गया है।

Posted By: Inextlive
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