डेंगू के मरीज का डाटा जरूरी

Updated Date: Sat, 24 Oct 2020 03:08 PM (IST)

प्राइवेट और सरकारी दोनों अस्पतालों को स्वास्थ्य विभाग को देना होगा डेंगू के एक-एक मरीज का रिकॉर्ड

डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट ही मान्य, मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल की लैब की गई चिन्हि्त

Meerut। वेक्टर बोर्न डिजीज के तहत डेंगू के एक-एक मरीज का रिकॉर्ड स्वास्थ्य विभाग को रखना होगा। जिसके चलते प्राइवेट और सरकारी दोनों तरह के अस्पतालों को इस बाबत स्वास्थ्य विभाग को रिपोर्ट देनी होगी। शासन की ओर से वैक्टर बॉर्न डिजीज को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं। यही नहीं, प्राइवेट डॉक्टर्स को इन बीमारियों के एक-एक पेशेंट का रिकार्ड रोजाना हेल्थ डिपार्टमेंट को देना होगा। अगर डॉक्टर्स ऐसा नहीं करते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एलाइजा टेस्ट होगा अनिवार्य

डेंगू की जांच के लिए एलाइजा टेस्ट ही मान्य होगा। इसके लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल की लैब चिन्हि्त की गई है। प्राइवेट डॉक्टर्स को संदिग्ध मरीज के सैंपल भी यहां भेजने होंगे। अधिकतर प्राइवेट लैब व डॉक्टर्स रैपिड कार्ड आदि से जांच कर बीमारी की पुष्टि कर देते हैं। विभागाधिकारियों के अनुसार डेंगू की जांच के लिए प्राइवेट डॉक्टर्स एनएस वन एंटीजन रैपिड टेस्ट, कार्ड किट से डेंगू के टेस्ट करते हैं। इनके रिजल्ट में विश्वसनीयता नहीं होती है। वहीं पेशेंटस को जांच के लिए 600 से 6000 रूपये तक देने पड़ सकते हैं

हर मरीज का रिकार्ड

प्राइवेट लैब व डॉक्टर्स को डेंगू के हर पेशेंट का रिकार्ड हेल्थ डिपार्टमेंट द्वारा जारी फॉर्मेट के आधार पर देना होगा। शासन की ओर से इसके लिए फॉर्मेट भी जारी किया गया है। इस पर ही पेशेंट की पूरी डिटेल डॉक्टर्स डिपार्टमेंट को देंगे। वहीं अगर किसी मरीज में स्वाइन फ्लू की पुष्टि होती है तो हेल्थ डिपार्टमेंट ही पेशेंट को दवाई देगा। प्राइवेट डॉक्टर्स स्वाइन फ्लू के मरीज को टेमीफ्लू नहीं दे सकते हैं।

ये हैं निर्देश

डेंगू के पेशेंट्स की जानकारी सीएमओ में रूम नंबर 108 में दी जाएगी। ये जानकारी कोई भी दे सकता है।

कंट्रोल रूम के जरिए भी सूचना दी जा सकती है।

सभी हॉस्पिटल्स अपने यहां हेल्प डेस्क तैयार करवाएंगे।

डेंगू वार्ड में स्टेंडर्ड ट्रीटमेंट प्रोटोकॉल डिस्पले होगा।

ब्रूफेन, कॉर्टीसोन जैसी दवाइयों का प्रयोग डेंगू में नहीं होगा।

सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में अलग से डेंगू वार्ड तैयार करवाए जाएंगे।

स्कूलों में डेंगू से बचाव की जानकारी दी जाएगी।

स्कूलों में इसके लिए एक टीचर को स्वास्थ्य शिक्षा के लिए नोडल बनाया जाएगा।

जो स्टूडेंट्स स्कूल जा रहे हैं, उनके लिए फूल स्लीव्ज ड्रेस कोड लागू होगा।

लोगों को गैर संचारी नियंत्रण व रोकथाम अभियान से जोड़ा जाएगा।

मच्छरदानी के प्रयोग को लेकर भी लोगों को जागरूक किया जाएगा।

वेक्टर बॉर्न डिजीज को लेकर हेल्थ डिपार्टमेंट पूरी तरह से सख्त है। डेंगू की जांच के लिए मेडिकल कॉलेज व जिला अस्पताल की लैब को चिन्हि्त किया गया है। अगर प्राइवेट डॉक्टर्स रिपोर्ट नहीं देते हैं तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डॉ। राजकुमार, सीएमओ, मेरठ

Posted By: Inextlive
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