Meerut। आज टोक्यों ओलंपिक में मेरठ का परचम लहरा है। कभी किसी खिलाड़ी तो कभी कोच का नाम जिले के साथ ही दुनिया में भारत का इस्तकबाल बुलंद कर रहा है। टोक्यो ओलंपिक में सीमा अंतिल के प्रदर्शन से मेरठवासियों को बेशक निराशा हाथ लगी लेकिन मेरठ से हॉकी की शुरुआत करने वाली वंदना कटारिया ने अफ्रीका के खिलाफ गोल की हैट्रिक लगाकर इतिहास रच दिया। साथ ही मगर डिस्कस थ्रो प्रतिस्पर्धा में भारत की कमलप्रीत कौर ने अपने प्रदर्शन से सभी को चौंका दिया। कमलप्रीत की कोच मेरठ की राखी त्यागी उनके साथ तो नहीं जा सकी लेकिन उनका कहना है कि मेरी ट्रेनिंग कमल के साथ है।

फाइनल में 67 तक थ्रो

टोक्यो ओलंपिक में डिस्कस थ्रो प्रतिस्पर्धा में भारत की कमलप्रीत कौर ने बेहतरीन प्रदर्शन करके सबको चौंका दिया। कमलप्रीत की कोच मेरठ की राखी त्यागी हैं। राखी ने बताया कि ये कमलप्रीत की मेहनत का फल है। 25 साल की कमलप्रीत चक्का फेंक स्पर्धा में 64 मीटर दूर चक्का फेंक फाइनल में पहुंच गई हैं। कोच राखी ने बताया कि यह ओलंपिक में किसी भारतीय का अभी तक सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है। उन्होंने बताया कि इस ऐतिहासिक पल में वे कमलप्रीत के साथ नहीं हैं, इसका उन्हें दुख है। उन्होंने बताया कि ट्रेनिंग में कमलप्रीत ने 65 तक थ्रो किया तो उन्हें फाइनल में 67 तक थ्रो करना होगा तभी वो और अच्छा कर पाएंगी। 10 दिन की लास्ट ट्रेनिंग गेम में मोर इफेक्टिव होती है। उन्होंने कहा कि कमलप्रीत फाइनल में अच्छा करेगी यह उम्मीद है।

सूची से नाम हटाया

राखी त्यागी 2014 से कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं। ओलंपिक में खिलाडि़यों के साथ कोच के जाने की सूची में राखी त्यागी का नाम तो पहुंचा मगर बाद में नाम सूची से हटा दिया गया। कमलप्रीत ओर राखी ने लगातार प्रयास किए कि वो टोक्यो साथ जाएं लेकिन ऐसा हो न सका। मेरठ जिला एथलेटिक्स संघ के सचिव अनु कुमार की ओर से भी राखी त्यागी को टोक्यो जाने की अनुमति के लिए प्रयास होता रहा। सचिव अनु कुमार ने बताया राखी कमलप्रीत के साथ जाती तो उनका मनोबल बढ़ता।

कमलप्रीत हैं पहली स्टूडेंट

मेरठ के रासना की राखी त्यागी 2014 से पंजाब के लुधियाना के स्पो‌र्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (साई) में कोच हैं। पिछले 7 सालों से राखी त्यागी पंजाब की डिस्कस थ्रोअर कमलप्रीत को कोचिंग दे रही हैं। राखी को पहली प्रशिक्षु के तौर पर कमलप्रीत ही मिली थी। राखी के पिता विजेंद्र प्रकाश त्यागी मेरठ के रोहटा के रासना गांव के निवासी हैं। राखी के मामा का घर भी मेरठ में वेस्टर्न कचहरी रोड असौड़ा हाउस में है। इत्तेफाक से राखी की शादी दिसंबर 2020 में मेरठ में ही हुई। राखी के पति अखिल त्यागी सहारनपुर देवबंद के गांव साधारणपुर के रहने वाले हैं। 2003 में लखनऊ साई सेंटर में बतौर प्रशिक्षु चयनित हुईं। इसके बाद लखनऊ में ही किशन कॉलेज से बीपीएड व एमपीएड किया। 2011 में पटियाला से एनआईएस किया जिसके बाद 2014 में साई में बतौर कोच नियुक्ति मिली। पहली पोस्टिंग साई ट्रेनिंग सेंटर बादल, पंजाब में मिली है।

इनसे हैं उम्मीद

पैदल चाल खिलाड़ी प्रियंका गोस्वामी भी शनिवार को जापान के टोक्यो के लिए रवाना हो गई। प्रियंका के कोच गौरव त्यागी ने बताया प्रियंका ओलंपिक में छह अगस्त को दोपहर एक बजे 20 किमी। पैदल चाल स्पर्धा में प्रतिभाग करेंगी। साथ ही टोक्यो ओलंपिक में पहुंची मेरठ की भाला फेंक खिलाड़ी अन्नू रानी तीन अगस्त को सुबह 5:50 बजे क्वालीफाई करने के इरादे से मैदान पर उतरेंगी।

क्या कहते है कोच

एक खिलाड़ी को निखारने में उसके कोच की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। यहीं कारण है मेरठ की कोच राखी त्यागी के अंडर में ट्रेनिंग कर रही कमलप्रीत व प्रियंका गोस्वामी जैसी खिलाड़ी निकलकर सामने आ रही हैं।

गौरव त्यागी, कोच एथलेटिक्स

मेरठ के खिलाडि़यों समेत कोच का ओलंपिक में नाम हो रहा है। कोच राखी के लिए मेरठ से काफी प्रयास किए गए कि उनको ओलंपिक में कमलप्रीत के साथ भेजा जाए पर ऐसा हो नहीं पाया। मगर राखी की मेहनत कमलप्रीत की सफलता के रुप में दिख रही है, इसकी खुशी है।

अनु कुमार, सचिव, जिला एथलेक्टिस क्लब मेरठ

वंदना के ऐतिहासिक सफर में मेरठ का भी किस्सा

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने ग्रुप ए के अपने आखिरी मैच में साउथ अफ्रीका को 4-3 से हरा दिया। वहीं मेरठ से अपने हॉकी के करियर की शुरुआत करने वाली वंदना कटारिया ने मैच में 3 गोल दागकर इतिहास रच दिया। वंदना ओलंपिक मैच में गोल की हैट्रिक लगाने वाली भारत की पहली महिला हॉकी खिलाड़ी बन गई। उनके गोल की बदौलत भारत के क्वार्टर फाइनल में पहुंचने की उम्मीद बरकरार है।

2003 में आई मेरठ

उत्तराखंड के हरिद्वार के रोशनाबाद गांव में जन्मी वंदना कटारिया का हॉकी की दुनिया का शानदार सफर मेरठ के रास्ते ही तय हुआ। कोच प्रदीप चिन्योटी ने बताया कि 29 साल की वंदना पहले खो-खो प्लेयर बनना चाहती थीं, लेकिन रनिंग स्पीड अच्छी होने की वजह से हॉकी खेलना शुरू किया। उन्होंने बताया कि 2003 मैं वंदना को अपने साथ मेरठ ले आया। यहां डीएन डिग्री कॉलेज से वंदना का हॉकी सीखने का प्रोफेशनल दौर शुरू हुआ। 2006 में वंदना को केडी सिंह बाबू स्टेडियम लखनऊ में एडमिशन हुआ और फिर उसने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

मेडल को बनाया लक्ष्य

कोच प्रदीप चिन्योटी ने बताया कि 2005 में वंदना के पास हॉकी की ट्रेनिंग के लिए पैसे नहीं थे। इसे बाद वंदना के पिता नाहर सिंह कटारिया ने किसी तरह उधार लेकर पैसों का इतंजाम किया और अपनी बेटी के सपनों को पूरी करने में मदद की। टोक्यो ओलिंपिक से 3 महीने पहले अप्रैल में नाहर सिंह का निधन हो गया था। इसके बाद वंदना ने उनकी याद को ही अपनी प्रेरणा बना लिया। पिता के लिए ओलिंपिक मेडल जीतने को ही एकमात्र लक्ष्य बना लिया।

Posted By: Inextlive