पहले मुकदमे ने डराया, अब ड्रिप्रेशन ने हराया

Updated Date: Fri, 29 Jan 2021 03:40 PM (IST)

जेल में मानसिक तौर पर बीमार हो रहे है बंदी और कैदी

तीन सौ पुरुष और पचास महिला बंदी मानिसक तौर पर हो गए बीमार

जेल प्रशासन की ओर से कराई जा रही काउंसलिंग ताकि डिप्रेशन से निकाला जा सके बाहर

Meerut। चौधरी चरण सिंह जिला कारागार में बंद बंदियों और कैदियों डिप्रेशन ने अपनी चपेट में ले लिया है। डिपे्रशन के चलते बंदियों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि जेल प्रशासन ने अब महीने में एक बार काउंसलिंग जेल में अनिवार्य कर दी है ताकि तनाव के शिकार बंदियों का पूरी तरह से उपचार किया जा सके। कुछ लोगों को ट्रीटमेंट भी दिया जा रहा है, जबकि कुछ को योग करने की भी सलाह दी गई है।

क्यों बढ़ रही समस्या

जेल में बंद बंदी और कैदी मानसिक तौर पर इसलिए बीमार हो जाते है कई बार घरेलू हिंसा और जानलेवा हमले के मामले में कुछ लोग कईयों के नाम लिखवा देते है, जिस पर पुलिस जांच पड़ताल बाद में करके पहले आरोपियों को जेल भेज देती है। जांच में चार्जशीट में जब दोषी पाए जाते है तो कुछ लोग इस में बच जाते है और बाद में उनकी जमानत हो जाती है। ऐसे में वह मानसिक तौर पर बीमार हो जाते है। इनको डिप्रेशन से निकालने के लिए काउंसलिंग कराई जाती है। जब कोई अधिक तनाव में चले जाता है तो उनको डिप्रेशन से बाहर निकालने के लिए दवाईयां भी दी जाती है ताकि उनका पूरी तरह से उपचार किया जा सके।

हर महीने कराई जाती है काउंसलिंग

जेल में डिप्रेशन के शिकार बंदियों और कैदियों की काउंसलिंग हर महीने कराई जाती है। काउंसलिंग करने के बाद तनाव से पीडि़त बंदी और कैदी अपनी समस्या काउंसलर को बताते है और उपचार भी पूछते है। जेल में आने के बाद कुछ बंदियों की तो नींद भी उड़ जाती है जिसका पूरी तरह से उपचार एक्सपर्ट के द्वारा किया जाता है। कुछ लोग ऐसे होते है वह शराब पीने-सिगरेट पीने के आदि होते है। उनको जेल में सिगरेट और शराब कुछ नहीं मिलती है, जिसके चलते वह तनाव में आ जाते है।

इन मुकदमों के सबसे ज्यादा डिप्रेशन के शिकार

दहेज एक्ट

घरेलू हिंसा

जानलेवा हमला

धोखाधड़ी

गैंगस्टर

मेरठ जेल में बंदियों और कैदियों का आंकडा

जेल में बंद है 2500 बंदी और कैदी

महिला 250

पुरुष 2350

डिप्रेशन के शिकार

महिला 80

पुरुष 550

जेल में आने के बाद कुछ बंदी मायूस हो जाते है और वह मानसिक तौर पर बीमार हो जाते है। मेरठ में ऐसे बंदी है जो तनाव में है, जिनके लिए हम मनोवैज्ञानिक को बुलाकर काउंसलिंग कराते है। बंदियों को निशुल्क में वकील भी मुहैया कराते है ताकि उनके केस में पैरवी हो और वह तनाव से बाहर आ सके।

बीडी पांडे, जेल अधीक्षक, चौधरी चरण सिंह जिला कारागार, मेरठ

Posted By: Inextlive
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