10 साल से अधर में अटकी है कैंट में हर घर दो डस्टबिन बांटने की योजना।

मेरठ (ब्यूरो)। आगामी स्वच्छता सर्वेक्षण में देश के 62 कैंट के बीच मेरठ कैंट नंबर वन बनने की तैयारी में जुट गया है। गत वर्ष देश में कैंट की 15वीं और यूपी में दूसरी रैैंक आई थी। वहीं 2021 में कैंट की देश में 27वीं और यूपी में दूसरी रैैंक आई थी। मगर 10 साल पुरानी डस्टबिन योजना का टारगेट आज तक कैंट बोर्ड पूरा नहीं कर सका है। मगर इस बार कैंट बोर्ड एक बार फिर डस्टबिन योजना को शुरू कर टारगेट पूरा करने की योजना बना रहा है।

अलग-अलग रंग के डस्टबिन
कैंट बोर्ड एरिया की करीब एक लाख की आबादी को ये डस्टबिन वितरित करने का लक्ष्य है, इसके तहत नीला व हरा दो रंग के डस्टबिन दिए जाएंगे। इसमें सूखे कूड़े के लिए हरे रंग और गीले कूड़े के लिए नीले रंग के डस्टबिन में वितरित किए जाएंगे। इन्हीं डस्टबिन केमाध्यम से कैंट क्षेत्र में डोर टू डोर कूड़ा कलेक्ट किया जाएगा।

क्या है डस्टबिन योजना
दरअसल, 2013 में कैंट बोर्ड ने क्षेत्र के घरों में सूखे और गीले कूड़े के लिए 4500 डस्टबिन बांटने की योजना बनाई थी। योजना के तहत क्षेत्र के आठ वार्डो में दो हजार डस्टबिन बांटे गए। मगर टारगेट पूरा नहीं हो सका। हर साल स्वच्छता सर्वेक्षण के साथ यह योजना केवल कागजों में ही सिमट कर रह गई। साल 2013 के बाद साल 2022 में कैंट बोर्ड ने क्षेत्र के आठ वार्डों में 400 डस्टबिन बांटे। डस्टबिन योजना के तहत 10 साल में अब तक केवल 2400 डस्टबिन ही बांटे गए हैैं।

फैक्ट्स पर एक नजर
कैंट बोर्ड ने 2013 में शुूरू की थी डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन के लिए हर घर दो डस्टबिन बांटने की योजना।

4500 डस्टबिन आठ वार्डों में बांटने का रखा गया था लक्ष्य।

2000 डस्टबिन ही 2013 में बांटे गए, उसके बाद योजना ठप हो गई।

08 साल तक क्षेत्र में नहीं बांटे गए डस्टबिन।

40 रुपये दोनों डस्टबिन के एवज में हर घर से लिए जाने थे।

400 डस्टबिन कैंट बोर्ड ने 2022 में बांटे।

10 साल में बांटे गए कुल 2400 डस्टबिन।

इन मानकों पर होता है स्वच्छता सर्वेक्षण
एसटीपी (सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट)
कूड़ा निस्तारण
ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त)
डायरेक्ट ऑब्जर्वेशन
सर्विस लेवल प्रोग्रेस
स्वच्छता सर्टि्िरफकेशन
सिटीजन वॉइस
गार्बेज कलेक्शन, प्रोसेसिंग, डिस्पोजल
फीडबैक
सॉलिड वेस्ट मैनजमेंट

डस्टबिन भी गायब
कैंट में आठों वार्डो में हर गली में डस्टबिन लगाने की प्लानिंग थी। पर जो 2400 डस्टबिन 10 साल में लगाए गए, उनमें से ज्यादातर गायब हो चुके हैैं।

कूडे से बनेगी बिजली
कैंट बोर्ड पूरे एरिया से डोर टू डोर कूड़ा एकत्र कर ट्रैंचिंग ग्राउंड में एकत्र करेगा।यहां से कूड़ा बिजली बनाने वाले निजी कंपनियों को बेचा जाएगा। इसके लिए बकायदा टेंडर प्रक्रिया के तहत आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे।

स्वच्छता दूत करेंगे सहयोग
कैंट बोर्ड के 8 वार्डो में इस योजना के तहत डस्टबिन वितरित किए जाएंगे।

हर वार्ड में स्वच्छता व साफ-सफाई के लिए लोगों को जागरुक करने के उद्देश्य से हर वार्ड में स्वच्छता दूत तैनात किए जाएंगे।

ये स्वच्छता दूत क्षेत्र में जगह-जगह कूड़ा फेंकने वाले लोगों को रोकेंगे और सफाई के प्रति जागरुक करेंगे।

स्वच्छता दूत बनाने के लिए हर वार्ड के 10 से 15 जागरुक व सफाई पसंद लोगों को जोड़ा जाएगा।

स्कूली बच्चों से लेकर व्यापारी वर्ग को भी स्वच्छता दूत बनाया जाएगा,

आज तक पूरी नहीं हुई डस्टबिन योजना
पहले भी यह योजना शुरू की थी पर कुछ जगह कूड़ेदान बंटे और बंद हो गए। इनका काम केवल योजना बनाना है उस पर अमल करना नहीं।
ब्रजमोहन, व्यापारी नेता

क्षेत्र में गलियों और सड़कों पर जो डस्टबिन लगे थे, वो गायब हो गए हैैं। जिसकी वजह से जगह-जगह कूड़ा फैला रहता है।
संदीप अग्रवाल, व्यापारी नेता

गलियों, मोहल्लों की बात तो छोड़ दीजिए बाजारों में सार्वजनिक स्थलों पर कूड़ेदान तक नहीं है। कई बार कैंट बोर्ड से शिकायत की लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
दीपक चड्ढा, व्यापारी नेता

स्वच्छता सर्वेक्षण के आते ही कैंट को साफ-सफाई और डस्टबिन योजना याद आ जाती है। मगर 10 साल में क्षेत्र में डस्टबिन ही नहीं लग पाए।
नरेंद्र सिंह, अध्यक्ष, आबूलेन व्यापार संघ

पहले भी डस्टबिन योजना शुरू की गर्ई थी, जिसके तहत दो डस्टबिन के एवज में हर घर से 40 रुपये लिए जाने थे। हालांकि लोगों ने इंट्रस्ट नहीं दिखाया और योजना अधर में अटक गई। मगर इस बार फिर योजना को शुरू किया जा रहा है। योजना के तहत लोगों को सफाई और कूड़ा निस्तारण के लिए भी जागरूक किया जाएगा। अभियान से पहले एक सर्वे भी किया जाएगा, जिससे ये पता लगाने की कोशिश की जाएगी कि कितने लोग 40 रुपये देने के लिए इंट्रेस्टेड हैैं। उसके हिसाब से ही डस्टबिन बांटे जाएंगे।
ज्योति कुमार, सीईओ कैंट बोर्ड

Posted By: Inextlive