शहर की लगातार बढ़ती आबादी शहर के पर्यावरण यानि हरियाली को निगलती जा रही है। स्थिति यह है कि आबादी के चलते शहर के हरियाली क्षेत्र पर अतिक्रमण होता जा रहा है और विकास के बहाने लगातार वन क्षेत्र को काटा जा रहा है इससे साल दर साल वन क्षेत्र में कमी आ रही है। इस साल वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया की द्विवार्षिक रिपोर्ट के अनुसार मेरठ के कुल भू-भाग का 2.67 प्रतिशत हिस्सा ही वनाच्छादित यानि हरियाली से हरा भरा बचा हुआ है। जबकि राष्ट्रीय वन नीति में कुल भौगोलिक क्षेत्र के 33 प्रतिशत हिस्से को हरा-भरा होना चाहिए।

मेरठ (ब्यूरो)। गौरतलब है कि जनपद में वन क्षेत्र के बढ़ाने के लिए हर साल लाखों पौधे लगाए जाते हैं। साल 2021 में भी वन विभाग के साथ मिलकर एमडीए, आवास विकास, उद्यान विभाग, ग्राम्य विकास, पंचायती राज, कृषि समेत अन्य विभागों की मदद से करीब 29 लाख पौधे लगाए गए थे। लेकिन इसके बाद भी हरियाली क्षेत्र में इजाफा नही हुआ है। अगर जनसंख्या की बात करें तो वर्तमान में शहर की जनसंख्या 38 लाख पार कर चुकी है। जबकि साल 2011 में 34 लाख 43 हजार के करीब जनसंख्या था और वन क्षेत्र 20 प्रतिशत के करीब था। वहीं 29 लाख पौधारोपण के बाद भी इस साल जिले के वन क्षेत्र 2.67 प्रतिशत तक सीमित है।

इस साल 32 लाख पौधारोपण का टारगेट
जनपद के पॉल्यूशन स्तर को सुधारने और हरियाली को बढ़ाने के लिए वन विभाग हर साल की तरह इस साल भी जुलाई माह में वन महोत्सव के अवसर पर जनपद में पौधारोपण करेगा। इसके लिए वन विभाग को 32.58 लाख अधिक पौधे रोपने का टारगेट भी दिया गया है और इसके लिए विभाग ने तैयारी तो शुरु कर दी है। लेकिन खास बात है कि पिछले साल के 29 लाख पौधों में से 20 से 30 प्रतिशत ही पौधे शहर को ऑक्सीजन दे रहे हैं बाकि का पता नही है और ना ही संबंधित विभागों को इनकी सुध है।

गत वर्ष टूटा था रिकार्ड, खीेंचे थे फोटो
गत वर्ष की बात करें तो जनपद के अधिकारियों की सजगता के चलते साल 2021 में वन महोत्सव के दौरान टारगेट से अधिक पौधारोपण कर रिकार्ड बनाया गया था। गत वर्ष जुलाई का लक्ष्य 25,85,700 था। जिसके सापेक्ष 5500 स्थानों पर 25,90,095 पौधे रोपे गए थे।

फैक्ट्स
पिछले पांच साल में हुआ पौधारोपण
साल 2022- 32.58 लाख पौधे
साल 2021- 29.24 लाख पौधे
साल 2020- 24.66 लाख पौधे
साल 2019- 19.32 लाख पोधे
साल 2018 - 9.50 लाख पौधे

मेरठ के वन क्षेत्र पर नजर
कुल भू-भाग 2559 वर्ग किमी।
अति घना वन क्षेत्र 00 वर्ग किमी।
मध्यम घना वन क्षेत्र 34 वर्ग किमी।
खुला वन क्षेत्र 34.4 वर्ग किमी।
कुल वन क्षेत्र 68.4 वर्ग किमी।
कुल क्षेत्रफल पर वन 2.66 फीसद

साल 2021 में ये हुआ था विभागवार पौधारोपण
वन एवं वन्य जीव -7,63,560
पर्यावरण- 84,840
ग्राम्य विकास विभाग - 11,22,000
औद्योगिक विकास - 6,360
नगर विकास - 84,960
आवास विकास - 7,920
जल शक्ति - 13,920
ऊर्जा - 8,640
गृह - 7,920
लोक निर्माण विभाग - 13,920
रेशम - 30,009
कृषि - 2,15,604
पशुपालन - 10,800
सहकारिता - 51,060
उद्योग- 9,600
माध्यमिक शिक्षा- 2,556
बेसिक शिक्षा - 2,556
उच्च शिक्षा -24,000
प्रावधिक शिक्षा - 7,200
श्रम विभाग - 2,520
स्वास्थ्य -16,440
परिवहन - 2,520
रेलवे - 34,440
रक्षा - 7,800
उद्यान - 1,40,282
राजस्व - 1,26,480
पंचायती राज - 1,26,480
कुल - 29,24,387

केवल पौधरोपण से ही शहर की हरियाली नहीं बढ़ेगी, पौधरोपण से ज्यादा जरूरी है पहले लगाए गए पौधों का संरक्षण यह केवल विभागों की नहीं बल्कि हर आम आदमी की भी जिम्मेदारी है।
सुमित शर्मा

जितने पेड़ लगाए जा रहे उनका संरक्षण आवश्यक है। संस्थाएं केवल पौधरोपण कर उनका रख-रखाव करना भूल जाती हैं। खासतौर पर गर्मियों के मौसम में उनकी देखभाल करना बहुत जरूरी है।
सावन कनौजिया, अध्यक्ष, एनवायरमेंट क्लब

पौधों की मॉनीटरिंग के लिए उनकी जियो टैंगिंग की जाती है जिसका सत्यापन समय समय पर सभी विभाग किया करते हैं। वन विभाग के पास केवल 7 प्रतिशत भूमि है जबकि 93 फीसद भूमि निजी है।
राजेश कुमार, डीएफओ

Posted By: Inextlive