कनोहरलाल महिला डिग्री कॉलेज में एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया।


मेरठ (ब्यूरो)। कनोहरलाल महिला पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा शुक्रवार को एक दिवसीय शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की थीम सेव बडर््स, सेव एनवायरमेंट रही। शिविर में स्वयंसेविकाओ ने पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से पक्षियों को संरक्षित करने का प्रण लेते हुए कैंपेन का शुभारंभ किया। इस कैंपेन के तहत वे अधिक से अधिक लोगों को अपने घरों में पक्षियों के लिए बर्ड फीडर की व्यवस्था करने के लिए अपील की गई। गैरेया बचाने का दिया संदेश शिविर में स्वयं सेविकाओं ने विभिन्न प्रकार के बर्ड फीडर बनाना सीखा। इससे पहले उन्हें नेस्ट मैन ऑफ इंडिया के नाम से प्रख्यात राकेश खत्री के गौरेया संरक्षण अभियान से भी जागरूक कराया गया। उनको बताया गया कि पर्यावरण को संरक्षित रखने के लिए गौरेया को बचाना कितना जरुरी है। मौके पर प्रिंसिपल डॉ। अलका चौधरी ने कहा कि कभी घर आंगन में चिडियों की चहचहाट आम बात थी। घर के लोग चुग्गा डालकर गौरेया को सरंक्षित किया करते थे। चीं-चीं, चिरैया, चिडिय़ां जैसे कई नामों ने जानी जाने वाली गौरेया अब कम ही नजर आती है। उन्होंने कहा कि बदलती लाइफस्टाइल, बढ़ता शहरीकरण, खेतों में पेस्टीसाइड के बढ़ते प्रयोग ने गौरेया की संख्या में कमी की है। गौरैया के प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए पूरे विश्व में हर वर्ष 20 मार्च को गौरैया दिवस मनाया है। इस दिवस को पहली बार वर्ष 2010 में मनाया गया था। लगातार घट रही गौरैया की संख्या को अगर गंभीरता से नहीं लिया गया तो वह दिन दूर नहीं, जब गौरैया हमेशा के लिए दूर चली जाएगी। इसलिए हमें गौरेया को बचाने के लिए हरदम प्रयास करना चाहिए। सभी को जागरुक किया शिविर का संयोजन एवं संचालन कार्यक्रम अधिकारी स्मृति यादव ने किया। शिविर में मुस्कान, छाया, कशिश, रमा, गुनगुन, नूतन, रितिका, स्वाति बंसल, सपना, सुहानी, सिदकप्रीत कौर आदि ने बहुत सुंदर सुंदर बर्ड फीडर बनाए। सभी लोगों को जागरुक किया। इस अवसर पर सुरेश चंद प्रजापति, संजीव माहेश्वरी आदि का योगदान रहा। Posted By: Inextlive