शुगर पेशेंट्स का कवच बनेगी मेटफॉर्मिन

Updated Date: Mon, 13 Jul 2020 12:36 PM (IST)

अमेरिका और चीन के बाद अब मेरठ में भी डायबिटिक पेशेंट्स को दी जाएगी मेटफॉर्मिन

Meerut। कोरोना वायरस से संक्रमित शुगर के मरीजों के लिए पुरानी दवा मेटफॉर्मिन का इस्तेमाल किया जाएगा। अमेरिका और चीन के बाद अब देश में भी डायबिटीज से ग्रस्त कोरोना पॉजिटिव मरीजों पर इस दवाई के बेहतर परिणाम मिले हैं। केजीएमयू के बाद मेरठ में भी शुगर के मरीजों को ये दवाई दी जाएगी। इसके साथ ही मरीजों पर इसके असर पर रिसर्च भी की जाएगी।

इलाज में मददगार दवा

केजीएमयू के क्रिटिकल केयर मेडिसिन के एचओडी व मेरठ के ओएसडी डॉ। वेद प्रकाश का कहना है कि डायबिटीज रोगियों में कोरोना वायरस अधिक जानलेवा बन रहा है। वायरस की चपेट में आने पर ऐसे मरीजों की स्थिति जल्द बिगड़ रही है। मरीजों की ब्लड शुगर को कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है। हालांकि कोविड-डायबिटीज के मरीजों को इंसुलिन पर ले लिया जाता है, लेकिन मेटफॉर्मिन दवाई इलाज में मददगार साबित होगी। शुगर की यह दवा ब्लड शुगर कम करने के साथ-साथ कोरोना वायरस के असर को भी कम करती है।

मेरठ में होगा शोध

ओएसडी डॉ। वेद प्रकाश बताते हैं कि चीन के वुहान व अमेरिका के संस्थानों में शुगर के मरीजों पर इस दवाई के असर को देखने के लिए छह हजार मरीजों पर स्टडी की गई। अब मेरठ में भी शुगर के मरीजों पर इस दवाई का असर देखने के लिए शोध होगा। इस संबंध में गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। दूसरे देशों में इस दवाई के प्रयोग से डायबिटिक कोरोना पेशेंट्स की मृत्यु दर में गिरावट दर्ज की गई है। डॉ। वेद कहते हैं कि मेरठ में कोरोना पेशेंट्स की मृत्यु दर अधिक होने से डायबिटिक कोरोना पेशेंट्स को मेटफॉर्मिन भी साथ में देकर स्टडी करने के लिए कहा गया है।

ये होगी डोज

शुगर के मरीजों के लिए हर दिन 500-1000 एमजी तक डोज तय की गई है। हालांकि अभी रिसर्च स्टडी के बाद ही पूरी तरह से दवा को प्रोटोकॉल में शामिल किया जाएगा। डॉ। वेद प्रकाश बताते हैं कि कोरोना वायरस में शामिल प्रोटीन तत्व फेफड़े में पाए जाने वाले रिसेप्टर 'एसीइटू्' के 'एन' टर्मिनल पर बाइंडिंग करता है। जो फेफड़े में एक्यूट लंग इंजरी और एक्यूट रिस्परेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम कर मरीज को गंभीर बना देता है। यही वजह है कि शुगर के मरीजों का कोरोना वायरस की वजह से डेथ रेट सबसे ज्यादा रहा है। मेटफॉर्मिन दवा एसीइटू का फास्फोरिलेशन कर देती हैं। यानी कि संबंधित रिसेप्टर पर फास्फेट की कवरिंग चढ़ा देती है, जिससे वायरस की स्पाइक प्रोटीन की रिसेप्टर पर बाइंडिंग करने का प्रोसेस कमजोर हो जाती है या फिर हो ही नहीं पाता है। इसके साथ ही एसीइटू रिसेप्टर को अप रेगुलेट यानी कि एक्टिव कर देती है। वहीं वायरस को डाउन रेगुलेट करने का काम करती है। एक ही दवा से मरीज में शुगर लेवल के साथ-साथ वायरस के प्रकोप को भी कम किया जा सकता है।

Posted By: Inextlive
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