स्टूडेंट्स ने ट्विटर पर शिकायत की राज्यपाल शिक्षामंत्री व यूनिवर्सिटी अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की।

मेरठ (ब्यूरो)। वैसे तो सीसीएस यूनिवर्सिटी को नैक मूल्यांकन में ए प्लस प्लस ग्रेड मिला है। दावा है कि छात्रों के हितों के लिए यूनिवर्सिटी ने कई कदम उठाए हैं, लेकिन हालत यह है कि सेमेस्टर में फेल हुए स्टूडेंट्स का अगले सेमेस्टर में निरस्त हो चुका है, लेकिन सामान्य शुल्क काटकर शेष फीस वापस नहीं की गई है। इससे छात्रों में नाराजगी है। फीस वापसी के लिए छात्रों ने सोशल मीडिया पर शिकायत की है।

यह है मामला
गौरतलब है कि नवंबर 2022 में सीसीएसयू की परीक्षा समिति ने तय किया था कि एग्जाम के बाद स्टूडेंट्स को अगले सेमेस्टर में एडमिशन देकर पढ़ाई कराई जाएगी, ताकि उनका समय बर्बाद न हो। यूनिवर्सिटी के मुताबिक अधिकतर स्टूडेंट्स का रिजल्ट में समय खराब हो जाता है। कहा गया था कि फेल स्टूडेंट्स का एडमिशन निरस्त कर सामान्य शुल्क काटकर शेष फीस वापस कर दिया जाएगा, लेकिन वो वापस नहीं की गई है। अब इससे बचने के लिए कॉलेज स्टूडेंट्स से शपथ पत्र ले रहे हैं। यही नहीं फीस वापस न लेने के लिए छात्रों से शपथ पत्र मांगा जा रहा है। ऐसे में स्टूडेंट््स ने ट्विटर के माध्यम से यह मुद्दा उठाया है। इस मामले से दस हजार से अधिक स्टूडेंट्स प्रभावित हो रहे हैं।

छह हजार तक है फीस
बता दें कि विभिन्न कोर्स के लिए छात्रों से अलग अलग फीस ली गई थी। ऐसे में किसी कोर्स की 14 सौ रुपए है। तो किसी कोर्स की सेमेस्टर फीस 4 हजार रुपए भी है। ऐसे में सेमेस्टर में फेल हुए करीब 10 हजार से अधिक छात्रों की फीस वापस करनी है। बीतेे दिनों सेमेस्टर के एग्जाम में 70 प्रतिशत स्टूडेंट्स फेल हो गए थे, लेकिन उनकी फीस यूनिवर्सिटी ने निर्णय अनुसार नहीं लौटाई गई। अब छात्रों ने ट्विटर पर राज्यपाल और यूनिवर्सिटी के आलाधिकारियों व शिक्षामंत्री से गुहार लगाई है।

कार्रवाई की मांग
दरअसल, कॉलेज अब फेल हुए छात्रों की फीस वापसी से बच रहे हैं। सीसीएस यूनिवर्सिटी के फैसले को दरकिनार कर रहे हैं। स्टूडेंट्स से एक शपथ पत्र लिखवाया जा रहा है। इसके मुताबिक छात्रों से कहा गया है कि वे फीस न मांगे।

छात्र नेताओं की नाराजगी
इस मनमानी के खिलाफ पूर्व छात्रसंघ महामंत्री अंकित अधाना व अरुण शर्मा ने यूनिवर्सिटी से कार्रवाई की मांग की है। यूनिवर्सिटी के निर्णय के नोटिस को भी साथ में संलग्न किया है। रजिस्ट्रार धीरेंद्र कुमार वर्मा ने कहा कि इस संबंध में एक मीटिंग होगी। उसी में फैसला लिया जाएगा।

यूनिवर्सिटी के निर्देशों को भी कॉलेज अनदेखी कर रहे हैं। इसके लिए कॉलेजों पर कार्रवाई की जानी चाहिए।
सुनिधि

यूनिवर्सिटी ने भी पहले ऐसा किया था। पहले बोलकर फीस वापस नहीं की, अब कॉलेज भी ऐसा हीं कर रहे हैं, यह गलत है कार्रवाई होनी चाहिए।
प्राची

यूनिवर्सिटी अपने नोटिस के अनुसार कॉलेजों से इसका जवाब मांगे, क्योंकि यह गलत है, स्टूडेंट्स के साथ विश्वासघात है।
शशांक

Posted By: Inextlive