32 विभागों के भरपूर प्रयास के बाद भी लगाम नही लग पा रहा है।


मेरठ ब्यूरो। प्रदूषण एक ऐसी समस्या बन चुकी है जिस पर 32 विभागों के भरपूर प्रयास के बाद भी लगाम नही लग पा रहा है। प्रदूषण से राहत पूरी तरह से मौसम की निर्भर हो चुकी है। यानि यदि तेज हवाएं चलेगी या बारिश होगी तो अपने आप प्रदूषण से राहत मिल जाएगी लेकिन यदि हवा ना चले तो शहर गैस चैंबर बन जाएगा। लेकिन ऐसा क्यों है, क्या कारण है शहर में रोजाना प्रदूषण स्तर बढ़ रहा है और प्रयास अधूरे साबित हो रहे हैं दैनिक जागरण आई नेक्स्ट ने अपने कैंपेन के तहत उन कारणों को सामने लाने का प्रयास किया है। सरकारी वाहन ही आउटडेटेड


गौरतलब है कि ग्रेप यानि ग्रेडेड एक्शन रेस्पोंस सिस्टम लागू होते ही सभी विभाग प्रदूषण रोकने के लिए अलर्ट हो गए थे। ऐसे में परिवहन विभाग ने भी ऐसे 52 हजार से अधिक वाहनों की सूची तैयार की थी जिनकी आयु पूरी होने के बाद भी जनपद की सड़कों पर दौड़ रहे थे लेकिन इन वाहनों पर लागम अभी तक विभाग नही लगा पाया है। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों में संचालित हो रहे 291 सरकारी वाहन भी शामिल हैं जिनकी सूची तैयार है। वही रोडवेज की बसों की बात करें तो 10 साल पूरी कर चुकी 226 यूपी एसआरटीसी की सरकारी और अनुबंधित बसें अभी तक सड़कों पर संचालित हैं। इसके अलावा विभिन्न सरकारी बैंकों में लगी गाडिय़ां और पीवीवीएनएल, एलआईसी, नगर निगम, कैंट बोर्ड, कृषि विभाग में संचालित चौपहिया पुराने वाहन भी प्रदूषण का कारण बने हुए हैं। दिल्ली रोड पर धूल का गुबार वहीं दिल्ली रोड पर रैपिड रेल के निर्माण के कार्य के चलते दिनभर धूल का गुबार उड़ता है। इसके साथ ही दिल्ली रोड पर सबसे अधिक वाहनों का दवाब पूरा दिन बना रहता है। इस कारण से उड़ती धूल और मिटटी प्रदूषण का एक प्रमुख कारण बना हुआ है। गलियों में मिनी इंडस्ट्रीज

शहर के इंडस्ट्रीयल एरिया मोहकपुर, परतापुर, साईपुरम आदि की तो यहां अधिकतर इंडस्ट्रीज मानकों अनुसार ही चल रही हैं और इन पर पॉल्यूशन विभाग की पूरी नजर है लेकिन शहर में जगह जगह गली मोहल्लों में संचालित हो रही अवैध इंडस्ट्रीज प्रदूषण का प्रमुख कारण बनी हुई हैं। स्पोटर्स गुडस, कैंची कलस्टर, बुलियन कारोबारी और ज्वैलरी कारोबार से जुडी छोटी इंडस्ट्रीज शहर के कई मोहल्लो में गली गली में चल रही हैं। इन छोटी घरेलू इंडस्ट्रीज में मशीनों से लेकर भट्ठी तक पर रोजाना घंटों काम होता है। इन घरेलू फैक्ट्रियों में पॉल्यूशन विभाग का कोई मानक काम नही करता है लेकिन प्रदूषण बिगाडऩे के लिए धुंआ और अन्य केमिकल वायु के साथ जल प्रदूषण को इजाफा दे रहे हैं। कंस्ट्रक्शन वर्क की अधूरी निगरानी वायु प्रदूषण कम करने के लिए निगम और प्रदूषण नियंत्रण विभाग के अधिकारी व अन्य विभागीय अधिकारी संयुक्त रूप से कंस्ट्रक्शन साइट्स का निरीक्षण करने के निर्देश हैं लेकिन इसके बाद भी निर्माण विभाग के अधिकारियों ने कंस्ट्रक्शन साइट पर जाकर निरीक्षण करने में लापरवाही कर रहे हैं जिसके चलते अभी लगातार निर्माण कार्य जारी है और खुले में निर्माण सामग्री जगह जगह फैली हुई है। जो प्रदूषण का कारण है। कूडा जल रहा, कार्रवाई शून्य वहीं कूड़ा/गारबेज जलाने की घटनाओं पर रोक लगाने और दोषियों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई के लिए नगर निगम ने अपने अपने जोनल सेनेट्री इंचार्ज, सुपरवाइजर, फूड सेफ्टी ऑफिसर को निगरानी के लिए अलर्ट किया हुआ है लेकिन इसके बाद भी जगह जगह कूड़ा जल रहा है और कार्रवाई शून्य है। यह रहा 18 दिसंबर को प्रदूषण स्तर- - शहर का प्रदूषण स्तर- 216 - पल्लवपुरम का एक्यूआई- 237 -गंगानगर का एक्यूआई- 298 -

जयभीमनगर का एक्यूआई- 173

प्रदूषण के कई कारण है, जिन पर काफी हद तक इस बार सख्ती से लगाम लगाई जा चुकी है। बाकी निगरानी जारी है ग्रेप के नियमानुसार कार्रवाई भी हो रही है। - भुवन प्रकाश यादव, क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी

Posted By: Inextlive