पिस्टल बचाने को दांव पर खानदानी बंदूक

Updated Date: Sun, 17 Jan 2021 04:40 PM (IST)

केंद्र सरकार के नए आदेशानुसार तीसरे लाइसेंस और हथियार को करना पड़ रहा सरेंडर

अब एक व्यक्ति को दो लाइसेंस और दो हथियार रखने का ही अधिकार

पिस्टल, रिवॉल्वर और रायफल को सेव कर खानदानी 12 बोर की बंदूक बेच रहे या सरेंडर कर रहे लोग

संडै स्टोरी

विकास चौधरी

Meerut शासन के दो लाइसेंसी शस्त्र के नए आदेशानुसार तीसरे लाइसेंसी शस्त्र को लोग सरेंडर कर रहे हैं। मगर परेशानी इस बात की है कि इस आदेश के चलते लोग अपनी खानदानी 12 बोर की बंदूक या तो सरेंडर करने या कौडि़यों के दाम में बेचने पर मजबूर हो गए हैं। तीसरा हथियार बेचने वाले कुछ लोगों को कहना है कि अगर सरकार तीसरे लाइसेंस को परिवार के ही किसी व्यक्ति को ट्रांसफर करने की छूट दे देती तो उनका खानदानी हथियार घर में ही रह जाता। दरअसल, शासन द्वारा आयुध अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद अब एक को व्यक्ति को अधिकतम दो लाइसेंसी शस्त्र रखने की छूट दी गई है। स्टेट्स सिंबल बने लाइसेंसी शस्त्र धारकों के लिए तीसरे लाइसेंसी शस्त्र को सरेंडर करने की बाध्यता यानी लास्ट डेट 13 दिसंबर 2020 थी। मगर बाद में इसे 13 जनवरी 2021 कर दिया गया। ऑफिशियली तौर पर फिलहाल डेट खत्म हो चुकी है लेकिन अभी भी कलेक्ट्रेट से लोगों को लाइसेंस सरेंडर करने और हथियार बेचने की अनुमित दी जा रही है। कलक्ट्रेट के असलाह बाबू राकेश कुमार के मुताबिक जिले में करीब 15 हजार लोगों के पास लाइसेंस शस्त्र हैं, इनमें से 31 लोगों के पास तीन लाइसेंसी शस्त्र हैं। जिनमें में 22 आवेदन करने वालों को शस्त्र बेचने और लाइसेंस सरेंडर करने की अनुमति फिलहाल शस्त्र अनुभाग द्वारा दी जा चुकी है। वहीं जो तीसरा लाइसेंसी शस्त्रा सरेंडर नहीं करते, उसे जब्त करने की जिमेदारी संबंधित थानाध्यक्ष की होगी।

नए वेपंस से प्यार

आज की डेट में शस्त्रों के बाजार में 12 बोर की पुरानी बंदूक की कीमत जीरो है। जबकि ऑर्डिनेंस की पिस्टल की कीमत करीब 1.5 लाख, रिवाल्वर की कीमत करीब 1 लाख और रायफल की कीमत भी करीब 1 लाख के आसपास है। ऐसे में तीसरे लाइसेंसी शस्त्र के रूप में लोग पिस्टल, रिवॉल्वर और रायफल को सरेंडर करने या बेचने की बजाए अपने खानदानी शस्त्र यानी 12 बोर की बंदूक की बलि चढ़ा रहे हैं। तीसरे लाइसेंसी शस्त्र को सरेंडर करने वाले विनय चौधरी ने कहाकि बंदूक से पुरानी यादें जुड़ी हैं लेकिन महंगे शस्त्रों को भी सरेंडर भी तो नहीं कर सकते।

बदले में पैसे मांग रहे दुकानदार

आज जहां हथियारों के बाजार में लोगों के लिए विकल्प के तौर पर एक से एक अत्याधुनिक और कॉस्टली हथियारों की फेहरिस्त मौजूद है। वहां भला कोई 12 बोर की ओल्ड मॉडल बंदूक के दाम क्यों लगाएगा। पीएल शर्मा रोड स्थित विकास गन हाउस के मैनेजर सुनील सिंह का कहना है कि बेशक आपकी बंदूक खानदानी हो या उससे आपकी कितनी ही पुरानी यादें क्यों न जुड़ी हों, वो हमारे लिए सिर्फ एक बंदूक है। हमने तीन बंदूकें अब तक जमा की हैं और उनके बदले में लोगों से 3 से 4 हजार रूपये तक लिए हैं क्योंकि हमें उनका इंशोएरेंस करना पड़ता है। वो बंदूक हमारे लिए वेस्टेज हैं क्योंकि अब कोई भी नए हथियार खरीदेगा पुराने नहीं। वहीं कंकर खेड़ा के कदम सिंह का कहना है कि मुझे तीसरे लाइसेंसी शस्त्र के रूप में अपनी 47 साल पुरानी बंदूक बेचनी पड़ी है। जिसके बाजार में न के बराबर पैसे मिल रहे थे इसलिए मैंने वो ऐसे ही दुकान पर जमा करा दी। अगर परिवार में ही लाइसेंस ट्रांसफर होने का नियम होता तो खानदानी हथियार बेचना नहीं पड़ता।

अत्याधुनिक हथियारों के आगे बंदूक फेल

हथियारों के बाजार में किसी जमाने में ऑर्डिनेस की 12 बोर की बंदूक का जलवा होता था। हर शादी और खास कार्यक्रमों में इस बंदूक का रूतबा ही अलग होता था। छोटे से लेकर बड़े चुनावों तक में इस बंदूक को कंधे पर टंगा देख वोट बैंक का रुख तक बदल जाया करता था। ये कहना है कंकरखेड़ा निवासी कदम सिंह का। उन्होंने बताया कि उनके पास 1973 से बंदूक है और उन्होंने ये सारे दौरा देखे हैं।

बदल गया दौर

कदम सिंह ने बताया कि अब दौर बदल गया है और लोगों की च्वॉइस भी बदल गई है। बाजार ने लोगों को एक से एक हथियार के ऑप्शन उपलब्ध करा दिए हैं। अब बंदूक का दौर नहीं रहा अब ऑटोमैटिक हथियारों का जमाना है। टेक्नोलॉजी ने सब बदल कर रख दिया, बाजार में एक से एक कंपनी और एक से एक हथियार लोगों को लुभा रहा है।

बंदूक का जलवा खत्म

कदम सिंह ने बताया कि आज बाजार में तीसरे लाइसेंसी शस्त्र के रूप में 12 बोर की बंदूक को बेचने या जमा करने पहुंच रहे लोगों कौडि़यों के रेट भी नहीं मिल रहे हैं। इसका सबसे बड़ा कारण है नए और अत्याधुनिक हथियार। जो न केवल लोगों को लुभा रहे हैं बल्कि पुराने हथियारों के बाजार को खत्म भी करते जा रहे हैं।

ये रिवॉल्वर भी फेवरेट

निशंक

कीमत 94 हजार

कैलिबर .32 बोर

वजन 740 ग्राम

बैरल की कुल लंबाई 131.65 एमएम

मारक क्षमता 50 मीटर

फीड रिवॉल्विंग चैंबर (6 राउंड)

निर्भीक

कीमत 1 लाख 22 हजार

कैलिबर 7.65 मिलीमीटर

वजन 0.525 किलोग्राम

बैरल की लंबाई 120.63 मिलीमीटर

मारक क्षमता 15 मीटर

फीड रिवाल्विंग चैंबर (6 राउंड)

निडर

कीमत 35 हजार

कैलिबर .22

वजन 250 ग्राम

बैरल की कुल लंबाई 40.3 एमएम

मारक क्षमता 7 मीटर

फीड रिवाल्विंग चैंबर (6 राउंड)

ऑर्डिनेंस के वेपन भी पीछे नहीं

हथियार रेट बोर मारक क्षमता

रायफल 90 हजार से 1.5 लाख .30 275 मीटर

रिवॉल्वर (कानपुर) 1 लाख .32 50 मीटर

पिस्टल (कोलकाता) 1.05 लाख .30 व .32 40 मीटर

बंदूक 30 हजार से 50 हजार 12 बोर 18 मीटर

विदेशी ब्रांड के वेपन हिट

ब्रांड रेटरेटरेट बोर रेंज

वेब्ले पिस्टल - 3 लाख करीब .32 व .30 40 मीटर

स्टार पिस्टल - 4 से 5 लाख करीब .32 व .30 40 मीटर

ब्रेटा पिस्टल - 8 लाख करीब .32 व .30 40 मीटर

वेब्ले रिवॉल्वर - 3.5 लाख करीब .32 50 मीटर

सिमी एंड वेसन रिवॉल्वर - 5 लाख करीब

रायफल ऑटोमैटिक स्प्रिंग फील्ड (सेकेंड व‌र्ल्ड वॉर में हुई इस्तेमाल)

(4.5 लाख) .30 350 मीटर

दुकानदारों का कोटा नई और पुरानी बंदूकों को मिलाकर

30 - बंदूक करीब

25 - रायफल करीब

10 - पिस्टल करीब

10 - रिवॉल्वर करीब

ये है कारतूसों का कोटा

रेट - कोटा

12 बोर - 40 से 70 रूपये - 2,000

315 बोर - 1200 (10 कारतूस)- 2,000

.32 बोर - 75 रुपये -2,000

.30 बोर - 1100 रुपये (10 कारतूस)- 2,000

.22 बोर - 30 से 100 रुपये - 2,000

Posted By: Inextlive
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