फिर तो जाएंगी कई जानें

2015-04-26T07:01:45Z

-आपदा प्रबंधन का शहर में नहीं कोई इंतजाम

-सिर्फ NDRF की एक कम्पनी है मौजूद

-आपात स्थिति से निबटने के लिए नहीं होती है ट्रेनिंग

VARANASI : भूकम्प के झटके ने बनारस में आपदा प्रबंधन की पोल खोल दी। शनिवार को एक वक्त ऐसा आया जब शहर का हर शख्स अपने जान की सलामती की दुआ कर रहा था। लेकिन उसके आसपास ऐसा कुछ भी नहीं था जिससे आपदा की आई इस घड़ी में उसकी मदद हो सके। जी हां, शहर में डिजास्टर मैनेजमेंट के नाम पर सिर्फ एनडीआरएफ (राष्ट्रीय आपदा मोचक बल) की एक कम्पनी मौजूद है।

बनारस में आपात स्थिति से निबटने के लिए ट्रेनिंग का कोई इंतजाम नहीं है। स्कूल-कॉलेज में कभी-कभी ट्रेनिंग सिर्फ आग से लड़ने की होती है। जिसका रिजल्ट ये रहा कि शनिवार को भूकंप आने पर भगदड़ में कई स्टूडेंट्स घायल हो गए। प्राइवेट हो या गवर्नमेंट ऑफिस में भी ट्रेनिंग नहीं होती है। यह वजह रही कि भूकंप के दौरान ऑफिसेज से जान बचाकर भागते वक्त हर कोई खुद को सेफ करने की कोशिश करता रहा। आपदा से बचाव के लिए कॉमन पब्लिक को भी किसी तरह की ट्रेनिंग देने का सिस्टम लोकल एडमिनिस्ट्रेशन के पास नहीं है।

सिर्फ नाम के इंतजाम

-बनारस में डिजास्टर मैनेजमेंट के नाम पर एनडीआरएफ की टीम मौजूद है

-एक साल पहले पटना से नौवीं बटालियन अल्फा की एक कंपनी को तैनात किया गया है

-फायर ब्रिगेड के पांच सेंटर्स हैं जिसमें दो दर्जन छोटी-बड़ी गाडि़यां मौजूद हैं।

-किसी आपात स्थिति में इनकी कारवाई बहुत कारगर साबित नहीं हो पाती है।

-बनारस में आपदा की स्थिति सिर्फ बाढ़ और आग को मानी जाती है।

-आपदा प्रबंधन के लिए नोडल अधिकारी की नियुक्ति नहीं है।

-आग से लड़ने के लिए हैवी हाइड्रोलिक व्हीकल मौजूद है लेकिन कभी उसका इस्तेमाल नहीं हुआ है।

-शहर में कई सामाजिक संगठन भी आपदा प्रबंधन की बात करते हैं लेकिन जमीन पर कुछ नहीं है।

NDRF की टीम गोरखपुर रवाना

भूकंप से नेपाल में आई तबाही के बाद बचाव कार्य के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचक बल (एनडीआरएफ) की एक टीम बनारस बेस कैंप से गोरखपुर के लिए रवाना हो गई। डिप्टी कमांडेंट अभिनंदन किशोर के नेतृत्व में ब्क् जवानों की टीम गोरखपुर के लिए निकली है।

चलता रहा अफवाहों का दौर

भूकम्प का झटका झेलने वाले शहर को अफवाहों ने भी खूब परेशान किया। दो झटकों के बाद यह अफवाह उड़ती रही कि दो या तीन बार और झटके भूकम्प के लगेंगे। इससे दहशत कायम रहा। बिल्डिगों के गिरने और जान-माल के नुकसान को लेकर भी अफवाह उड़ती रही। अफवाहों को हवा देने में सोशल नेटवर्किग साइट्स ने अहम भूमिका निभायी। फेसबुक, वाट्सएप समेत अन्य नेटवर्क पर लोग तरह-तरह के अफवाह फैलाते रहे।

रिक्टर स्केल पर संकेत

-0 से क्.9 सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही पता चल सकता है।

-ख् से ख्.9 पर हल्का कम्पन का एहसास होता है।

- फ् से फ्.9 में ऐसा एहसास होता है जैसे कोई ट्रक गुजर गया।

-ब् से ब्.9 में खिड़कियां टूट सकती हैं।

-भ् से भ्.9 पर फर्नीचर हिल सकता है

-म् से म्.9 पर इमारतों की नीव दरक सकती है।

-7 से 7.9 में इमारतें गिर जाती हैं

-8 से 8.9 में इमारत, बड़े पुल गिरते हैं।

-9 पर पूरी तबाही, सुनामी का खतरा रहता है।

भूकम्प आने पर ऐसे करें बचाव

-भूकम्प आने पर फौरन घर या स्कूल से निकलकर सेफ प्लेस, खुले मैदान में जाएं,

-बड़ी बिल्डिंग्स, पेड़, बिजली के पोल्स से दूर रहें।

-भूकम्प के दौरान बिल्डिंग से बाहर जाने के लिए सीढि़यों का इस्तेमाल करें।

-अगर किसी बिल्डिंग में फंस गये हों तो घबरायें या भागें नहीं।

-किसी मजबूत डेस्क आदि के नीचे छुप जाएं।

-मजबूत दीवार से सटकर नाजुक बदन सिर आदि को मोटी किताब आदि से ढक लें।

-खुलते-बंद होते दरवाजे के पास खड़े न हों, इससे चोट लग सकती है।

-गाड़ी में है तो बिल्डिंग्स, होर्डिग्स, पोल्स, फ्लाईओवर, पुल से दूर रहें।

-खुले मैदान में गाड़ी रोक लें और भूकम्प थमने का इंतजार करें।

Posted By: Inextlive

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