परडे कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल में तीन व बीएचयू में ब्रेन स्ट्रोक के पहुंच रहे छह मरीज 10 मरीज प्रतिदिन शहर के प्राइवेट हॉस्पिटल्स में भी पहुंच रहे


वाराणसी (ब्यूरो)भइया कोल्ड वेदर से बचके रहइया बहुत तेजी से अटैक करत हौ। अपने लोगन के घरे में ही रखा काहे की बाहर बहुत ही कड़ाके ठंड पड़त हौ तुरंत अटैक कर देत हो। देखा अपने चचा के लेके आइल हई। यह कहना है कि अस्पतालों में पहुंचे मरीजों के परिजन का जिनके मरीज को ब्रेन स्ट्रोक का अटैक पड़ा था और ओपीडी में इलाज के लिए पहुंचे थे। ठंड का पारा चढ़ते ही हास्पिटल में ब्रेन के साथ हार्ट अटैक के केस बढ़ गए हैं। प्रतिदिन 10 से 12 बाहर मरीज पहुंच रहे हैं। यह मनुष्य को कोमा तक पहुंचाने वाली खतरनाक बीमारी है, वहीं इसका दूसरा बिगड़ा स्वरूप लकवा भी है।

बीएचयू में 7-8 केस

सर सुंदर लाल चिकित्सालय में ठंड के बढ़ते ही ब्रेन स्ट्रोक के मरीज 5 से 6 की संख्या में पहुंच रहे है। इनमें ज्यादातर ओल्ड एज की संख्या ज्यादा है। ऐसे मरीजों को ब्रेन स्ट्रोक पडऩे के बाद लकवा की भी शिकायत आ रही है। ऐसे में डाक्टर्स ऐसे मरीज को दवा तो दे ही रहे है साथ ही गर्म कपड़ा पहनकर रहने की सलाह भी दे रह है। कबीरचौरा में भी तीन से चार केस प्रतिदिन आ रहे है लेकिन उनको डाक्टर बचकर रहने की सलाह दे रहे है।

गाढ़ा हो जाता खून

फिलहाल डाक्टर इन्द्रनील बसु का कहना है कि ठंड के दिनों में जिन की अवस्था 50 के ऊपर उनके खून गाढ़ा हो जाता है। इसके चलते ब्रेन स्ट्रोक की शिकायत बढ़ जाती है। क्योंकि यह स्ट्रोक पैर की नस हो या फिर हार्ट की नस किसी के भी सिकुडऩे पर अटैक पड़ता है। सबसे ज्यादा दिक्कत ब्लड प्रेशर के मरीज को होता है। क्योंकि वह ठंड को बर्दाश्त नहीं कर पाते है इससे उन्हें आर्ट अटैक और ब्रेन स्टोक का झटका पड़ता है। प्रतिदिन औसतन पांच से छह लोग इसके शिकार हो रहे है। पीडि़तों में बुजुर्गों की संख्या ज्यादा है। बीपी और मधुमेह अनियंत्रित होने से हृदय रोगियों की दिक्कतें बढ़ी हैं.

इन्फार्ट स्ट्रोक का खतरा

इन्फार्ट स्ट्रोक खून का थक्का जमने से होता है। ब्रेन की धमनियों में जमनेसे आगे बल्ड नहीं पहुंच पाता है इसके चलते ब्रेन का हिस्सा सूख जाता है। इसके चलते लकवा और स्ट्रा्रेक की शिकायत बढ़ जाती है। कई बार तो लंग्स में खून का थक्का जम जाता है। इसके लिए डाक्टर कैरोटिट आट्ररी कराते है पैर के नसों के लिए डाप्लर कराते तब जाकर चता चलता है कि पैर की नसों में खून का थक्का जमा है।

नसें फट जाती हैं

डॉ। एसके अग्रवाल का कहना है कि दिमाग में खून का थक्का जम जाने और अचानक बीपी हाई हो जाता है, दिमाग की नसें फट जाती हैं। समय से इलाज न मिलने ले मरीज कोमा में भी चला जाता है। ऐसा होने पर दिमाग को ऑक्सीजन व ब्लड की आपूर्ति नहीं हो पाती है और मरीज को लकवा मार जाता है.

ठंड में मरीजों की संख्या कम हो गयी है। ब्रेन से संबंधित मरीज दो से चार की संख्या में प्रतिदिन आ रहे हैं। ऐसे लोगों को ठंड से बचकर रहने की सलाह दी जा रही है.

डॉएसपी सिंह, एसआईसी, कबीरचौरा मंडलीय अस्पताल

कड़ाके की ठंड में सबसे अधिक दिक्कत मधुमेह, बीपी के मरीजों को दिक्कत होती है। इसके चलते बेन स्ट्रोक और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ जाता है.

डॉइन्द्रनील बसु, कार्डियक

बुजुर्गों को तो कड़ाके की ठंड में बचकर रहना चाहिए। क्योंकि वह ठंड के चलते बहुत कम ही चलते-फिरते है। इसलिए खून गाढ़ा हो जाता है.

डॉएसके अग्रवाल, एसो। प्रो। बीएचयू

Posted By: Inextlive