फॉल्ट आने पर बिजली को लेकर उपभोक्ताओं को नहीं होना होगा परेशान 487 करोड़ की लागत से पुरानी काशी क्षेत्र और वरुणापार क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य किया गया


वाराणसी (ब्यूरो)स्मार्ट सिटी बनारस को महानगरों की तरह स्मार्ट बनाने के लिए सबसे पहले आसमान में लटकते तारों के जंजाल को समाप्त करने का काम शुरू किया गया था। पीएम मोदी के ड्रीम प्रोजेक्ट इंटीग्रेटेड पावर डेवलपमेंट स्कीम (आइपीडीएस) के तहत करीब 487 करोड़ की लागत से पुरानी काशी क्षेत्र और वरुणापार क्षेत्र में अंडरग्राउंड केबलिंग का कार्य किया गया है। योजना के तहत बिजली विभाग की ओर से यहां दर्जनों एरिया को ओवर हेड तारों से मुक्त तो कर दिया गया, लेकिन हकीकत में अभी भी कई एरिया तारों के मकडज़ाल से घिर हुए हैं। चौक और बांसफाटक क्षेत्र की बात करें तो यहां-जहां आईपीडीएस का जंक्शन बॉक्स लगा है, वहां अभी भी तारों का जंजाल दिखाई दे रहा है.

संकरी गलियों में दिक्कत

जिस मकसद से यहां आईपीडीएस योजना लागू की गई, वो सही मायने में पूरी नहीं हो पाई है। गलियों के शहर बनारस में जिन एरिया में संकरी गलियां हैं और जहां तक आईपीडीएस का जंक्शन बॉक्स नहीं लगा है वहां अब ओवरहेड केबल वायर लगाए जा रहे हैं। ज्यादातर गलियां पुरानी काशी क्षेत्र के चौक, बांसफाटक और उसके आसपास के एरिया में हैं। ऐसे में उन गलियों में ओवरहेड तार के जरिए ही पावर सप्लाई का इंतजाम किया जा रहा है। अब अगर इसी तरह से घरों के बाहर से बिजली के तीन फेज की लाइने दौड़ाई जाएंगी तो आने वाले समय में एक बार फिर इन क्षेत्रों में तारों का बड़ा जंजाल देखने को मिलेगा। हालांकि बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जहां अंडरग्राउंड केबलिंग का काम हुआ है, वहां ओवरहेड तार नहीं जाएंगे, लेकिन जहां खोदाई न होने से अंडरग्राउंड काम नहीं हो सकता वहां ओवरहेड वायर ही एकमात्र विकल्प है.

50 हजार को भूमिगत बिजली

बता दें कि आइपीडीएस के तहत पहले चरण में पुरानी काशी में बिजली के तार भूमिगत हुए थे। इसके लिए 431 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे। हालांकि कार्य 362 करोड़ रुपये में ही पूरा हो गया। शेष राशि दूसरे चरण में शिफ्ट कर दी गई। वहीं दूसरे चरण का काम तय मियाद मार्च 2021 से नौ माह विलंब से जनवरी 2022 में पूरा किया गया। बिजली के तारों को अंडरग्राउंड करने की इस परियोजना पर 125.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए। आइपीडीएस परियोजना के दोनों फेज में दर्जनों मुहल्ले तारों के जंजाल से मुक्त हुए हैं। इससे 50 हजार के करीब उपभोक्ताओं की बिजली भूमिगत व्यवस्था से दी जा रही है.

क्या है फायदा

आइपीडीएस के तहत लगाए गए सभी वितरण पैनल बाक्स से कनेक्शन देकर ताले लगाए गए हैं। नए तरह के बाक्स में इनबिल्ड लाक है, जिसे कोई बाहरी व्यक्ति तोड़ नहीं सकता है। इसके अलावा 24 घंटे निर्बाध आपूर्ति मिलती है। बिजली चोरी भी कम हुई है। कहा गया था कि आईपीडीएस के तहत जहां भी कार्य हुए है वहां ओवरहेड तार दिखाई नहीं देंगे। लेकिन अब जब गलियों और जहां अंडरग्राउंड केबलिंग नहीं की गई है, वहां उसी रास्ते से ओवरहेड वायर दौड़ाए जा रहे हैं। यही नहीं उन एरिया में पहले से ही बिजली के पोल के सहारे इंटरनेट, टेलीफोन और टीवी केबल के तार लटक रहे हैं।

बनारस को गलियों का शहर कहा जाता है। लिहाजा पुरानी काशी क्षेत्र में हुए आईपीडीएस वर्क में जिन गलियों में जंक्शन बॉक्स या भूमिगत केबलिंग नहीं हो सके है, वहां ओवरहेड वायर ही एकमात्र विकल्प है। इसलिए वहां इस पर काम हो रहा है।

अनूप सक्सेना, एसई, फस्र्ट, पीवीवीएनएल

Posted By: Inextlive