मुख्य सप्लायरों की तलाश में जुटेंगी एसटीएफ व कमिश्नरेट पुलिस की टीमेंअब तक की जांच के आधार पर बनाई गई है कुल 18 गुनाहगारों की लिस्ट नकली दवा की फैक्ट्री पकडऩे के लिए दिल्ली व हिमांचल प्रदेश भी भेजी जाएंगी टीमें

वाराणसी (ब्यूरो)एसटीएफ द्वारा नकली दवा के रैकेट का खुलासा करने के बाद सिगरा पुलिस ने अब तक इस गोरखधंधे से जुड़े 18 लोगों का पता लगाया है। इनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अब सारी कवायद इनकी गिरफ्तारी को लेकर शुरू हो गई है। इसके लिए एसटीएफ टीम लगी है। अब होली के बाद क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम नकली दवा के गुनाहगारों को ढूंढ़ेगी। स्पेशल टीम के टारगेट पर वाराणसी के लोगों के साथ दिल्ली में मौजूद अमित दुआ उर्फ ताऊजी और रजनी भी है। इसके लिए टीम दिल्ली, हिमाचल समेत अन्य जगहों पर दस्तक देगी.

नकली दवा के रैकेट का सरगना अशोक कुमार था, जो पुलिस की गिरफ्त में है। लेकिन एसटीएफ के साथ कमिश्नरेट पुलिस नकली दवा के गोरखधंधे को जड़ से खत्म करना चाहती है। इसलिए नकली दवा के मुख्य सप्लायर अमित व रजनी को टारगेट पर लिया गया है। पुलिस के अनुसार अमित बहुत ही शातिर दिमाग का है। वह किसी से मिलता-जुलता नहीं है। यही नहीं किसी से मोबाइल पर बात भी नहीं करता है। नकली दवा का आर्डर इंटरनेट कॉल के जरिए लेता है। यही वजह है कि लंबे समय से नकली दवा पर नजर रखने वाली एसटीएफ के हाथ अभी तक अमित नहीं लग पाया है। हालांकि अशोक कुमार के जरिए अब क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम उसके पीछे लगेगी।

पूछताछ के दौरान आरोपित अशोक कुमार के मोबाइल काल रिकार्ड से बहुत लोगों का पता चला है। कई राज्यों में इस गिरोह का जाल फैला हुआ है। बरामद नकली दवाओं की जांच के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला में नमूना भेजा जाएगा। मामले के विवेचक प्रकाश ङ्क्षसह ने बताया कि आरोपित अशोक कुमार की पांच दिन की पुलिस रिमांड के लिए अदालत में अर्जी दी गई है।

कहां-कहां नकली दवा

नकली दवा का कारोबार करने वाले चूना, चाक, मिट्टी का इस्तेमाल करके नकली दवा बनाते थे और उसे जीवन रक्षक दवाओं के नाम पर बेचते थे। दवा की पैङ्क्षकग पर खास ध्यान दिया जाता था, ताकि उसकी पहचान नहीं हो सके। खाद्य सुरक्षा व औषधि विभाग इसका पता लगाने में जुटा है कि बनारस समेत आसपास के किन दुकानों में नकली दवाएं पहुंचीं हैं। ड्रग इंस्पेक्टर एके बंसल के अनुसार जीवन रक्षक दवाओं की पेटेंट कंपनी के नाम पर नकली दवाएं बनाने वाले इन एक्टिव मैटेरियल का इस्तेमाल करते थे। इससे दवाओं का इस्तेमाल करने वाले को कोई फायदा नहीं होता था तो नुकसान (साइड इफेक्ट) भी नहीं होता था। इस तरह किसी को दवा के नकली होने की जानकारी नहीं हो पाती थी। बैच नंबर से लेकर साल्ट तक का पूरा विवरण पैङ्क्षकग पर होता था। दवा की जांच किए बगैर कोई भी इसे नकली नहीं बता सकता था.

नकली दवा के गोरखधंधे में लिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई चल रही है। एफआईआर दर्ज करने के बाद आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। होली के बाद नकली दवा के गुनाहगारों को ढूंढऩे का काम क्राइम ब्रांच की स्पेशल टीम करेगी.

श्रुति श्रीवास्तव, एसीपी चेतगंज

Posted By: Inextlive