वायरल इंफेक्शन व कोरोना से बढ़ रहा बनारस के युवाओं में बहरापन अस्पताल में हर महीने आ रहे 8 से 10 मरीज प्राइवेट अस्पतालों में भी आ रही इस तरह की शिकायतें


वाराणसी (ब्यूरो)क्या बुखार होने के बाद किसी के कान में तकलीफ हो सकती है, या किसी की सुनने की क्षमता कम हो सकती है। नहीं ना, लेकिन ऐसा हो रहा है। कोविड-19 यानी कोरोना महामारी के बाद लोग लगातार नई-नई बीमारियों की गिरफ्त में आ रहे हैं। अब तो एक्सपर्ट और चिकित्सक भी मानने लगे हैं कि कोरोना ने आम लोगों के शरीर को खोखला कर दिया है, जिसके कारण छोटी बीमारी भी बड़ा रूप ले रही है। इसी क्रम में अब लोगों में कान की समस्या सामने आ रही है। दरअसल पिछले साल गर्मी के दिनों में फैले वायरल फीवर के कारण जहां लोग चिकनगुनिया होने से जोड़ों में दर्द की समस्या से महीनों तक परेशान थे, वहीं अब ऐसे मरीजों में कम सुनाई देने की शिकायत मिल रही है। शहर के करीब-करीब सभी अस्पतालों की ईएंडटी ओपीडी में ऐसे मरीज पहुंच रहे हैं। यहां मरीज कान भारी होने, कम सुनाई देने और कानों में सांय-सांय, सुरसुराहट महसूस होने की समस्या बता रहे हैं।

पीडि़तों में युवा वर्ग सबसे ज्यादा

एसएस हॉस्पिटल बीएचयू के ईएंडटी विभाग के डॉक्टर्स का कहना है कि इस तरह के मरीजों की संख्या बढ़ रही है। यहां हर सप्ताह एक से दो मरीजों में इस तरह की शिकायतें देखने को मिल रही है। इस विभाग के चिकित्सकों का कहना है कि यह कुछ माह पहले फैले वायरल या चिकनगुनिया का असर है। ये सब इसी वायरल का नतीजा है। कम सुनाई पडऩे या सुनने की क्षमता कम होने की शिकायत करने वालों में 25 से 30 उम्र के युवाओं की संख्या अधिक है। डॉक्टर्स का यह भी कहना है कि कानों से कम सुनाई पडऩे का आभास होते ही तुरंत डॉक्टर से संपर्क करे। अगर 72 घंटे के अंदर इलाज शुरू हो जाता है तो सुनने की शक्ति बच सकती है।

हर अस्पताल में आ रहे ऐसे मरीज

सिर्फ बीएचयू में ही नहीं मंडलीय अस्पताल, पं। दीनदयाल जिला अस्पताल के अलावा शहर के प्राइवेट अस्पतालों की ईएंडटी ओपीडी में इस तरह के मरीज जांच के लिए पहुंच रहे हैं। मंडलीय अस्पताल के ईएंडटी स्पेशलिस्ट का कहना है कि पहले कानों की समस्या लेकर ओपीडी में आने वाले मरीजों की संख्या कम थी, लेकिन इधर कुछ माह से इस संख्या में इजाफा हुआ है। महीने में 15 से 20 मरीजों में इस तरह की समस्या देखी जा रही है। वहीं प्राइवेट हॉस्पिटल में भी ऐसे मरीज आ रहे हैं। ईएनटी सर्जन डॉ। अंशुमान सिंह का कहना हैं कि लिसनिंग लॉस अक्सर उम्र बढऩे या लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने के कारण होता है। साथ ही यह तेज़ बुखार का वजह भी हो सकता है। तेज बुखार से बढ़ा हुआ तापमान कान के उस हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है जिसे कोक्लीअ कहा जाता है, जो आपकी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। पिछले दिनों फैले वायरल फीवर का यह नतीजा हो सकता है।

क्यों बुखार कानों को प्रभावित करता है

एक्सपर्ट की माने तो किसी को बुखार और कान में दर्द हो सकता है। संक्रमण दूर होने के बाद मध्य कान में द्रव (प्रवाह) और बलगम जमा हो जाता है। इससे ऐसा महसूस हो सकता है कि आपका मध्य कान भरा हुआ है। जिसे मरीज को कान में भारीपन महसूस होता है।

इस तरह के तरह के मरीजों की संख्या बढ़ी है। पहले साल में दो या तीन केस ही इस तरह के आते थे। जांच में ऐसे लोग दो से तीन महीने पहले फैले वायरल फीवर से पीडि़त थे या चिकनगुनिया, मंकी पॉक्स या अन्य संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। कोरोना से संक्रमित हो चुके लोगों को सुनने में दिक्कत हो रही है। उनकी सुनने की नस (ऑडिटी नर्व) सूख गई होती है या सूख रही है।

डॉसुशील अग्रवाल, एचओडी, ईएनटी-बीएचयू

लिसनिंग लॉस अक्सर उम्र बढऩे या लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने के कारण होता है। साथ ही यह तेज़ बुखार का वजह भी हो सकता है। तेज बुखार से बढ़ा हुआ तापमान कान के उस हिस्से को नुकसान पहुंचा सकता है जिसे कोक्लीअ कहा जाता है, जो आपकी सुनने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। पिछले दिनों फैले वायरल फीवर और कोरोना का यह नतीजा हो सकता है.

डॉअंशुमान सिंह, ईएनटी सर्जन

Posted By: Inextlive