100 साल बेमिसाल

Updated Date: Sun, 24 Jan 2021 03:42 PM (IST)

- स्थापना दिवस को भव्य बनाने में जुटा विद्यापीठ

-महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ की स्थापना के 10 फरवरी को पूरे हो जाएंगे सौ साल

-भव्य आयोजन से शुरु होकर एक सप्ताह तक होगा कार्यक्रम

महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ में शताब्दी दिवस पर भव्य आयोजन होगा। इस दिन होने वाले कार्यक्रम के लिए यूनिवर्सिटी प्रशासन ने तैयारी शुरु कर दी है। हालांकि काशी विद्यापीठ ने सन् 2020 से ही शताब्दी वर्ष में कदम रख दिया था। जिसके बाद पूरे साल विविध कार्यक्रम हुए। अब वह घड़ी नजदीक आ गयी है जब काशी विद्यापीठ 10 फरवरी 2021 को अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लेगा। इसके बाद शताब्दी सप्ताह का आयोजन होगा। इस बीच विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन होगा। प्रत्येक कार्यक्रम में काशी विद्यापीठ की स्थापना के महत्व से लोगों को रूबरू कराया जाएगा।

पीएम को भेजा गया आमंत्रण

स्थापना दिवस कार्यक्रम के चीफ गेस्ट के तौर पर बनारस के सांसद व पीएम नरेंद्र मोदी को आमंत्रित किया गया है। यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से उन्हें आमंत्रण पत्र भेज दिया गया है। इसके अलावा देश के अन्य यूनिवर्सिटीज व संस्थानों से भी लोगों को आमंत्रित करने पर मंथन चल रहा है। जल्द ही उन्हें निमंत्रण पत्र भेज दिया जाएगा। हालांकि यूनिवर्सिटी की ओर से उन्हें सूचना भेज दी गयी है।

एक सप्ताह चलेगा कार्यक्रम

यूनिवर्सिटी की स्थापना दस फरवरी 1921 को बसंत पंचमी के दिन महात्मा गांधी ने किया था। ऐसे में इस साल दस फरवरी को स्थापना दिवस कार्यक्रम शुरु होकर 16 फरवरी तक बसंत पंचमी के दिन तक आयोजित होगा। अंग्रेजी और हिंदी दोनों तिथियों को समाहित करते हुए एक सप्ताह का कार्यक्रम बनाया गया है।

यूनिवर्सिटी से कॉलेज तक प्रोग्राम

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा स्थापित इस विश्वविद्यालय ने शताब्दी साल को यादगार बनाने के लिए पूरे साल अलग-अलग कार्यक्रम आयोजित हुए। यानी सन् 2020 से ही स्थापना दिवस के लिए कार्यक्रम स्टार्ट हो गया था। जिसमें यूनिवर्सिटी के विभिन्न विभागों सहित कॉलेजेज व अन्य संस्थाओं व सरकार के सहयोग से महात्मा गांधी व काशी विद्यापीठ से जुड़े कार्यक्रम हुए। वहीं, काशी विद्यापीठ को ऐतिहासिक महत्व वाली संस्था का दर्जा दिए जाने को लेकर प्रस्ताव भी यूजीसी को भेज दिया गया है। अब देखना है कि स्थापना दिवस के दिन इसकी घोषणा होती है या नहीं।

50 छात्रों से हुई थी शुरुआत

स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाली काशी विद्यापीठ की स्थापना वसंत पंचमी के दिन 10 फरवरी 1921 में हुई थी। यहां सबसे पहले आचार्य कृपलानी के साथ पचास छात्रों ने एडमिशन लिया था तो शिक्षकों में भारतरत्न डॉ। भगवान दास, समाजवादी चिंतक आचार्य नरेंद्र देव, श्रीप्रकाश, आचार्य बीरबल, पूर्व सीएम डॉ। सम्पूर्णानंद, राजस्थान के पूर्व राज्यपाल रघुकुल तिलक जैसे कई नाम हैं। इसके संचालन से जुड़ी कमेटी में मुंशी प्रेमचंद, पं.जवाहर लाल नेहरु, पुरुषोतम दास टंडन, लाला लाजपत राय, जमुनालाल बजाज, दामोदर जोशी और कृष्णकांत मालवीय जैसे दिग्गज रहे थे।

कैंपस में ठहरे थे बापू

सन् 1934 में 26 जुलाई से 02 अगस्त तक बनारस में आयोजित अखिल भारतीय कांग्रेस कार्यकारिणी कमेटी और केंद्रीय हरिजन सेवक संघ के अधिवेशन के दौरान महात्मा गांधी ने यहां विश्राम भी किया था। मानविकी संकाय में आज भी वो कमरा है, जहां बापू अधिवेशन के दौरान रूके थे।

Posted By: Inextlive
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