जिस काशी विद्यापीठ का खेल मैदान तत्‍कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेयी के लिए नहीं खुला, वहां लोकल बीजेपी कार्यक्रम के लिए खोदे गए गड्ढे

Updated Date: Sat, 20 Jan 2018 01:43 PM (IST)

Varanasi : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने नियम बनाया कि कैंपस के स्पो‌र्ट्स ग्राउंड का सिर्फ और सिर्फ खेल या फिर यूनिवर्सिटी के एकेडमिक आयोजनों के लिए होगा. लेकिन जब बात देश और सूबे की सत्ता की थी अपने ही नियम पर यूनिवर्सिटी ने यू-टर्न ले लिया. महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ ने 48 हजार रुपये की मामूली रकम लेकर अपना स्पो‌र्ट्स ग्राउंड बीजेपी के युवा उद्घोष प्रोग्राम के दे दिया. अब इस आयोजन के लिए सालों की मेहनत के बाद तैयार स्पो‌र्ट्स ग्राउंड में गड्ढे खोद राजनैतिक मंच बनाया गया है और बैरकेडिंग की गयी है. स्पो‌र्ट्स एक्टिविटीज कई दिनों से ठप है.

 

- नियम है कि स्पो‌र्ट्स के अलावा अन्य किसी भी एक्टिविटी के लिए यूनिवर्सिटी के ग्राउंड का नहीं होगा यूज

- फिर भी बीजेपी के कार्यक्रम के लिए एकमात्र स्पो‌र्ट्स ग्राउंड को किया गया एलॉट, खुद गए गड्ढे भी

 

अटल जी को भी नहीं अनुमति

काशी विद्यापीठ कैंपस में स्थित एकमात्र ग्राउंड को खेलने लायक बनाने के लिए लगभग 13 साल पहले तत्कालीन वीसी प्रो। सुरेंद्र सिंह ने अथक प्रयास किया था। लाखों रुपये खर्च कर इसे ग्राउंड का स्वरूप दिया जा सका। तब उन्होंने इस ग्राउंड पर केवल स्पो‌र्ट्स एक्टिविटी करने के लिए ही नियम बनवाया। हालांकि इसकी शुरुआत सन् 2002 में ही तत्कालीन वीसी प्रो। रामजन्म सिंह के रहते ही हो गयी थी। इसी का नतीजा था कि इस ग्राउंड पर तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सोनिया गांधी को भी रैली करने की अनुमति नहीं प्रदान की गयी। इसके बाद के जितने भी लोकसभा व विधानसभा के इलेक्शन हुए उस दौरान किसी को भी लाख चाहने के बाद भी राजनैतिक कार्यक्रम करने की परमिशन नहीं दी गई।

 

टूट गयी परंपरा

काशी विद्यापीठ के जिस एकमात्र खेल के मैदान में भाजपा के इस कार्यक्रम को कराने की अनुमति प्रदान की गई है, उसे लाखों रुपये खर्च कर यूनिवर्सिटी के छात्रों व खिलाडि़यों के लिए तैयार किया गया है। यहां कि तक वर्षो तक इस मैदान पर चले दशहरा के दिन रावण दहन के कार्यक्रम को भी नियम की आड़ में रोक दिया गया। इसके पीछे यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन का तर्क रहा कि इससे उक्त खेल का मैदान खराब हो जाता था। अब जब ग्राउंड में सैकड़ों बल्लियां लगाने के लिए जगह-जगह गड्ढे खोद दिये गए हैं तो यूनिवर्सिटी के टीचर्स, स्टूडेंट्स से लेकर आसपास के लोगों में रोष है। उनका एक ही सवाल है कि ग्राउंड में आयोजित हो रहे प्रोग्राम से किसका भला होगा। स्टूडेंट्स, यूनिवर्सिटी या यहां तैनात ऑफिसर्स का।

 

सन् 2014 में टूटा नियम

वर्तमान पीएम व सन् 2014 में बीजेपी के केंद्रीय चुनाव अभियान के कर्ताधर्ता नरेंद्र मोदी के प्रोग्राम के लिए यूनिवर्सिटी के ग्राउंड में हेलीपैड बना दिया गया। जिससे पूरा ग्राउंड तहस-नहस हो गया। इसे किसी तरह खेलने लायक बनाया गया कि सन् 2017 में एक बार फिर पीएम व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के प्रोग्राम के लिए फिर ग्राउंड एलॉट कर दिया गया। इस बार तो महीनों तक ग्राउंड में स्टूडेंट्स का खेल व प्रैक्टिस ठप रहा। जबकि तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव व कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का हेलीकाप्टर उतारने के लिए परमिशन नहीं दी गई।

 

युवा सम्मेलन और सिक्योरिटी के चलते यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन ने ग्राउंड को एलॉट किया है। इससे नियमों की अनदेखी नहीं होगी।

- डॉ। पी नाग, वीसी, काशी विद्यापीठ

 

Posted By: Inextlive
This website uses cookie or similar technologies, to enhance your browsing experience and provide personalised recommendations. By continuing to use our website, you agree to our Privacy Policy  and  Cookie Policy.