लोकसभा चुनाव 2014 में पहली बार लागू किया गया था नोटा का विकल्प यूपी में 2019 में सबसे अधिक नोटा का प्रयोग राबट्र्सगंज और सबसे कम जौनपुर में हुआ


वाराणसी (ब्यूरो)लोकसभा चुनाव हो या विधानसभा चुनाव। ईवीएम में नोटा (नन ऑफ द एबव) का भी ऑप्शन है। अब चूंकि 19 अप्रैल को फस्र्ट फेज के साथ लोकसभा चुनाव की शुरुआत हो रही है, तो सभी राजनीतिक दलों ने जीत के लिए प्रयास तेज कर दिए हैं। हालांकि, वाराणसी लोकसभा क्षेत्र का चुनाव अंतिम चरण में होना है, लेकिन पिछले दो लोकसभा चुनावों पर नजर डालें, तो नोटा पर वोट डालने वालों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। 2019 की बात करें तो प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों पर नोटा के खाते में सबसे अधिक वोट राबट्र्सगंज संसदीय क्षेत्र में और सबसे कम जौनपुर में गए थे। चूंकि, वोटों की गिनती के समय हर पर्सन एक बार यह जरूर जानना चाहता है कि नोटा को कितने वोट मिले। तो आइए जानते हैं पिछले चुनाव में नोटा की कितनी चली

2014 लोकसभा चुनाव

5,92,331 ने दबाया नोटा

वर्ष 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कुल वोटर की संख्या 13,86,72,171 थी। सर्विस वोटर्स की संख्या 1,38,386 थी। चुनाव में कुल 8,04,44,955 वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। सर्विस वोटर्स में से 55834 ने वोट दिया। 2014 में नोटा का प्रयोग 5,92,331 वोटर्स ने किया। नोटा का प्रयोग सबसे अधिक राबट्र्सगंज लोकसभा क्षेत्र के वोटर्स ने किया। यहां 18,489 वोटर्स को कोई भी कैंडिडेट पसंद नहीं आया था। नोटा का सबसे कम प्रयोग अमेठी में हुआ था, जहां 1784 वोटर्स को कोई कैंडिडेट पसंद नहीं आया था।

2019 लोकसभा चुनाव

7,25,097 को कोई पसंद नहीं

2019 लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में कुल वोटर 14,58,58,553 थे। सर्विस वोटर्स की संख्या 2,76,050 थी। चुनाव में कुल 8,54,97,564 वोटर्स ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था। सर्विस वोटर्स में से 2,58,737 ने वोट दिया। इस वर्ष नोटा का प्रयोग 7,25,097 वोटर्स ने किया। प्रदेश में नोटा का प्रयोग सबसे अधिक राबट्र्सगंज लोकसभा क्षेत्र के वोटर्स ने किया। यहां 21,118 वोटर्स को कोई भी कैंडिडेट पसंद नहीं आया था। नोटा का सबसे कम प्रयोग जौनपुर में हुआ था, जहां 2441 वोटर्स को कोई कैंडिडेट पसंद नहीं आया था.

सुप्रीम कोर्ट का आदेश

2013 में सुप्रीम कोर्ट के दिये गए एक आदेश के बाद चुनावों में नोटा का प्रयोग शुरू हुआ। भारत सरकार बनाम पीपल्स यूनियन फॉर सिविल लिबर्टीज मामले में शीर्ष न्यायालय ने आदेश दिया कि जनता को मतदान के लिए नोटा का भी विकल्प उपलब्ध कराया जाए। नोटा के तहत ईवीएम मशीन में नोटा का गुलाबी बटन होता है.

विरोध का प्रतीक

अगर मतदाता को सभी दलों के उम्मीदवार गलत लगते हैं तो वो नोटा का बटन दबाकर अपना विरोध दर्ज करा सकती है। इस आदेश के बाद भारत नोटा का विकल्प उपलब्ध कराने वाला विश्व का 14वां देश बन गया। हालांकि बाद में चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया कि नोटा के मत गिने तो जाएंगे पर इसे रद मतों की श्रेणी में रखा जाएगा। इस तरह ये साफ था कि नोटा का चुनाव के नतीजों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

इन देशों में पहले से नोटा

अमेरिका, कोलंबिया, यूक्रेन, रूस, बांग्लादेश, ब्राजील, फिनलैंड, स्पेन, फ्र ांस, चिली, स्वीडन, बेल्जियम, ग्रीस।

आम चुनाव 2019

2019 भारतीय आम चुनाव : वाराणसी

दल उम्मीदवार कुल वोट पर्सेंट

बीजेपी नरेंद्र मोदी 674,664 63.62

सपा शालिनी यादव 195,159 18.40

कांग्रेस अजय राय 152,548 14.38

नोटा इनमे से कोई भी नहीं 4,037 0.38

आम चुनाव 2014

2014 भारतीय आम चुनाव : वाराणसी

दल उम्मीदवार कुल वोट पर्सेंट

बीजेपी नरेंद्र मोदी 581,022 56.37

एएपी अरविंद केजरीवाल 209,238 20.30

कांग्रेस अजय राय 75,614 7.34

बसपा विजय जयसवाल 60,579 5.88

सपा कैलाश चौरसिया 45,291 4.39

एआईटीसी इंदिरा तिवारी 2,674 0.26

नोटा इनमे से कोई भी नहीं 2,051 0.20

Posted By: Inextlive